प्रदेश में विलायती बबूल (प्रोसोपिस जुलिफोरा) के संपूर्ण उन्मूलन के लिए मंगलवार को जयपुर के दुर्गापुरा स्थित महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में ʻचरागाह प्रबंधन और विलायती बबूल उन्मूलनʼ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चरागाह संरक्षण और पुनर्स्थापना, विलायती बबूल का समूल उन्मूलन, जैव विविधता संरक्षण रहा। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गौ माता का संरक्षण और संवर्धन करना आवश्यक है। जगत जननी गौ माता के बिना मानवता का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। गौ माता पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण घटक है। खाद के रूप में हानिकारक रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है लेकिन गौ माता का गोबर एक प्राकृतिक और अचूक उपाय है जो मिट्टी को पुन: जीवन और पोषण प्रदान करता है। गौ माता के विचरण करने के लिए चरागाह का कुशल प्रबंधन करना आवश्यक है।
पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि चरागाह भूमि में विलायती बबूल से पारंपरिक स्थानीय वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह पौधा हमारे चरागाह, कृषि भूमि, नदियों/नालों के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है, जिसे जड़ से खत्म करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।




