राजस्थान ने एक बार फिर महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सफलता का परचम लहराया है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित “अष्टम पोषण पखवाड़ा” (09 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026) के दौरान राजस्थान ने सर्वाधिक गतिविधियां आयोजित कर पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
इस पखवाड़े के दौरान प्रदेश में जो सक्रियता दिखी, वह अभूतपूर्व है। राज्य के 41 जिलों में फैले 62 हजार 139 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुल 45 लाख 37 हजार 229 गतिविधियां संपन्न की गईं। इन आंकड़ों ने न केवल राजस्थान को देश के अन्य राज्यों से काफी आगे खड़ा कर दिया, बल्कि जमीनी स्तर पर पोषण के प्रति राज्य की जागरूकता को भी प्रदर्शित किया।
जन-आंदोलन बना पोषण पखवाड़ा—
अभियान की सफलता का मुख्य श्रेय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और स्थानीय प्रशासन के समन्वय को जाता है। पोषण पखवाड़े के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’, एनीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता, पारंपरिक खाद्य पदार्थों के महत्व और ‘पोषण वाटिका’ जैसे नवाचारों पर विशेष जोर दिया गया।
सफलता के पीछे का विजन—
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राजस्थान की इस उपलब्धि का आधार सूक्ष्म स्तर पर की गई योजना और तकनीकी मॉनिटरिंग है। प्रत्येक जिले और केंद्र पर गतिविधियों को डैशबोर्ड के माध्यम से ट्रैक किया गया, जिससे राजस्थान ने रिकॉर्ड समय में इतनी बड़ी संख्या में आयोजन सुनिश्चित किए।यह लगातार दूसरा अवसर है जब राजस्थान ने पोषण से जुड़े राष्ट्रीय अभियानों में शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी कार्यक्षमता सिद्ध की है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से न केवल प्रदेश का मान बढ़ा है, बल्कि यह ‘स्वस्थ राजस्थान-सशक्त राजस्थान’ के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करता है।




