C M NEWS: सिख धर्म का इतिहास त्याग और बलिदान की गाथा से भरा हुआ —मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को राजापार्क स्थित श्री गुरू सिंह सभा गुरूद्वारा पहुंचे। उन्होंने गुरूद्वारा में मत्था टेका और देश व प्रदेश में शांति और सद्भाव के लिए अरदास की। श्री शर्मा ने इस दौरान गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों और माता गुजरी कौर की शहादत को समर्पित विशेष गुरमत समागम में संगत की। श्री शर्मा ने कहा कि हमारे देश के इतिहास में जब भी धर्म और संस्कृति की रक्षा की बात आती है, गुरु गोबिंद सिंह जी, माता गुजरी और उनके चारों साहिबजादों का नाम गर्व से लिया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने चारों साहिबजादों को देश और धर्म के लिए समर्पित कर दिया। ऐसा त्याग दुनिया में कहीं नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह ने आज ही के दिन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गुरु गोबिंद सिंह और उनके साहिबजादों की बहादुरी की गाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करेगी जिससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास हेतु भूमि आवंटन को भी मंजूरी दे दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख धर्म का पूरा इतिहास त्याग और बलिदान की गाथा से भरा हुआ है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने हमारी संस्कृति की रक्षा के लिए अपना पूरा वंश न्योछावर कर दिया, इसीलिए वे ‘सरबंसदानी’ कहलाए। उन्होंने कहा कि जब गुरु साहिब जी के चारों साहिबजादे शहीद हो गए, तब उन्होंने कहा था-‘चार मुए तो क्या हुआ, जीवित कई हजार’ यानी चार बेटे बलिदान हो गए तो क्या हुआ, कई हजार बेटे धर्मरक्षा के लिए अभी भी जीवित हैं। उनकी यह उक्ति राष्ट्र और धर्म के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणा बन गई है। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को श्री गुरु गोबिंद सिंह और साहिबजादों की तस्वीर भेंट की।

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