मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरपंच गांवों की लोकतांत्रिक शक्ति के प्रतीक हैं। वे विकास की धुरी हैं, जिनके समर्पण भाव से किए गए कार्यों से ग्रामीण परिवारों के जीवन में खुशहाली आती है। उन्होंने कहा कि सरकारें नीतियां और योजनाएं बनाती हैं लेकिन उन्हें ग्राम स्तर तक क्रियान्वित करने का सशक्त माध्यम सरपंच ही होते हैं। श्री शर्मा सोमवार को कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में सरपंच संघ द्वारा आयोजित निवर्तमान सरपंच (प्रशासक) प्रदेश अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मूल मंत्र को ग्रामीण परिवेश में सरपंच धरातल पर उतारते हैं। सरपंच के दायित्व में जन अपेक्षाओं की पूर्ति और समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण कार्य होता है, जिसे वे पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण भाव से करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी जी राम जी कानून ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इसके माध्यम से मनरेगा की अनियमितताओं को दूर किया गया है। इसके अंतर्गत स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण हो सकेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं को मजबूती मिलेगी। कानून में रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय बजट में वीबी जी राम जी योजना में 95 हजार 692 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की 8 करोड़ जनता के कल्याण और सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास का रोडमैप बनाया है। पानी जैसी बुनियादी सुविधा को प्राथमिकता देते हुए रामजल सेतु लिंक परियोजना, देवास परियोजना, यमुना जल समझौता, आईजीएनपी, गंगनहर, माही सहित परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में आज 22 जिलों में दिन में बिजली दी जा रही है, जो 2027 तक पूरे जिलों में कर दी जाएगी। इसके साथ ही सोलर, बैट्री एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं में प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।




