राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उद्योगों को जमीन आवंटन के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी ‘सियासी जंग’ देखने को मिली। उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विपक्ष द्वारा लगाए गए सस्ती जमीन आवंटन के आरोपों का न केवल खंडन किया, बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए आवंटनों का कच्चा चिट्ठा सदन के पटल पर रखकर पलटवार किया।
आंकड़ों की बाजीगरी—
खेल, युवा मामले एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 20 हेक्टेयर अविकसित भूमि 550 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर आवंटित की है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जो लोग इस दर पर सवाल उठा रहे हैं, उनके अपने कार्यकाल में जमीनें ‘कौड़ियों के दाम’ बांटी गईं।
उन्होंने सदन में तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया—
वंडर सीमेंट: पूर्ववर्ती सरकार ने 400 हेक्टेयर जमीन मात्र 28 रुपये प्रति वर्गमीटर में दे दी।
जेके सीमेंट: 210 हेक्टेयर का विशाल भूखंड सिर्फ 37 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर दिया गया।
श्री एस मिनरल: 48 हेक्टेयर जमीन महज 20 रुपये प्रति वर्गमीटर की मामूली दर पर आवंटित की गई।
गीतांजली स्टील: नीमकाथाना में 205 हेक्टेयर भूमि का आवंटन केवल 90 रुपये प्रति वर्गमीटर में किया गया।
सदन में हंगामा और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना—
इन आंकड़ों के सामने आते ही सदन में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने इन आवंटनों के पीछे के तर्कों को रखने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री राठौड़ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप लगाने से पहले विपक्ष को अपने रिकॉर्ड देख लेने चाहिए। राठौड़ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय नीतिगत पारदर्शिता के बजाय चहेते समूहों को उपकृत करने का काम अधिक हुआ।
लक्ष्य: विकसित राजस्थान—
करीब आधे घंटे तक चली इस नोकझोंक के बाद मंत्री राठौड़ ने अपने संबोधन का अंत सकारात्मक लहजे में किया। उन्होंने कहा, “जमीन किसी भी सरकार ने दी हो, अंतिम लक्ष्य राजस्थान का औद्योगिक विकास और युवाओं को रोजगार मिलना होना चाहिए।” उन्होंने आह्वान किया कि राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा।




