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C M NEWS: आदिवासी समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव होगा देश-प्रदेश का विकास: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजातीय समाज अपनी समृद्ध परंपरा, विशिष्ट संस्कृति और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव के लिए विश्वभर में विख्यात है। इस समाज के वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा और आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्थान और देश का सर्वांगीण विकास जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं है। मुख्यमंत्री सोमवार को डूंगरपुर स्थित आदिवासियों के सबसे बड़े आस्था केंद्र, बेणेश्वर धाम में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। राजस्थान दिवस और भारतीय संस्कृति का संगम— अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष राजस्थान दिवस को भारतीय संस्कृति और कैलेंडर के अनुसार मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि 30 मार्च 1949 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ संयोग में वृहद् राजस्थान की स्थापना हुई थी। इसी परंपरा का सम्मान करते हुए, इस वर्ष 19 मार्च (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को पूरे प्रदेश में राजस्थान दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान की विकास यात्रा में आदिवासियों का योगदान अतुलनीय है, इसीलिए उत्सव की कड़ियाँ उन्हें समर्पित की गई हैं। बेणेश्वर धाम का होगा कायाकल्प— श्रद्धा के केंद्र बेणेश्वर धाम की महत्ता को रेखांकित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि यह भूमि न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास की साक्षी भी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार द्वारा बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण और वहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष कार्य योजना तैयार कर काम करवाया जाएगा, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता हो सके। जनजातीय कल्याण के प्रति संकल्पित सरकार— मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को इस समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए आदिवासियों से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज के प्रमुख व्यक्ति और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के विजन और बेणेश्वर धाम के विकास की घोषणा से क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह देखा गया।

Rajasthan News: प्रदेश में 20 मार्च से शुरू होगा सरसों और चने की सरकारी खरीद 

राजस्थान में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत सरसों और चने की खेती करने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने इन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की तैयारियां पूरी कर ली हैं। जयपुर जिले में पंजीकरण की प्रक्रिया 20 मार्च 2026 से शुरू होने जा रही है, जबकि फसलों की वास्तविक खरीद 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगी। समर्थन मूल्य और मानक — उप रजिस्ट्रार जयपुर ग्रामीण उदय दीप सिंह राठौड़ ने बताया कि भारत सरकार द्वारा सत्र 2026-27 के लिए चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों का 6,200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उपज को सरकार द्वारा निर्धारित एफएक्यू मापदण्डों के अनुसार ही तैयार करके लाएं ताकि उन्हें विक्रय में कोई परेशानी न हो। पंजीकरण और तुलाई की प्रक्रिया— उप रजिस्ट्रार शिरीष वी. चान्दे ने जानकारी दी कि किसानों को उनकी पंजीकृत मोबाइल संख्या पर खरीद की तिथि का संदेश भेजा जाएगा। किसानों को आवंटित तिथि पर ही केंद्र पहुंचना अनिवार्य है। महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्धारित तिथि से अधिकतम 10 दिनों के भीतर ही उपज की तुलाई करवानी होगी। इस समय सीमा का पालन करने से किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जा सकेगा। जिले में व्यवस्थाएं और हेल्पलाइन— जयपुर जिले में किसानों की सुगमता के लिए कुल 42 खरीद केन्द्र स्थापित किए गए हैं। किसी भी तकनीकी समस्या या जानकारी के लिए विभाग ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 जारी किया है। किसान इस नंबर पर संपर्क कर अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान पा सकते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि किसान भीड़ से बचने और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल संदेश में दी गई तिथि पर ही केंद्र पर आएं।

Rajasthan News: राजस्थान में खुरपका-मुंहपका रोग के विरुद्ध महाअभियान का शंखनाद 

राजस्थान सरकार प्रदेश के पशुधन को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को बगरू स्थित श्री रामदेव गोशाला से खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण टीकाकरण कार्यक्रम के सातवें चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस राज्य स्तरीय अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के गोवंश और भैंस वंशीय पशुओं को इस घातक संक्रामक रोग से सुरक्षा प्रदान करना है। पशुपालकों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता— शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार पशु कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पशुधन केवल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों किसानों और पशुपालकों की आजीविका का मुख्य आधार है। पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार सीधा पशुपालकों की आर्थिक उन्नति से जुड़ा है। अभियान का लक्ष्य: 2.32 करोड़ पशुओं का कवच— मंत्री कुमावत ने जानकारी दी कि टीकाकरण के इस सातवें चरण के अंतर्गत राजस्थान के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। विभाग ने इस बार प्रदेश के लगभग 2 करोड़ 32 लाख गौ एवं भैंस वंशीय पशुओं के टीकाकरण का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जिससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य गिरता है, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी भारी गिरावट आती है, जिसका सीधा नुकसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होता है। वर्ष 2030 तक ‘FMD मुक्त राजस्थान’ का संकल्प— पशुपालन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को कड़े निर्देश दिए कि टीकाकरण का यह कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राजस्थान को पूरी तरह से खुरपका-मुंहपका रोग से मुक्त बनाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर पात्र पशु तक वैक्सीन की पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। जन-जन से सहयोग की अपील— कार्यक्रम के दौरान श्री कुमावत ने आमजन और पशुपालकों से भावुक अपील करते हुए कहा, “पशुधन को इस जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए अपने सभी पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और आपके पशुओं के जीवन की रक्षा का कवच है।” उन्होंने विश्वास जताया कि स्वस्थ पशुधन से प्रदेश में श्वेत क्रांति को और मजबूती मिलेगी और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी। इस अवसर पर विभाग के उच्च अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पशुपालक उपस्थित रहे। बगरू की रामदेव गोशाला में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशभर के पशुपालकों में एक सकारात्मक संदेश भेजा है कि सरकार उनके द्वार पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए तत्पर है।

Rajasthan News:राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी- सावधान रहें, सजक बने 

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साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए नई तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के माध्यम से अपराधी परिचितों की आवाज और वीडियो की नकल कर लोगों को कॉल कर रहे हैं और आपात स्थिति का बहाना बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में आमजन भावनात्मक दबाव में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसको लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है। क्या है AI और डीपफेक तकनीक — उपमहानिरीक्षक पुलिस शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो कंप्यूटर को इंसानों की तरह सोचने, बोलने और काम करने में सक्षम बनाती है। इसी तकनीक की मदद से साइबर अपराधी डीपफेक ऑडियो और वीडियो तैयार करते हैं। ये नकली ऑडियो या वीडियो कॉल बिल्कुल किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या चेहरे जैसी लगती है, जिससे सामने वाला व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो सकता है। इसके अलावा ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए नकली फोटो और वीडियो क्लिप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे पहचानें साइबर ठगी के संकेत — साइबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली ठगी में कुछ सामान्य संकेत दिखाई देते हैं। यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के माध्यम से “अभी पैसे भेजो” या “तुरंत ट्रांसफर करो” जैसे संदेश देता है तो सतर्क हो जाएं। कई बार अपराधी डर, घबराहट या गोपनीयता का हवाला देकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए दबाव बनाते हैं। इसके साथ ही ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी मांगना भी साइबर ठगी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। अक्सर ठग पीड़ित को किसी अन्य व्यक्ति से पुष्टि करने से भी रोकने की कोशिश करते हैं। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित — राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित व्यक्ति पैसे मांगता है तो पहले उसके पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर सामान्य कॉल करके जानकारी की पुष्टि जरूर करें। ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी कभी भी किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, वॉइस नोट या वीडियो अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से भी बचें। ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत — यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। सहायता के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है। राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि तकनीक के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।  

C M NEWS: मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा: केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात और आज जायेंगें बेणेश्वरधाम 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इन दिनों प्रदेश के विकास और भविष्य की योजनाओं को गति देने के लिए सक्रिय हैं। रविवार को मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से शिष्टाचार भेंट की। इसके बाद सोमवार को वे डूंगरपुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बेणेश्वरधाम में करोड़ों की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। केंद्रीय मंत्रियों के साथ सार्थक चर्चा— वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री ने ‘पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना’ के तहत राजस्थान को मिल रहे सहयोग के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। दोनों नेताओं के बीच ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को पूरा करने के लिए आधारभूत ढांचे के विस्तार और जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ मुलाकात के दौरान राजस्थान में नई शिक्षा नीति (NEP-2020) को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के शिक्षण के माध्यम से वैश्विक रोजगार से जोड़ने के विजन पर चर्चा की। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश की ‘डबल इंजन सरकार’ ‘शिक्षित प्रदेश-उन्नत प्रदेश’ के ध्येय के साथ युवाओं को नए अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेणेश्वरधाम में 130 करोड़ के कार्यों का शिलान्यास— आज 12 दोपहर बजे मुख्यमंत्री ‘जनजाति गौरव दिवस’ के अवसर पर डूंगरपुर के बेणेश्वरधाम पहुंचेंगे। यहाँ वे 130 करोड़ रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास कर वागड़ क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर बेणेश्वरधाम में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी और राष्ट्रीय धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर सभा स्थल, हेलीपैड और प्रदर्शनी स्थल का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री यहाँ एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जो क्षेत्र के जनजातीय समुदाय के उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Rajasthan News: अलवर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में चोरी और सीना जोरी की घटना 

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राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के सेमला खुर्द गांव में साइबर ठगों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों और आरोपियों के परिजनों ने न केवल हमला किया, बल्कि एक सहायक उपनिरीक्षक को बंधक बनाकर उनकी जान लेने की कोशिश भी की। यह घटना दर्शाती है कि इस क्षेत्र में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। घटना का क्रमवार विवरण— जानकारी के अनुसार, डीग जिले के नगर थाने में तैनात ASI रामनिवास अपनी टीम के साथ साइबर ठगी के वांछित आरोपियों की तलाश में दबिश देने निकले थे। पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि ठगी के मामलों में शामिल आरोपी तस्लीम और साबिर (दोनों पुत्र मुस्ताक) सेमला खुर्द गांव में छिपे हुए हैं। जब पुलिस टीम ने गांव में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया, तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही पुलिस उन्हें ले जाने लगी, आरोपियों के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस का रास्ता रोक लिया। कानून को ठेंगे पर रखते हुए भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और लाठी-डंडों से हमला बोल दिया। ASI को बनाया बंधक, सिर पर किया वार— भीड़ के उग्र रूप को देख पुलिस टीम को पीछे हटना पड़ा, लेकिन इस बीच हमलावरों ने रामनिवास को घेर लिया। हमलावरों ने उन्हें एक कमरे में बंद कर बंधक बना लिया। कमरे के भीतर उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई और वे लहूलुहान हो गए। इतना ही नहीं, हमलावरों ने साक्ष्य मिटाने और संपर्क काटने के उद्देश्य से ASI का मोबाइल फोन भी छीन लिया। पुलिस महकमे में हड़कंप— अपने साथी अधिकारी पर हमले और उन्हें बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल ASI को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। साइबर ठगी का गढ़ बनता इलाका— अलवर और डीग का यह सीमावर्ती क्षेत्र (मेवात बेल्ट) लंबे समय से साइबर ठगी के लिए कुख्यात रहा है। यहाँ के अपराधी तकनीकी रूप से इतने शातिर हैं कि देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। लेकिन अब ये अपराधी और उनके मददगार ग्रामीण इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वर्दी पर हाथ डालने से भी नहीं कतरा रहे। कार्रवाई और कानून का रुख— इस घटना के बाद पुलिस ने हमलावरों की पहचान शुरू कर दी है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस अधिकारी पर जानलेवा हमला करने और आरोपियों को भगाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और उपद्रवियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही है। यह मामला एक बार फिर मेवात क्षेत्र में पुलिसिंग की चुनौतियों और अपराधियों के सामाजिक समर्थन की ओर इशारा करता है, जो समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।

Rajasthan News: राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर यूपी के मुख्यमंत्री का सवालिया निशान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्तौड़गढ़ में दिया गया बयान राजस्थान की राजनीति में नई चर्चा छेड़ गया है। उन्होंने मेवाड़ की शौर्य परंपरा को नमन करते हुए चित्तौड़गढ़ के किले को भारत की अस्मिता का प्रहरी बताया, लेकिन उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जहां उन्होंने यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को ‘गारंटी’ के तौर पर पेश किया। राजस्थान की धरती पर खड़े होकर योगी का यह कहना कि “आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं,” पड़ोसी राज्य की भजनलाल सरकार के लिए एक असहज स्थिति पैदा करता है। भजनलाल सरकार के लिए चुभने वाले मायने— योगी आदित्यनाथ का यह बयान सीधे तौर पर राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। एक ही विचारधारा की सरकार होने के बावजूद, जब एक मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाकर अपने प्रदेश के ‘सुरक्षा मॉडल’ का बखान करता है, तो यह संकेत जाता है कि मेजबान राज्य में स्थिति वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए। राजस्थान में भाजपा ने कांग्रेस शासन के दौरान ‘महिला अपराध’ को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी जमीनी हकीकत में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं दिख रहा है। योगी का बयान राजस्थान सरकार को आईना दिखाने जैसा है कि सुरक्षा केवल वादों से नहीं, बल्कि ‘यूपी मॉडल’ जैसे कड़े इकबाल से आती है। क्या राजस्थान में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?— आंकड़ों और हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में राजस्थान अक्सर शीर्ष राज्यों में रहा है। भजनलाल सरकार के कार्यकाल में भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से दुष्कर्म, अपहरण और घरेलू हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। योगी आदित्यनाथ के ‘सुरक्षा और सम्मान’ के दावे के विपरीत, राजस्थान में आज भी महिलाएं रात के समय घर से बाहर निकलने में असुरक्षा महसूस करती हैं। सरकारी तंत्र की विफलता का ही नतीजा है कि मुख्यमंत्री को दूसरे राज्य के मॉडल की प्रशंसा सुननी पड़ रही है। देशव्यापी स्थिति और खोखले दावे— सिर्फ राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में महिला सुरक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जब नेता ‘पूरी तरह सुरक्षित’ होने का दावा करते हैं, तो वे उन हजारों पीड़िताओं के दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं जो थानों के चक्कर काट रही हैं। चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल से जब सुरक्षा की बात होती है, तो यह केवल चुनावी भाषण बनकर रह जाती है। धरातल पर न तो उत्तर प्रदेश पूरी तरह अपराध मुक्त हुआ है और न ही राजस्थान में सुरक्षा की वह गारंटी दिख रही है जिसका वादा चुनाव के समय किया गया था। योगी आदित्यनाथ का बयान एक ओर तो उनकी अपनी सरकार की पीठ थपथपाता है, लेकिन दूसरी ओर यह राजस्थान की भजनलाल सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा ‘डिस्क्लेमर’ है। यह बयान साफ करता है कि राजस्थान में ‘सुरक्षा का राज’ स्थापित करना अभी कोसों दूर है। जब तक सरकारें आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर कड़े कदम नहीं उठातीं, तब तक “महिलाएं सुरक्षित हैं” जैसे दावे केवल किलों की दीवारों से टकराकर दम तोड़ने वाले नारे ही बने रहेंगे।

Jaipur News: नशे में धुत थार चालक का तांडव, थाने के सामने खड़ी पुलिस की गाड़ी को मारी टक्कर

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राजधानी के बिंदायका थाना इलाके में स्थित सिंवार मोड़ पर उस वक्त अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जब एक तेज रफ्तार और बेकाबू ब्लैक थार ने जमकर उत्पात मचाया। नशे की हालत में धुत एक थार चालक ने कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए बिंदायका थाने के ठीक सामने खड़ी पुलिस की ‘डायल 112’ गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण भिड़ंत में पुलिस का वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। तेज रफ्तार और लापरवाही का मंजर— प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, ब्लैक थार चालक वैशाली नगर की दिशा से मुण्डियारामसर की तरफ जा रहा था। थार की रफ्तार इतनी अधिक थी कि सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों में भी दहशत फैल गई। जैसे ही थार बिंदायका थाने के सामने स्थित सिंवार मोड़ पर पहुंची, चालक ने गाड़ी पर से पूरी तरह नियंत्रण खो दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चालक नशे में इतनी बुरी तरह धुत था कि उसे सामने खड़ी गाड़ियां तक नजर नहीं आईं। पुलिस वाहन और मोटरसाइकिल को बनाया निशाना— बेकाबू थार ने सबसे पहले थाने के बाहर ड्यूटी के लिए तैनात पुलिस की ‘डायल 112’ गाड़ी को अपनी चपेट में लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पुलिस वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और वह काफी दूर तक घिसटती चली गई। थार का कहर यहीं नहीं थमा; पुलिस गाड़ी को टक्कर मारने के बाद उसने पास ही खड़ी एक मोटरसाइकिल को भी जोरदार टक्कर मारी, जिससे बाइक के परखच्चे उड़ गए। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त पुलिस गाड़ी के पास कोई पुलिसकर्मी या राहगीर मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जनहानि हो सकती थी। मचा हड़कंप, आरोपी हिरासत में— थाने के ठीक बाहर जोरदार धमाके की आवाज सुनकर थाने में मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत बाहर दौड़े। मौके पर मौजूद भीड़ ने थार को रुकवाया और चालक को बाहर निकाला। पुलिस ने मौके की नजाकत को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और आरोपी थार चालक को हिरासत में ले लिया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि चालक अत्यधिक शराब के नशे में था, जिस कारण वह गाड़ी को संतुलित नहीं कर पाया। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश— इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों और निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंवार मोड़ और बिंदायका इलाके में आए दिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं। लोगों ने मांग की है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों और ओवरस्पीडिंग करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्त अभियान चलाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। पुलिस की कार्रवाई जारी— बिंदायका थाना पुलिस ने क्षतिग्रस्त पुलिस वाहन और बाइक को कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने आरोपी चालक का मेडिकल परीक्षण करवाया है ताकि रक्त में अल्कोहल की मात्रा की पुष्टि हो सके। आरोपी के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि थार चालक के साथ गाड़ी में और कौन मौजूद था और गाड़ी के दस्तावेज सही हैं या नहीं।

Rajasthan News: प्रदेश के सबसे ‘धनी’ आईएएसों में अम्बरीश कुमार

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राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों आईएएस अधिकारियों की अचल संपत्ति का ब्यौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 तक की स्थिति के अनुसार सार्वजनिक की गई इस ताजा सूची ने कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इस नई लिस्ट में 2004 बैच के आईएएस अधिकारी और वर्तमान में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव, अम्बरीश कुमार प्रदेश के सबसे अमीर आईएएस अधिकारी बनकर उभरे हैं। उनकी अचल संपत्ति का कुल वर्तमान बाजार मूल्य 20.62 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। उनकी संपत्ति में जयपुर के पॉश इलाकों के साथ-साथ अन्य स्थानों पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड शामिल हैं। अन्य शीर्ष अधिकारी भी चर्चा में— अम्बरीश कुमार के अलावा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति भी करोड़ों में दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सूची में कई ऐसे अधिकारी भी हैं जिनकी संपत्ति पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है। इन संपत्तियों में पुश्तैनी जमीनें, फ्लैट्स और विभिन्न शहरों में स्थित प्लॉट शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां कुछ अधिकारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, वहीं कुछ जूनियर आईएएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति ‘शून्य’ भी घोषित की है। पारदर्शिता की ओर कदम— कार्मिक विभाग के नियमानुसार, हर साल आईएएस अधिकारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होता है। समय पर ब्यौरा न देने वाले अधिकारियों की पदोन्नति और विजिलेंस क्लीयरेंस पर रोक लगा दी जाती है। इस बार की रिपोर्ट ने न केवल अफसरों की माली हालत को उजागर किया है, बल्कि आम जनता के बीच भी यह कौतूहल का विषय बना हुआ है कि सेवा के दौरान संपत्तियों के मूल्यों में कितनी वृद्धि हुई है।

rajasthan News: राजस्थान में अवैध शराब के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 16 मार्च से शुरू होगा प्रदेशव्यापी महाभियान

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राजस्थान में अन्य राज्यों से होने वाली शराब की तस्करी और अवैध बिक्री पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। होली के बाद और आगामी महीनों की चुनौतियों को देखते हुए विभाग ने 16 से 31 मार्च तक पूरे प्रदेश में एक विशेष ‘निगरानी एवं धरपकड़’ अभियान चलाने का निर्णय लिया है। आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने को कहा है। तस्करी के रूटों पर पैनी नजर— अभियान का मुख्य फोकस पड़ोसी राज्यों—विशेषकर हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश—से होने वाली शराब की तस्करी को रोकना है। आबकारी आयुक्त के आदेशानुसार, प्रदेश के सभी जोन और जिलास्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन संभावित मार्गों को चिन्हित करें जहाँ से अवैध शराब का परिवहन होता है। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण लिंक रोड पर स्थित टोल नाकों पर विशेष निगरानी टीमें तैनात की जाएंगी। संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली जाएगी ताकि तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। होटल, ढाबे और समारोह स्थल रडार पर— आबकारी विभाग के इस 15 दिवसीय अभियान की खास बात यह है कि इस बार कार्रवाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग की टीमें शहर और कस्बों के उन ठिकानों पर भी धावा बोलेंगी जहाँ बिना लाइसेंस के शराब परोसे जाने की शिकायतें मिलती हैं। ढाबे और होटल: हाईवे पर स्थित ढाबों और होटलों की औचक जांच की जाएगी। अक्सर यह देखा गया है कि अवैध शराब के भंडारण के लिए ढाबों का उपयोग एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया जाता है। मैरिज गार्डन और समारोह स्थल: मार्च के महीने में शादियों और सामाजिक समारोहों की अधिकता रहती है। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इन आयोजनों में परोसी जाने वाली शराब वैध हो और उसके लिए आवश्यक परमिट लिया गया हो। आयुक्त के सख्त निर्देश: लापरवाही पर गिरेगी गाज— आबकारी आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने साफ किया है कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की बिक्री या तस्करी पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त टीमें बनाएं ताकि छापेमारी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। राजस्व सुरक्षा और जन स्वास्थ्य प्राथमिकता— इस अभियान के पीछे विभाग के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, अवैध शराब की बिक्री से सरकारी राजस्व को होने वाली भारी चपत को रोकना। दूसरा, मिलावटी और जहरीली शराब से होने वाली जनहानि को रोकना। अक्सर अन्य राज्यों से आने वाली सस्ती और मिलावटी शराब लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनती है। क्या होगी कार्रवाई?— अभियान के दौरान यदि कोई व्यक्ति या प्रतिष्ठान अवैध शराब की तस्करी, भंडारण या परिवहन में लिप्त पाया जाता है, तो आबकारी अधिनियम के तहत सख्त मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। बिना लाइसेंस शराब बेचने वाले ढाबों और होटलों को सील करने की कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। आबकारी विभाग के इस कड़े रुख से शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है। 16 से 31 मार्च तक चलने वाला यह विशेष अभियान राजस्थान में अवैध शराब के कारोबार की कमर तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।