राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों पर जोर देते हुए कहा है कि यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सोच-समझकर और सही योजना के साथ शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाए, तो यह बुनियादी शिक्षा की पूरी प्रक्रिया को काफी मजबूत और प्रभावी बना सकता है। उन्होंने एआई को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि यह न केवल सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता में भी गुणात्मक सुधार लाता है। मुख्य सचिव मंगलवार को जयपुर स्थित ‘राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर’ में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ‘संपर्क फाउंडेशन’ के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘राजस्थान की शिक्षा में एआई की भूमिका’ रखा गया था।
सीखने और सिखाने का नया माध्यम—
संवाद कार्यक्रम के दौरान श्री श्रीनिवास ने विस्तार से बताया कि कैसे आधुनिक तकनीक पारंपरिक शिक्षा पद्धति को बदल सकती है। उन्होंने कहा कि बुनियादी शिक्षा पद्धति को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह तकनीक डेटा और विश्लेषण के माध्यम से शिक्षकों को यह समझने में मदद करती है कि किस छात्र को कहाँ कठिनाई आ रही है। इससे व्यक्तिगत स्तर पर सीखने की प्रक्रिया को बल मिलता है।
उन्होंने आगे कहा, “राजस्थान सरकार ऐसे नए और प्रभावी तरीकों को खोजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो हमारे शिक्षकों को सशक्त बनाते हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जहाँ कक्षा में बच्चों की भागीदारी बढ़े और पूरी शिक्षण प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बने।”
टेक्नोलॉजी और नीतियों का संगम—
मुख्य सचिव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल तकनीक का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही नीतियों के साथ जुड़ाव होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी, प्रभावी शिक्षण विधियों और दूरदर्शी नीतियों को एक मंच पर लाना अनिवार्य है। एआई इस संगम के लिए एक प्रभावी और मजबूत प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
एआई के माध्यम से शिक्षकों पर प्रशासनिक काम का बोझ कम किया जा सकता है, जिससे वे अपना अधिक समय छात्रों के रचनात्मक विकास और अध्यापन पर केंद्रित कर सकें।
संपर्क फाउंडेशन की पहल की सराहना—
कार्यक्रम में ‘संपर्क फाउंडेशन’ के प्रयासों की भी सराहना की गई, जो जमीनी स्तर पर शिक्षा में सुधार के लिए तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। संवाद के दौरान शिक्षा विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे स्मार्ट क्लासरूम और एआई-संचालित टूल्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी वैश्विक स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है। संबोधन के अंत में मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि एआई के समावेश से राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनकर उभरेगा। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे एआई के नैतिक उपयोग और इसके सुरक्षित कार्यान्वयन पर ध्यान दें ताकि हर बच्चे को समान अवसर मिल सकें। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और शिक्षाविद उपस्थित रहे, जिन्होंने एआई के माध्यम से राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ बनाने पर अपने विचार साझा किए।




