राज्य सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विद्युत कनेक्शनों और उत्पादन इकाइयों की सुरक्षा जांच प्रक्रिया को बेहद सरल कर दिया है। ऊर्जा विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, अब 33 केवी तक के विद्युत कनेक्शनों और 1 एमवीए (MVA) क्षमता तक की उत्पादन इकाइयों के लिए विद्युत निरीक्षक के भौतिक प्रमाणीकरण की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
स्व-प्रमाणीकरण से मिलेगी राहत—
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम, 2023 के तहत किए गए इस बदलाव के बाद अब सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों सहित 1 एमवीए क्षमता तक के प्लांट का स्व-प्रमाणीकरण (Self-Certification) किया जा सकेगा। अब संबंधित उपभोक्ता, परिसर का मालिक या आपूर्तिकर्ता स्वयं यह प्रमाणित कर सकेंगे कि उनका प्लांट सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। इस निर्णय से उद्यमियों और आम उपभोक्ताओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी।
विकल्प भी है मौजूद—
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपभोक्ता स्वयं प्रमाणीकरण नहीं करना चाहता, तो उसके पास विभागीय पोर्टल के माध्यम से विद्युत निरीक्षक से जांच करवाने का विकल्प भी खुला रहेगा। नियम के अनुसार, विद्युत निगम या आपूर्तिकर्ता किसी भी प्रतिष्ठान को तब तक बिजली कनेक्शन जारी नहीं करेंगे, जब तक कि पोर्टल पर स्व-प्रमाणीकरण या निरीक्षक का प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो जाता।
बड़ी इकाइयों के लिए नियम यथावत—
छोटे और मध्यम स्तर के प्लांट को राहत देने के साथ ही सुरक्षा मानकों का भी ध्यान रखा गया है। अधिसूचना के मुताबिक, 1 एमवीए से अधिक क्षमता वाली विद्युत उत्पादन इकाइयों के लिए अभी भी विभागीय पोर्टल के माध्यम से विद्युत निरीक्षक से प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा। तत्काल प्रभाव से लागू हुए ये नए नियम प्रदेश में औद्योगिक निवेश और सौर ऊर्जा के विस्तार में मील का पत्थर साबित होंगे।




