High Court News: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जयपुर की 2200 करोड़ की जमीन अब हाउसिंग बोर्ड की

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राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजधानी के प्राइम लोकेशन बी-2 बाईपास स्थित श्रीराम कॉलोनी की बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहे तीन दशक पुराने विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि पर राजस्थान आवासन मंडल के मालिकाना हक को सही ठहराते हुए मंडल के पक्ष में निर्णय दिया है। इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।

साजिश और गलत तथ्यों का खुलासा—

न्यायाधीश गणेश राम मीणा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान आवासन मंडल की याचिका को स्वीकार कर लिया, जबकि निजी पक्षकारों की ओर से दायर तीन अन्य याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 12 फरवरी, 2002 को हाईकोर्ट से जो आदेश प्राप्त किया गया था, वह गलत तथ्यों और सूचनाओं को छिपाकर हासिल किया गया था। अदालत ने उस पुराने आदेश को रद्द करते हुए निजी कब्जे की कोशिशों को करारा झटका दिया है।

रसूखदारों के पट्टे हुए बेअसर—

यह विवाद पिछले 30 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में उलझा हुआ था। इस दौरान श्रीराम कॉलोनी योजना के तहत कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली रसूखदारों को अवैध रूप से पट्टे जारी कर दिए गए थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उन तमाम पट्टों की वैधता समाप्त हो गई है। आवासन मंडल के अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि अब मंडल की मानसरोवर या अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का हिस्सा बन सकेगी।

न्याय की जीत—

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकारी जमीनों पर रसूखदारों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी नजीर है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर अदालती आदेश हासिल करना न्याय प्रक्रिया का अपमान है। इस फैसले से आवासन मंडल के खजाने में हजारों करोड़ की संपत्ति वापस लौट आई है।

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