राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी दो सर्कुलरों पर हुये बवाल के संदर्भ में सफाई देते हुये कहा कि 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में सदन की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का कोई नया प्रावधान नहीं किया गया है। विधायकों के लिए जारी किए गए समस्त बुलेटिन पूर्व विधानसभाओं के सत्रों की भांति ही हैं। प्रश्न पूछने की प्रक्रिया, शून्यकाल, प्रश्नकाल और अन्य संसदीय व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राजस्थान विधानसभा की स्वस्थ संसदीय परंपराओं के अनुसार ही इस सत्र में भी पूर्ववत व्यवस्थाएं ही रखी गई है।
श्री देवनानी ने बताया कि वर्ष 1995 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा के निर्देशानुसार पर्ची पद्धति प्रारम्भ की गई थी, जो वर्ष 2020 तक सतत रूप से संचालित रही। यह व्यवस्था 20 मार्च 2020 तक लागू थी। 15 वीं विधानसभा के छठे सत्र के दौरान कार्य सलाहकार समिति की बैठक 10 फरवरी 2021 में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी द्वारा पर्ची व्यवस्था को बंद करने का निर्णय लिया गया था। हमने इस व्यवस्था को पुनः प्रारम्भ किया है।
वहीं ’तुच्छ विषयों के उपयोग पर भी श्री देवनाानी ने अपनी सफाई में बताया कि राजस्थान विधानसभा की नियमावली में 1956 से, लोकसभा और देश के अन्य राज्यों की विधानसभा में भी-’प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 37 (2) (17) में पहले से ही यह स्पष्ट प्रावधान है कि तुच्छ विषयों पर प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे। यह नियम राजस्थान विधान सभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियमों के प्रथम संस्करण 1956 से ही अस्तित्व में है। इसमें कोई नया परिवर्तन नहीं किया गया है।




