राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के लाखों किसानों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। सोमवार से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत अब वे किसान भी अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे, जो तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में ऑनलाइन पोर्टल पर पहले से पंजीकरण नहीं करा पाए थे।
लोकसभा अध्यक्ष की पहल पर मिली राहत—
इस बड़े बदलाव की नींव शनिवार को कोटा में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने किसानों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के साथ मंथन किया था। श्री बिरला के हस्तक्षेप और किसानों की व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं—
ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन: अब किसानों को पंजीकरण के लिए ई-मित्र या साइबर कैफे के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। खरीद केंद्र पर ही ‘हैंड-टू-हैंड’ रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलेगी।
पोर्टल में बदलाव: विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल की जटिलताओं को खत्म कर उसे यूजर-फ्रेंडली बनाया है।
गिरदावरी और सत्यापन में ढील: पूर्व में सत्यापन की प्रक्रिया के कारण किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिसे अब सुव्यवस्थित और तेज कर दिया गया है।
किसानों में खुशी की लहर—
इस फैसले से विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो तकनीक से दूर हैं। सरकार के इस कदम से न केवल बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम समय पर मिल सकेगा। सोमवार से प्रदेश के सभी केंद्रों पर नई गाइडलाइन के अनुसार गेहूं की तुलाई और खरीद शुरू कर दी जाएगी।




