Rajasthan News: केंद्रीय मंत्री की अधिकारियों को ‘धमकी’ भरा वीडियो वायरल, राजस्थान की सियासत में उबाल

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केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के एक कथित विवादित बयान ने राजस्थान के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र के लोहावट और बापिणी कस्बे में जनसुनवाई के दौरान शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे अधिकारियों को बेहद तल्ख लहजे में चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है और भाजपा सरकार को घेरा है।

क्या है पूरा मामला?—

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत लोहावट क्षेत्र के दौरे पर थे। बापिणी में आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान किसी मुद्दे पर चर्चा करते हुए शेखावत का पारा चढ़ गया। वायरल वीडियो में शेखावत अधिकारियों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं— “अगर किसी कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी से बिहेव करोगे, तो मैं उससे डबल बदतमीजी से बिहेव करूंगा। उसकी नौकरी और जिंदगी दोनों बर्बाद कर दूंगा।”

मंत्री की इस सख्त और आक्रामक टिप्पणी का वीडियो जैसे ही सार्वजनिक हुआ, यह जंगल की आग की तरह फैल गया। देखते ही देखते इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई।

कांग्रेस का तीखा पलटवार—

शेखावत के इस बयान पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़ी आपत्ति जताई है। डोटासरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर होकर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अब सरकारी कर्मचारियों को खुलेआम धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि “नौकरी और जिंदगी बर्बाद करने” जैसी भाषा एक केंद्रीय मंत्री को शोभा नहीं देती। यह अधिकारियों के मनोबल को गिराने वाला कृत्य है।

वहीं, जोधपुर की पूर्व शहर विधायक मनीषा पंवार ने भी इस बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है। अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से इस तरह डराना-धमकाना सरासर गलत है। पंवार ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता जनता के काम करने के बजाय अधिकारियों को डराकर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल—

इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी दबी जुबान में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अभी तक इस पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय समर्थकों का तर्क है कि मंत्री जी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और अधिकारियों की कथित मनमानी से नाराज थे।

राजस्थान की राजनीति में शेखावत का यह ‘तेवर’ नया नहीं है, लेकिन “जिंदगी बर्बाद करने” वाली टिप्पणी ने इसे एक गंभीर विवाद बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंज सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और ‘अहंकार’ के रूप में पेश कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि इस सियासी घमासान के बीच क्या गजेंद्र सिंह शेखावत अपने बयान पर कायम रहते हैं या कोई स्पष्टीकरण देते हैं।

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