राजस्थान की भजनलाल सरकार प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों (खाद) के साथ अन्य गैर-जरूरी उत्पाद ‘टैगिंग’ या जबरन जोड़कर बेचने वाले विक्रेताओं पर सरकार ने हंटर चला दिया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि अन्नदाता पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक भार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हजारों निरीक्षण और सैकड़ों लाइसेंस रद्द—
विधायक ललित मीणा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए डॉ. मीणा ने विभागीय कार्रवाई के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने खाद की कालाबाजारी और जबरन बिक्री रोकने के लिए 744 अधिसूचित उर्वरक निरीक्षकों की टीम को मैदान में उतारा है। इस टीम ने अब तक प्रदेश भर में 11,938 औचक निरीक्षण किए हैं। गुणवत्ता जांच के लिए उर्वरकों के 18,319 नमूने लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नियमों के उल्लंघन पर 765 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि 381 फर्मों की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। सबसे बड़ी कार्रवाई के तहत 169 विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त कर दिए गए हैं।
किसानों पर आर्थिक बोझ डालने की कोशिश नाकाम—
कृषि मंत्री ने स्वीकार किया कि अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि उर्वरक विक्रेता डीएपी या यूरिया के साथ ऐसे कीटनाशक या अन्य उत्पाद अटैच कर देते हैं जिनकी किसानों को जरूरत नहीं होती। इससे किसानों की लागत बढ़ जाती है। डॉ. मीणा ने कहा, “हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों के जबरन अटैचमेंट को रोका जाए। विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसी गतिविधि पाई गई, तो उनका व्यापार बंद कर दिया जाएगा।”
रेगुलेटरी टास्क फोर्स रखेगी नजर—
उर्वरकों की सुचारू उपलब्धता और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘फर्टिलाइजर रेगुलेटरी टास्क फोर्स’ का गठन किया है। यह टास्क फोर्स राज्य और जिला, दोनों स्तरों पर काम कर रही है। मंत्री ने बताया कि पीक सीजन के दौरान विभागीय अधिकारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई ताकि वे स्वयं विक्रेताओं के पास मौजूद रहकर खाद का वितरण करवा सकें।
अन्नदाता के हित सर्वोपरि—
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सदन में दोहराया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को उचित मूल्य पर और बिना किसी शर्त के खाद उपलब्ध कराना है। उन्होंने किसानों से भी अपील की है कि यदि कोई विक्रेता उन्हें खाद के साथ जबरन कोई अन्य सामान लेने के लिए मजबूर करता है, तो वे तुरंत कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर या जिला कृषि कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
इस बयान के बाद सदन में किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार की सक्रियता की चर्चा रही। सरकार की इस सख्ती से उन बिचौलियों और मुनाफाखोरों में हड़कंप है जो खाद की कमी का फायदा उठाकर किसानों का शोषण करते रहे हैं।




