सवाई मानसिंह अस्पताल में एक के बाद एक कांड हो रहे है। कभी अग्निकांड तो कभी पानीकांड ऐसे में अस्पताल के प्रशासन की उदासीनता की पोल खुल गई है। वहीं विभाग के मंत्री सहित आला अधिकारी रस्म अदायगी करते नजर आते है और मरीजों की जान डेंजर जोन में रहती है।
आपको बता दें कि सोमवार को देर रात करीब 11 बजे आईसीयू में पानी भर गया था। स्थिति बिगड़ते ने पर परिजनों में दहशत फैल गई। घटना के दौरान आईसीयू में कुल 14 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 10 वेंटिलेटर पर थे। खतरे को देखते हुए आनन-फानन में मरीजों को बांगड़ परिसर, इमरजेंसी और ओटी में शिफ्ट किया गया।
हादसा होने पर प्रथमदृस्टया जांच में पाया गया कि पानी सप्लाई का पाइप पुराना और जंग लगा हुआ था वहीं लंबे समय से पाइप में लीकेज हो रहा था और पुराने कॉटेज वार्ड के टॉयलेट पाइप को बिना किसी कारण के कर दिया गया था। जिससे पानी के प्रेशर ने जंग लगे कमजोर पाइप को अपना शिकार बना लिया। दूसरी और अस्पताल प्रशासन हर साल मेंटीनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च कर रहा था।
जांच के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही सामने आई है। विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग का दावा किया जाता रहा है। जो इस तरह की व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आ रही हैं।
घटना का जायजा लेने के लिये चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ पॉली ट्रॉमा आईसीयू पहुंची। उन्होने वहीं अपने पुराने अंदाज में सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर दोषी अधिकारी और एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिम्मेदार अधिकारी भी इस घटना पर यह कहते और बचते नजर आये कि घटना अचानक हुई व मरीजों कोई नुकसान नहीं हुआ। भविष्य में अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।




