प्रराजस्थान की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत के संरक्षण की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक युगांतकारी पहल की है। रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेशभर से आए पर्यावरण प्रेमी संतों और बिश्नोई समाज के प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने की घोषणा पर उनका आत्मीय अभिनंदन किया।
70 वर्षों का इंतजार खत्म: संतों ने सराहा निर्णय—
मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश में पिछले 70 वर्षों से इस तरह के ठोस कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा खेजड़ी (राजस्थान का राज्य वृक्ष) की रक्षा के लिए की गई यह पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि पूरे समाज में हर्ष की लहर पैदा करने वाली है। संतों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया।
कथनी और करनी में समानता: महन्त स्वामी सच्चिदानंद—
महन्त स्वामी सच्चिदानंद जी ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया कि 27 अगस्त 2024 को मुख्यमंत्री ने पर्यावरण प्रेमियों के साथ संवाद कर खेजड़ी संरक्षण पर सुझाव मांगे थे। उस समय मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया था, उसे 5 फरवरी को विधानसभा में आधिकारिक घोषणा के रूप में पूरा कर अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। संतों की मंशा का सम्मान करते हुए कानून बनाने की इस घोषणा ने सरकार के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है।
सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री का संबोधन—
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पर्यावरण और विशेषकर खेजड़ी के वृक्षों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमने संतों और प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से लिया है। विधानसभा में की गई घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है और संतों की भावना के अनुरूप ही कानून की प्रक्रिया पर तेजी से काम चल रहा है।” मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि खेजड़ी की कटाई को रोकने और इसके संवर्धन के लिए शीघ्र ही एक प्रभावी कानून धरातल पर लाया जाएगा।
खेजड़ी: राजस्थान का जीवन आधार—
गौरतलब है कि खेजड़ी राजस्थान की अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी का मुख्य स्तंभ है। बिश्नोई समाज ने सदियों से इसके संरक्षण के लिए बलिदान दिए हैं। नया कानून बनने से इस वृक्ष को कानूनी कवच प्राप्त होगा, जिससे अवैध कटाई पर रोक लगेगी और मरुस्थलीकरण को रोकने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के प्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।




