C M NEWS: जैन दर्शन विश्व के लिए प्रकाश स्तंभ —मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित ‘जीटो टाउन रिप्रजेन्टेटिव नेशनल कॉन्क्लेव’ व ‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0’ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जैन दर्शन की वैश्विक महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रदेश के समग्र विकास में हर समाज की भागीदारी का आह्वान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन दर्शन की ‘ध्यान, तपस्या व आत्मचिंतन की परंपरा’ ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, करुणा और सत्य के जो मूल्य भगवान महावीर स्वामी ने दिए, वे भारतीय सभ्यता के आधार स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि जैन समुदाय का देश की अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिक चेतना में अतुलनीय योगदान है।

सुशासन के तीन सूत्र: पारदर्शिता, जनसेवा और नैतिकता—

श्री शर्मा ने उद्यमियों और समाज के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यों में पारदर्शिता, जनसेवा एवं नैतिकता को सर्वोपरि रखें। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति के लिए कर्तव्य बोध सबसे ऊपर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार सुशासन के संकल्प के साथ काम कर रही है, जहां हर निर्णय में नैतिकता और सेवा का भाव निहित है।”

प्रदेश के विकास के लिए सामूहिक साझेदारी—

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सभी समाजों की सक्रिय साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज डिजिटल गवर्नेंस और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस तरह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, उसमें राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

विश्व नवकार महामंत्र रथों की रवानगी—

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व नवकार महामंत्र दिवस 2.0 के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कलश रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने मंगलकामना की कि नवकार महामंत्र की दिव्य ऊर्जा पूरे विश्व में शांति और सद्भाव का संचार करेगी।

इस भव्य कॉन्क्लेव में जीटो के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विभिन्न चैप्टर्स के पदाधिकारी, महिला एवं युवा उद्यमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजकों ने इस दिन को आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया

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