जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को होटल क्लार्क्स आमेर और जवाहर लाल नेहरू (JLN) मार्ग पर जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन के ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों और आयोजकों की ‘विश्व स्तरीय’ व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
प्रशासन की लाचारी: एम्बुलेंस फंसी, जनता त्रस्त —
शहर के मुख्य मार्ग JLN मार्ग पर फेस्टिवल, आर्मी डे परेड और वीवीआईपी मूवमेंट के चलते घंटों लंबा जाम लगा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ने भी सोशल मीडिया पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि जयपुर की जनता ‘ट्रैफिक के नरक’ में फंसी है। सबसे शर्मनाक स्थिति तब रही जब गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस अस्पताल के पास ही घंटों जाम में रेंगती नजर आईं। प्रशासन का ‘ट्रैफिक प्लान’ केवल वीवीआईपी गाड़ियों को रास्ता देने तक सीमित रहा।
आयोजकों का ‘मुनाफा तंत्र’ और आम पाठकों की अनदेखी —
आयोजकों पर आरोप है कि उन्होंने क्षमता से अधिक रजिस्ट्रेशन और पास जारी कर दिए, जिसके कारण होटल परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। सुरक्षाकर्मियों ने ‘भीड़ नियंत्रण’ के नाम पर कई बार गेट बंद किए, जिससे दूर-दराज से आए साहित्य प्रेमी और वैध पास धारक भी बाहर चिलचिलाती धूप में घंटों परेशान होते रहे। आयोजन अब किताबों का उत्सव कम और ‘कॉर्पोरेट इवेंट’ ज्यादा नजर आ रहा है।
सुविधा के नाम पर ‘सन्नाटा’ —
भीड़ का आलम यह था कि मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गए, जिससे डिजिटल पेमेंट से लेकर अपनों से संपर्क करना तक मुहाल हो गया। फूड स्टॉल्स पर खाने-पीने की चीजों के दाम ‘आसमान’ छू रहे थे, जिसे लेकर दर्शकों ने आयोजकों के खिलाफ भारी नाराजगी जताई। लेखकों और वक्ताओं के सत्रों में बैठने की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कई बुजुर्ग पाठक जमीन पर बैठकर या खड़े होकर सत्र सुनने को मजबूर हुए।
‘सेल्फी कल्चर’ को बढ़ावा, साहित्य हाशिए पर —
गंभीर साहित्य चर्चा के बीच आयोजकों ने जिस तरह से ‘ग्लैमर’ और ‘सेल्फी पॉइंट्स’ को तरजीह दी है, उसने पुराने साहित्यानुरागियों को निराश किया है। मुख्य मंचों पर तकनीकी खराबी और साउंड सिस्टम की विफलता ने वक्ताओं के उत्साह पर पानी फेर दिया।
कुल मिलाकर, JLF 2026 का तीसरा दिन आयोजकों की ‘भीड़ बटोरने’ की भूख और प्रशासन की ‘मूकदर्शक’ भूमिका की भेंट चढ़ गया।




