राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने और निवेश की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी में है। प्रदेश में अब औद्योगिक भूखंडों के आवंटन के पारंपरिक ‘लीज मॉडल’ को बदला जा रहा है। इसके तहत अब तक 99 साल की लीज पर मिलने वाली जमीन को अब 33 साल की अवधि के लिए देने की योजना है। इस बदलाव से औद्योगिक भूखंडों की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है।
निवेशकों के लिए बढ़ेंगे विकल्प—
रीको द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए मॉडल में केवल लीज की अवधि ही कम नहीं होगी, बल्कि उद्यमियों को कई लचीले विकल्प भी मिलेंगे। अब नए निवेशक भूखंड को किराये पर ले सकेंगे, किस्तों में भुगतान कर सकेंगे और भविष्य में उसे खरीदने का विकल्प भी चुन सकेंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमियों को काम शुरू करने के लिए शुरुआत में ही बड़ी पूंजी जमीन पर खर्च नहीं करनी होगी।
वैश्विक और सफल मॉडल्स का अध्ययन—
राजस्थान सरकार और रीको इस मॉडल को लागू करने के लिए सिंगापुर, वियतनाम जैसे देशों के साथ-साथ गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के सफल औद्योगिक मॉडल्स का अध्ययन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में कम अवधि की लीज और लचीली नीतियों के कारण औद्योगिक गतिविधियों में भारी तेजी देखी गई है। केंद्र सरकार के इस कॉन्सेप्ट को अब राजस्थान अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाल रहा है।
MSME के लिए गेमचेंजर—
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) और नए निवेशकों के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होगी। सस्ती जमीन और आसान भुगतान प्रक्रिया से न केवल प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। रीको फिलहाल इस पर होमवर्क कर रहा है और जल्द ही इसे नई नीति के रूप में लागू किया जा सकता है।




