समाचार माध्यमों की खबरों के अनुसार जयपुर के सरकारी अस्पतालों में 30% दवाइयां आउट ऑफ स्टॉक है। इससे सरकार की मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के प्रति आमजन का भरोसा टूटने लगा है।
आपको बतादें कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को मुफ्त में दवा का वितरण किया जाता है। लेकिन अधिकांश मरीजों को पूरी दवा एक ही काउंटर से नहीं मिल पाती है और दवाओं की अनुपलब्ध बता दिया जाता है।
वहीं सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवा योजना में प्रावधान के अनुसर दवा अनुपलब्ध होने पर अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह लोकल परचेज से मरीज को दवा उपलब्ध करवाए। लेकिन मरीजों को इसकी जानकारी नहीं दी जाती और न ही इसके काउंटर की कोई उचित व्यवस्था है। जानकारी में आया है कि जयपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में 25 से 35 प्रतिशत आवश्यक दवाइयां अस्थायी रूप से आउट ऑफ स्टॉक रहती हैं। स्टॉक खत्म होने की स्थिति में अस्पताल प्रशासन लोकल परचेज से दवा उपलब्ध कराने की बात कहता है। लेकिन इसकी प्रक्रिया धीमी और जटिल होने के कारण मरीज को तत्काल राहत नहीं मिलती।




