JJM NEWS: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की तलाश तेज, 60 से ज्यादा गाड़ियां बदलकर ACB को दे रहे हैं चकमा

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राजस्थान के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में मुख्य आरोपी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की फरारी एंटी करप्शन ब्यूरो के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रवाल जिस शातिराना तरीके से अपने ठिकाने और वाहन बदल रहे हैं, उसने जांच एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है।

60 वाहन और 40 ऑटो रिक्शा का खेल—

एसीबी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फरार होने के बाद से अब तक सुबोध अग्रवाल ने अपनी पहचान छिपाने और पीछा छुड़ाने के लिए करीब 60 से अधिक गाड़ियां बदली हैं। गौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने इसमें 40 से ज्यादा बार ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल किया है। एसीबी के सूत्रों का कहना है कि अग्रवाल जानबूझकर बड़े वाहनों या लग्जरी कारों से बच रहे हैं ताकि टोल प्लाजा या हाईवे के सीसीटीवी कैमरों में उनकी पहचान न हो सके। ऑटो रिक्शा का उपयोग भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से गायब होने के लिए किया जा रहा है।

लुकआउट नोटिस और कड़ी निगरानी—

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते सुबोध अग्रवाल के खिलाफ पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके कारण वे देश के किसी भी एयरपोर्ट से हवाई यात्रा नहीं कर सकते। वहीं, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर एसीबी की खुफिया टीमों की पैनी नजर है। इसी घेराबंदी के डर से अग्रवाल ने छोटे वाहनों और निजी संपर्कों के जरिए सड़क मार्ग से सफर करने की रणनीति अपनाई है।

सोहना के फार्म हाउस से हुए रफूचक्कर—

एसीबी को हाल ही में इनपुट मिला था कि सुबोध अग्रवाल हरियाणा के सोहना स्थित एक बड़े उद्योगपति के फार्म हाउस पर छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही जब तक टीमें वहां पहुंचतीं, अग्रवाल को भनक लग गई और वे वहां से एक ऑटो रिक्शा में सवार होकर फरार हो गए। तब से उनका कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा है।

एसीबी की 6 टीमें दिल्ली और मुंबई में सक्रिय—

वर्तमान में एसीबी की छह विशेष टीमें सुबोध अग्रवाल की तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि वे दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों में किसी गुमनाम ठिकाने पर शरण लिए हुए हैं। अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत निविदाओं और कार्यादेशों में पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया है।

भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें—

जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन इस घोटाले ने पूरी योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में कई अन्य अधिकारी और ठेकेदार भी रडार पर हैं। एसीबी अब अग्रवाल के उन मददगारों की भी सूची तैयार कर रही है, जो उन्हें फरारी के दौरान वाहन और ठिकाने उपलब्ध करवा रहे हैं।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि घेराबंदी कड़ी कर दी गई है और जल्द ही आरोपी पूर्व आईएएस कानून की गिरफ्त में होंगे।

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