
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन के संकल्प को साकार करने की दिशा में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने एक बड़ा कदम उठाया है। पारदर्शिता और तकनीक को बढ़ावा देते हुए जेडीए ने अब आरक्षण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया को ‘एंड-टू-एंड’ ऑनलाइन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
डिजिटल होगा आवेदन से निर्गमन तक का सफर—
जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन के निर्देशन में विकसित की जा रही इस नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने के बाद, फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक नहीं घूमेंगी। इस व्यवस्था के तहत दस्तावेजों को अपलोड करने, उनका ऑनलाइन परीक्षण, उच्चाधिकारियों द्वारा अनुमोदन और अंत में डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रमाण पत्र जारी करने तक की पूरी कार्यवाही एक ही पोर्टल पर संपन्न होगी।
आमजन को मिलेगा कार्यालय के चक्करों से छुटकारा—
अब तक आवेदकों को अपने आरक्षण पत्र की स्थिति जानने या दस्तावेजों की कमी दूर करने के लिए बार-बार जेडीए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन इस नई व्यवस्था के माध्यम से:
रियल-टाइम ट्रैकिंग: आवेदक घर बैठे अपने प्रकरण की अद्यतन स्थिति देख सकेंगे। ऑनलाइन ऑब्जेक्शन: यदि आवेदन में कोई कमी है, तो संबंधित टिप्पणी पोर्टल पर ही उपलब्ध होगी, जिसे नागरिक ऑनलाइन ही ठीक कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम होगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। फाइलों के भौतिक संचालन में होने वाली देरी अब बीते दिनों की बात होगी।
जेडीए की यह पहल न केवल शहरी विकास की प्रक्रिया को गति देगी, बल्कि डिजिटल राजस्थान के सपने को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले दिनों में जेडीए की अन्य सेवाओं को भी इसी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की योजना है, जिससे गुलाबी नगरी के निवासियों का जीवन और अधिक सुगम हो सकेगा।