राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण अब टोल अनुरक्षण अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन कर सरकार को राजस्व हानि पहुंचाने की घटनाओं पर जीरो टोलेरेंस की नीति अपना रहा है। ऐसे ही एक प्रकरण में प्राधिकरण ने नियमित फॉलोअप कर कोर्ट से जमानती वारंट जारी करवाएं हैं। मेसर्स अंकिता एनवायरा केयर एंड सिक्योरिकोर, बड़ोदरा (गुजरात) के निदेशक, बिन्दु विनोद लाम्बा के विरुद्ध विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई कोर्ट संख्या 6, जयपुर मेट्रो प्रथम) ने दो मामलों में गत 13 जनवरी को जमानती वारंट जारी किए हैं। इस फर्म ने रू. 18.30 करोड़ और रू. 7.98 करोड़ की मय शास्ति बकाया राशि का भुगतान नहीं किया, इसके बाद चैक लगाया गया था और वह बाउंस हो गया।
उल्लेखनीय है कि एजेंसी को वर्ष 2024-25 हेतु रू. 12.27 करोड़ और रू. 5.11 करोड़ के अनुबंध के अंतर्गत टोल प्लाज़ा अनुरक्षण कार्य सौंपा गया था, जिसके अंतर्गत उन्हें साप्ताहिक आधार पर टोल संग्रहण की राशि राज्य सरकार को नियमित रूप से जमा करवानी थी। लेकिन फर्म ने नियमानुसार भुगतान नहीं किया व रू. 18.30 करोड़ और रू. 7.98 करोड़ की राशि बकाया रही। इसके अतिरिक्त एजेंसी द्वारा प्रस्तुत चेक बैंक शाखा ने अपर्याप्त धनराशि के कारण गत 2 जून को बाउंस कर दिया। प्राधिकरण द्वारा वसूली के लिए प्रभावी विधिक कार्यवाही की गई, जिसके परिणामस्वरूप दो मामलों (प्रकरण संख्या 41844/25 एवं 41833/25) में धारा 138, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के अंतर्गत एसएचओ सदर थाना, जयपुर को जमानती वारंट जारी किए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोपरि है और भविष्य में ऐसे सभी मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रकरण में अतिरिक्त मुख्य सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग प्रवीण गुप्ता के निर्देशन में आवश्यक विधिक कार्यवाही संपादित की गई है। जिसमें लोक अभियोजक, दिवाकर रावल की प्रभावी पैरवी व आर.एस.एच.ए. के अधिकारी अक्षय कुमार जैन, सदस्य (रियायत एवं पीपीपी), आरिफ मोहम्मद खान, सदस्य (तकनीकी), अविनाश साहू (प्रभारी अधिकारी), विनोद कुमार जांगिड़ (कानूनी सलाहकार) और श्री सी. एस. कटारा (अति. महाप्रबन्धक, विधि) के विशेष प्रयासों से यह न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित हुई।




