राजस्थान के शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों और कार्यालयों की गरिमा बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है। विभाग ने उन कार्मिकों और शिक्षकों पर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है, जो कार्यस्थल पर नशे या किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। इस संबंध में निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान (बीकानेर) द्वारा प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
विद्यार्थियों पर पड़ रहा था नकारात्मक प्रभाव—
विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी स्कूल समय के दौरान शराब, तंबाकू, गुटखा और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसी गतिविधियों से न केवल कार्यस्थल का वातावरण दूषित होता है, बल्कि कोमल मन वाले विद्यार्थियों पर भी इसका बेहद नकारात्मक और गहरा असर पड़ रहा है। शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने के लिए अब ऐसे लापरवाह कर्मचारियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

निर्धारित प्रारूप में देनी होगी जानकारी—
जारी निर्देशों के अनुसार, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने अधीन आने वाले स्कूलों और कार्यालयों से ऐसे कार्मिकों की विस्तृत सूची तैयार करने को कहा गया है। यह सूची एक निर्धारित प्रारूप में भेजी जानी अनिवार्य है, जिसमें कर्मचारी का नाम, उसकी एम्प्लॉई आईडी, पदस्थापन स्थान (स्कूल या कार्यालय का नाम), नशे या अनुचित गतिविधि का विशिष्ट प्रकार और अब तक उसके खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से उन कार्मिकों में हड़कंप मच गया है जो ड्यूटी के दौरान नियमों की अनदेखी करते हैं। विभाग का लक्ष्य स्कूलों को पूरी तरह ‘नशा मुक्त’ बनाना और छात्रों के सामने एक आदर्श वातावरण प्रस्तुत करना है। जिला स्तर पर यह डेटा एकत्रित होने के बाद, चिह्नित कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और भी सख्त की जा सकती है।




