CM NEWS: राजस्थान दिवस पर अल्बर्ट हॉल पर सांस्कृतिक महाकुंभ

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर का ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल गुरुवार को उस समय जीवंत हो उठा जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में ‘राजस्थान दिवस’ के अवसर पर राज्य स्तरीय सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया। भक्ति, शक्ति और संस्कृति के संगम वाली इस शाम ने न केवल राजस्थान की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया, बल्कि आधुनिक राजस्थान के विकास संकल्पों को भी नई ऊर्जा दी।

मुख्यमंत्री की पहल पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का उत्सव—

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर इस वर्ष राजस्थान दिवस को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (भारतीय नववर्ष) के पावन अवसर पर मनाया गया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को राजस्थान दिवस और नव संवत्सर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्थान की संस्कृति ‘अतिथि देवो भव:’ और वीरता की परिचायक है। उन्होंने लोक कलाकारों को प्रदेश की असली पहचान बताया।

पद्मश्री कलाकारों की सुरीली प्रस्तुतियां—

सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। पद्मश्री श्री अनवर खां मांगणियार एवं उनके दल ने मरुधरा की माटी की खुशबू बिखेरते हुए सुरीले लोक गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, पद्मश्री तगाराम भील व दल ने अपनी अनूठी शैली में लोक गायन की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से राजस्थान की लोक संस्कृति को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया है।

100 से अधिक कलाकारों का संगम—

कार्यक्रम में 100 से अधिक लोक कलाकारों और कथक नृत्यांगनाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अल्बर्ट हॉल के सामने बने भव्य मंच पर राजस्थान के विविध रंगों को उकेरा गया। इसमें घूमर, गैर, चरी, कच्छी घोड़ी और कालबेलिया जैसे प्रसिद्ध लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी गई। चरी नृत्य के दौरान सिर पर जलते दीपों और कालबेलिया नर्तकियों की चपलता ने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। कथक नृत्यांगनाओं के पदचाप और शास्त्रीय भंगिमाओं ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

उपलब्धियों की झलक: लघु फिल्म का प्रदर्शन—

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच राज्य सरकार के दो वर्ष से अधिक के जनसेवा को समर्पित कार्यकाल पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस फिल्म के माध्यम से सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और सुशासन की दिशा में उठाए गए कदमों को प्रदर्शित किया गया। फिल्म ने बताया कि कैसे राज्य सरकार अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के लिए कार्यरत है।

जनसमूह का उत्साह—

इस राज्य स्तरीय समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, पर्यटक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। रोशनी से सराबोर अल्बर्ट हॉल और लोक संगीत की लहरियों ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में, मुख्यमंत्री ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने के लिए साधुवाद दिया। यह शाम राजस्थान की एकता, अखंडता और जीवंत संस्कृति के एक उत्सव के रूप में यादगार बन गई।

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