Jaipur News: शौर्य और शहादत को सलाम : स्मृति, सम्मान और संकल्प का भावपूर्ण आयोजन

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कलमकार मंच के तत्वावधान में आज राजस्थान चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के सभागार में सुप्रसिद्ध चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता की बहुप्रतीक्षित पुस्तक “शौर्य और शहादत को सलाम” का गरिमामय लोकार्पण किया गया। यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि देश के अमर शहीदों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सामूहिक स्मृति का भावपूर्ण उत्सव बन गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि शहीदों के चित्र बनाकर उन्हें उनके परिजनों को भेंट करना चंद्रप्रकाश गुप्ता का अत्यंत स्तुत्य, संवेदनशील और अनुकरणीय कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के समय में, जब हम आज़ाद, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे महान क्रांतिकारियों की स्मृतियों को धीरे-धीरे भुलाते जा रहे हैं, ऐसे निष्ठुर और उपभोक्तावादी माहौल में चंद्रप्रकाश गुप्ता का यह रचनात्मक कर्म अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
श्री सिंह ने कहा कि बिना किसी लोभ-लालच के, निस्वार्थ भाव से एक अकेला कलाकार पिछले कई दशकों से इस “महायज्ञ” में निरंतर आहुति दे रहा है—यह अपने आप में हमारे सामाजिक और नैतिक जीवन की एक बड़ी उपलब्धि है। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों के प्रति यह संवेदना हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विपिन कुमार पांडे ने कहा कि आज शहीदों के परिजनों को आर्थिक सहायता से अधिक सम्मान और संवेदनशील स्मरण की आवश्यकता है और चंद्रप्रकाश गुप्ता पिछले 27 वर्षों से इसी भाव के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस यात्रा के साक्षी रहे हैं और उन्हें भी कई अवसरों पर चंद्रप्रकाश गुप्ता द्वारा बनाए गए शहीदों के चित्र उनके परिजनों को भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
उन्होंने चित्रकार के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चंद्रप्रकाश गुप्ता अत्यंत विनम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं और जो भी कार्य करते हैं, पूरे मन और लगन से करते हैं। उनके द्वारा बनाए गए महात्मा गांधी के स्केच देश-विदेश में अत्यंत लोकप्रिय हैं। पांडेय ने यह भी स्वीकार किया कि कला के प्रति उनके भीतर जो भी जागरूकता और रुचि विकसित हुई है, उसका श्रेय वे चंद्रप्रकाश गुप्ता को ही देते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस पुस्तक में प्रस्तुत व्यक्ति-चित्र और उनके साथ दिया गया विवरण केवल एक कलाकार की कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह उनके हृदय में उठे श्रद्धा भाव, सैनिकों के साहस के प्रति विनम्र नमन और जीवन-स्मरण के स्थायी चिह्न हैं।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि यह पुस्तक उन परिवारों के प्रति भी एक मौन प्रणाम है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को राष्ट्र के चरणों में समर्पित किया।
उन्होंने कहा—“शहादत केवल सीमा पर नहीं होती; वह हर उस घर में रोज़ घटित होती है, जहाँ एक ख़ाली कुर्सी रह जाती है—जो एक अधूरे सपने और गर्व से भरे आँसू की साक्षी बन जाती है।” उनके अनुसार, यह पुस्तक स्मृति, सम्मान और संकल्प का ऐसा संगम है, जो हमें यह याद दिलाता है कि हमने स्वतंत्रता में साँस लेना किन बलिदानों की कीमत पर पाया है।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि चंद्रप्रकाश गुप्ता की कला-यात्रा सन् 1999 के कारगिल युद्ध के बाद एक ऐसे भावनात्मक संकल्प में प्रवेश करती है, जिसकी मिसाल न केवल देश में बल्कि शायद पूरे विश्व में भी दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि यह कल्पना करना भी विस्मयकारी है कि कोई कलाकार शहीदों को श्रद्धांजलि देने को अपने पूरे जीवन का उद्देश्य बना ले।
उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में चंद्रप्रकाश गुप्ता के अनेक भावभीने संस्मरण संकलित हैं—वे क्षण, जब उन्होंने शहीद परिवारों को चित्र भेंट करते समय भीतर तक संवेदना को महसूस किया। पुस्तक में मन को भिगो देने वाले अनेक प्रसंगों के साथ-साथ उन लोगों का भी उल्लेख है, जिन्होंने उनके इस राष्ट्रीय अभियान को सहयोग देकर इसे सार्थक बनाया।
कार्यक्रम में क़लमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने सभी अतिथियों का पुस्तक-सेट भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित शहीदों के परिजनों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया, जिससे वातावरण और भी भावुक व गरिमामय हो उठा। कार्यक्रम का सुस्पष्ट और संवेदनशील संचालन नवल पाण्डेय द्वारा किया गया।
कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल एक साहित्यिक-कला कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के अमर शहीदों के प्रति सामूहिक कृतज्ञता, स्मरण और सम्मान का जीवंत दस्तावेज़ बन गया—जिसमें कला, संवेदना और राष्ट्रभाव एक साथ उपस्थित थे।

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