Housing Board meeting: क्या ‘महा-स्कैम’ के दाग धो पाएंगी रश्मि शर्मा की कागजी हिदायतें?

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राजस्थान आवासन मण्डल में मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक को अगर ‘औपचारिकता का शिखर’ कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट मण्डल की जमीनों पर हुए कब्जों को ऊपर से नीचे तक की मिलीभगत वाला ‘एब्सोल्यूट रैंक स्कैम’ करार दे चुका है, वहीं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा अधिकारियों को ‘स्वच्छता’ और ‘फाइल मेंटेनेंस’ का पाठ पढ़ा रही हैं।

धरातल पर कब्जा, कागजों में योजना—

आयुक्त ने जयपुर, झालावाड़, कोटपूतली और जोधपुर में नई योजनाओं को ‘अविलंब’ लाने का फरमान सुनाया है। लेकिन हकीकत यह है कि मण्डल की 86 अवैध कॉलोनियों पर राजस्थान हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद भी सिस्टम टस से मस नहीं हुआ है। जब मण्डल अपनी मौजूदा जमीनों को भू-माफियाओं से नहीं बचा पा रहा, तो नई योजनाओं में नागरिकों को ‘सुरक्षित परिवेश’ देने का वादा किसी जोक से कम नहीं लगता।

डिजिटलाइजेशन या सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश—

बैठक में ‘डिजिटल सेवाओं’ और ‘ऑनलाइन बुकिंग’ पर बहुत जोर दिया गया। विडंबना देखिए, जिस विभाग के खिलाफ घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं, वह अब तकनीक के पीछे छिपने की कोशिश कर रहा है। क्या ऑनलाइन बुकिंग से उन मकानों की दीवारें मजबूत हो जाएंगी जिनमें साल भर के भीतर ही सीलन और प्लास्टर गिरने की खबरें आती रहती हैं?

अधिकारियों की फौज और रस्म-अदायगी—

बैठक में सचिव गोपाल सिंह और मुख्य अभियंता टीएस मीणा जैसे अधिकारियों की मौजूदगी केवल ‘यस मैम’ तक सीमित रही। जब तक मण्डल के भीतर बैठे उन ‘प्रभावशाली लोगों’ पर कार्रवाई नहीं होती जो अवैध कब्जों को संरक्षण देते हैं, तब तक ऐसी समीक्षा बैठकें केवल सरकारी बजट और चाय-नाश्ते की बर्बादी हैं।

जनता को घर चाहिए, प्रवचन नहीं—

प्रदेश का नागरिक अब इन लुभावने वादों और ‘आधुनिक मानकों’ वाली खोखली शब्दावली से ऊब चुका है। राजस्थान आवासन मण्डल को ‘सफाई’ दफ्तर के कोनों में नहीं, बल्कि अपनी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के दलदल में करने की जरूरत है। वरना, ये नवीन योजनाएं भी पुरानी फाइलों की तरह धूल ही फांकेंगी।

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