जयपुर के प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर (JECC) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पत्थर उद्योग प्रदर्शनी ‘इंडिया स्टोन मार्ट-2026’ का समापन समारोह उपलब्धियों भरा रहा। राजस्थान की समृद्ध खनिज संपदा को प्रदर्शित करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राजस्थान खान एवं भूविज्ञान विभाग और राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMM) को ‘सरकारी पेवेलियन श्रेणी’ में सर्वश्रेष्ठ चुना गया।
राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष ने किया सम्मानित—
समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और विशिष्ट अतिथि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने खान एवं भूविज्ञान विभाग और RSMM के प्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान की खनिज संपदा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है और इस तरह के प्रदर्शन नवाचारों को बढ़ावा देते हैं।
प्रभावी प्रदर्शन और खनिज संपदा का चित्रण—
प्रमुख शासन सचिव (माइंस एवं पेट्रोलियम) टी. रविकांत के कुशल निर्देशन में तैयार किए गए इस पेवेलियन में राजस्थान के प्रमुख और गौण खनिजों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। विभाग की ओर से नोडल अधिकारी संजय सक्सेना, RSMM के वरिष्ठ प्रबंधक असीम अग्रवाल और पीआरओ राजेंद्र शर्मा ने मंच पर यह सम्मान प्राप्त किया।
पेवेलियन की मुख्य विशेषताएं—
विभागीय पेवेलियन इस बार आगंतुकों और निवेशकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। पेवेलियन में न केवल राजस्थान के प्रसिद्ध मार्बल, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन को प्रदर्शित किया गया, बल्कि राज्य में उपलब्ध अन्य महत्वपूर्ण खनिज संपदा की जानकारी भी डिजिटल और भौतिक माध्यमों से दी गई। प्रदर्शनी के दौरान विशेषज्ञों ने आगंतुकों को राजस्थान की खनिज नीतियों, निवेश की संभावनाओं और खनन क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया।
खनिज क्षेत्र में खुशी की लहर—
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की घोषणा के साथ ही राजस्थान के खनिज सेक्टर और विभागीय कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अधिकारियों का मानना है कि इस पुरस्कार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के पत्थरों और खनिजों की ब्रांडिंग मजबूत होगी। ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ जैसे मंच पर विभाग का यह प्रदर्शन राज्य में भविष्य के औद्योगिक निवेश के लिए नए द्वार खोलने में सहायक सिद्ध होगा। प्रदर्शनी में देश-विदेश के पत्थर उद्यमियों ने हिस्सा लिया, जहां राजस्थान के माइंस विभाग ने अपनी तकनीकी क्षमता और विपुल भंडार का लोहा मनवाया।




