Rajasthan News: आईआईटी रुड़की की चेतावनी: जयपुर-जोधपुर पर मंडराएगा जल संकट

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AI Photo

भारत के प्रमुख शहरों में भू-जल का गिरता स्तर एक बड़े जल संकट की आहट दे रहा है। आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं द्वारा 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 54 प्रमुख शहरों पर किए गए एक ताज़ा अध्ययन ने भविष्य की डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भू-जल दोहन और जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति जारी रही, तो साल 2050 तक करीब 55 करोड़ शहरी आबादी को पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।

23 शहरों में भारी गिरावट—

अध्ययन में पाया गया कि 1996 से 2023 के बीच 54 में से 23 शहरों में भू-जल स्तर में खतरनाक गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर और मध्य भारत के शहरों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहाँ जल स्तर -0.12 से -0.45 मीटर प्रति वर्ष की दर से नीचे जा रहा है। शोधकर्ताओं ने दिल्ली, जयपुर और जोधपुर को ‘बेहद जोखिमपूर्ण’ श्रेणी में रखा है।

विरोधाभासी दावे और जमीनी हकीकत—

एक ओर जहाँ आईआईटी का अध्ययन भविष्य के खतरे की ओर इशारा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने कुछ राहत भरी रिपोर्ट दी है। बोर्ड का दावा है कि पिछले साल हुई जोरदार बारिश के कारण जयपुर जैसे शहरों के भू-जल स्तर में मामूली सुधार हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी हो सकता है क्योंकि अनियंत्रित दोहन और कंक्रीट के बढ़ते जाल के कारण पुनर्भरण की प्रक्रिया बाधित हो रही है।

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि शहरीकरण की अंधी दौड़ और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने हमें विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को अनिवार्य नहीं बनाया गया, तो आधी सदी बीतने से पहले ही देश के बड़े महानगर ‘जीरो वॉटर डे’ की ओर बढ़ जाएंगे।

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