मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 17 जोड़े बने हमसफर

0
57

राजधानी के रामगढ़ मोड़ स्थित करबला मैदान में आज ‘मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत संस्था’ के तत्वाधान में एक भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सामाजिक सरोकार और फिजूलखर्ची को रोकने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए 17 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह से ही हर्षोल्लास के साथ हुई। निकाह की रस्में पूरी गरिमा और सादगी के साथ अदा की गईं। करबला मैदान में बने विशाल पाण्डाल में हजारों की संख्या में समाज के लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। निकाह के बाद उलेमाओं ने नवविवाहित जोड़ों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया और समाज में सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने की अपील की।

मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत संस्था की ओर से सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सभी 17 जोड़ों को गृहस्थी का आवश्यक सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि जोड़ों को वे सभी वस्तुएं दी गई हैं, जो एक नए घर को बसाने के लिए जरूरी होती हैं। इसका उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ को कम करना है।

समता आन्दोलन समिति के ओबीसी (OBC) प्रकोष्ठ के प्रान्तीय महासचिव कमरूदृीन ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस सम्मेलन में केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राजस्थान राज्य से परिवार अपने बच्चों के विवाह के लिए पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह आज के समय की मांग है, जिससे न केवल आर्थिक बचत होती है, बल्कि समाज में एकजुटता और भाईचारा भी बढ़ता है।
जनाब कमरूदृीन ने बताया कि सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के युवाओं ने बढ़-चढ़कर स्वयंसेवक के रूप में भूमिका निभाई। कार्यक्रम में कई गणमान्य नागरिक, समाज सुधारक और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना की। उपस्थित वक्ताओं ने जोर दिया कि ऐसे आयोजनों से समाज के गरीब तबके को संबल मिलता है और शादियों में होने वाले भारी खर्च पर लगाम लगती है। मुस्लिम तेली घाणी महापंचायत संस्था के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने इस अवसर पर समाज को शिक्षित और संगठित करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन निरंतर जारी रहेगा ताकि समाज का हर व्यक्ति सम्मान के साथ अपने बच्चों का विवाह संपन्न करा सके।
शाम को विदाई के वक्त माहौल भावुक हो गया। सभी 17 जोड़ों को समाज के बुजुर्गों और उपस्थित जनसमूह ने दुआओं के साथ विदा किया। यह आयोजन जयपुर में मुस्लिम समाज के लिए एकता और सामाजिक सुधार की एक मिसाल बनकर उभरा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here