High Court News: राजस्थान आवासन मंडल की भूमि पर बसी 87 अवैध कॉलोनियां नहीं होगी नियमित —हाईकोर्ट

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सावधान यदि आप जयपुर सहित किसी भी शहर में अपना घर बनाने के लिये प्लॉट लेने की सोच रहे हैं तो भूमाफियाओं के चुंगल से आपको बचना होगा। ये भूमाफिया लोगों को फंसा कर सरकारी भूमि पर अधिकारियों से मिलीभगत कर अवैध कॉलोनियों का सर्जन कर देते हैं।
वैसे जयपुर जैसे शहर में ये आम बात है। लेकिन इस तरह का मामला सांगानेर क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां राजस्थान आवासन मंडल की भूमि पर भूमाफियाओं ने अधिकारियों से मिलकर 87 अवैध कॉलोनियां बसा दी। मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। सरकार 87 अवैध कॉलोनियों को नियमित करना चाहती है। लेकिन 20 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को कैसे नियमित किया जा सकता है और कोर्ट ने अवैध निर्माण को नियमित करने के राज्य सरकार के प्रयासों पर रोक लगा दी, वहीं सभी अवैध निर्माण हटाकर आठ सप्ताह में रिपोर्ट तलब की। कोर्ट ने दोषी अधिकरियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी निर्देश दिये।
वहीं हाईकोर्ट में पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि इन अवैध कालोनियों में कई रसूखदारों के प्लाॅट हैं। उनके दबाव में राज्य सरकार इन्हे नियतित करना चाहती है।
मामले को लेकर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की लेकिन सुप्रीम कोर्ट नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर दखल करने से मना कर दिया और कहा कि वे अपना पक्ष हाईकोर्ट में ही रखे। वहीं सुप्रीम कोर्ट का ये रूख देखते हुए राजस्थान सरकार ने अपील वापस लेने की इच्छा जताई है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट तौर पर कहा कि इस मामले में जो भी कहना है, हाईकोर्ट में कहें सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश पर दखल नहीं करेगा।
आपको बतादें कि पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि राजस्थान सरकार ने 12 मार्च 2025 को सांगानेर की उन कॉलोनियो को नियमित करने का आदेश जारी किया, जो आवासन मंडल के लिए अवाप्त जमीन पर अवैध रूप से बसाई गई है। याचिका के अनुसार ये 87 कालोनियां बी-2 बाईपास से सांगानेर के बीच के क्षेत्र में बसी हैं। इस भूमि के लिए आवासन मंडल की ओर से काश्तकारों को भुगतान किया जा चुका। लेकिन अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर यहां कब्जे करवा दिए और अब नियमन करवाया जा रहा है।

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