राजस्थान की राजधानी में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं और गैस एजेंसियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। इंडियन ऑयल के हजारों उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। मामला रसोई गैस रिफिल के साथ सुरक्षा पाइप और अन्य एक्सेसरीज खरीदने के लिए दबाव बनाने का है, जिसे लेकर उपभोक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रिफिल चाहिए तो पाइप खरीदना होगा: एजेंसियों का नया फरमान—
उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब वे सिलेंडर बुक कराते हैं, तो डिलीवरी के समय उन्हें गैस पाइप या अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि कई गैस एजेंसियां नियमित आपूर्ति को जानबूझकर बाधित कर रही हैं। यदि कोई उपभोक्ता नया पाइप या अतिरिक्त सामग्री लेने से मना करता है, तो उसे रिफिल देने में हफ्तों का इंतजार कराया जाता है या डिलीवरी मैन द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है, “रसोई गैस एक आवश्यक वस्तु है। इसे किसी अन्य उत्पाद की बिक्री से जोड़ना न केवल अनैतिक है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन भी है।”
प्रशासनिक दखल की मांग: रसद विभाग को सौंपा ज्ञापन—
विवाद बढ़ता देख प्रतिनिधिमंडल ने जिला रसद अधिकारी प्रथम, प्रियवर्त सिंह चारण को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें निम्न हैं:
अनिवार्यता खत्म हो: रिफिल की आपूर्ति को बिना किसी शर्त के बहाल किया जाए।
सूचना पट्ट: प्रत्येक गैस एजेंसी के बाहर बड़े अक्षरों में यह बोर्ड लगाया जाए कि “रिफिल या नए कनेक्शन के साथ पाइप या अन्य सामान खरीदना अनिवार्य नहीं है।”
पारदर्शिता: उपभोक्ता की लिखित सहमति के बिना किसी भी अतिरिक्त वस्तु की बिलिंग न की जाए।
जांच दल का गठन: उन एजेंसियों को चिह्नित किया जाए जो स्टॉक होने के बावजूद आपूर्ति रोक रही हैं।
क्या कहते हैं नियम?-
तेल कंपनियों के नियमों के अनुसार, गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए सुरक्षा जांच जरूरी है, लेकिन उपभोक्ता पर यह दबाव नहीं बनाया जा सकता कि वह सुरक्षा पाइप या चूल्हा एजेंसी से ही खरीदे। यदि उपभोक्ता के पास पहले से BIS मानक का पाइप मौजूद है, तो एजेंसी उसे नया खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन—
उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जिला रसद विभाग ने अगले कुछ दिनों में इन “अनुचित व्यापार व्यवहार” पर रोक नहीं लगाई, तो वे उपभोक्ता न्यायालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के पोर्टल पर सामूहिक शिकायत दर्ज कराएंगे। इस मामले में अभी तक गैस एजेंसी संचालकों का पक्ष सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय निवासियों में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए जिला प्रशासन जल्द ही गाइडलाइंस जारी कर सकता है। यदि आप भी ऐसी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो PMEGP Portal या इंडियन ऑयल की आधिकारिक हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।




