शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्र वर्ष 2026 में 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस वर्ष का नवरात्र ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगभग 89-90 वर्षों बाद बन रहे एक दुर्लभ और अद्भुत संयोग के साथ आ रहा है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस बार नवरात्र के पहले ही दिन एक विशेष ‘त्रिवेणी संयोग’ बन रहा है। 19 मार्च को चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या का समापन, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ और इसी दिन गौतम जयंती का होना इस पर्व की महत्ता को कई गुना बढ़ा रहा है। इस तरह का ग्रहों का मिलन पिछले नौ दशकों में नहीं देखा गया है, जो आध्यात्मिक साधकों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त—
नवरात्र के पहले दिन, यानी 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:52 AM से 07:43 AM तक।
अभिजीत मुहूर्त: यदि सुबह स्थापना संभव न हो, तो दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM के बीच कलश स्थापना की जा सकती है।
विशेष ज्योतिषीय महत्व (विक्रम संवत 2083)—
यह नवरात्र न केवल देवी उपासना का पर्व है, बल्कि 19 मार्च से ही हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का भी शुभारंभ हो रहा है। इस बार नवरात्र खरमास के दौरान पड़ रहे हैं (जो 15 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा), इसलिए पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय श्रेष्ठ है, लेकिन विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।
यह महापर्व भक्तों के लिए आत्मशुद्धि और शक्ति संचय का अवसर लेकर आया है। काशी से लेकर कन्याकुमारी तक मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।




