राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अब प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ‘अटल ज्ञान केन्द्रों’ के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर ही आधुनिक लाइब्रेरी और विश्वस्तरीय शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने जा रही है।
शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान श्री शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन केंद्रों को ‘स्मार्ट लर्निंग हब’ के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव के प्रतिभावान युवाओं के पास संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। सरकार की मंशा है कि गांव का युवा अपने घर के पास ही शांत और संसाधन युक्त वातावरण में पढ़ाई कर सके।
डिजिटल संसाधनों और ई-मित्र सेवाओं से लैस होंगे केंद्र—
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अटल ज्ञान केन्द्रों पर न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी प्रमाणिक पुस्तकें और समसामयिक पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएं, बल्कि इन्हें डिजिटल संसाधनों से भी सुसज्जित किया जाए। इन केंद्रों पर उच्च गति इंटरनेट के साथ ऑनलाइन क्लासेस की सुविधा विकसित की जाएगी, ताकि छात्र देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों के व्याख्यान सुन सकें। इसके अलावा, युवाओं की सुविधा के लिए इन केंद्रों पर ई-मित्र सेवाएं भी संचालित की जाएंगी, जिससे वे परीक्षाओं के फॉर्म भरने और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ एक ही छत के नीचे पा सकें।
पलायन पर लगेगी रोक—
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं का आर्थिक और मानसिक बोझ कम करना है। अक्सर पढ़ाई के लिए शहरों में रहने का खर्च उठाना ग्रामीण परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि पंचायत स्तर पर ही मूलभूत और आधुनिक सुविधाएं मिलने से युवाओं के समय और धन की बचत होगी, जिससे वे अपनी एकाग्रता के साथ लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ सकेंगे।




