Rajasthan News: 15 साल पुराने ‘खटारा’ व्यावसायिक वाहनों पर गिरेगी गाज

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राजस्थान की राजधानी जयपुर की आबो-हवा को शुद्ध बनाने और बढ़ते प्रदूषण ग्राफ को थामने के लिए परिवहन विभाग ने अब ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है। जयपुर के ‘नॉन अटेनमेंट सिटी’ (वे शहर जहां प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से लगातार अधिक रहता है) की श्रेणी में होने के कारण विभाग अब सख्त रुख अख्तियार कर चुका है। आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत के निर्देशानुसार, गुरुवार से शहर की सड़कों पर 15 साल से अधिक पुराने कॉमर्शियल वाहनों के खिलाफ 45 दिवसीय विशेष निर्णायक अभियान का आगाज किया जा रहा है।

खटारा वाहनों का कटेगा पत्ता, एनजीटी नियमों की होगी पालना—

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के उन नियमों को कड़ाई से लागू करना है, जो पुराने और जहरीला धुआं उगलने वाले वाहनों को प्रतिबंधित करते हैं। परिवहन विभाग की रडार पर विशेष रूप से वे व्यावसायिक वाहन हैं, जो अपनी 15 वर्ष की निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुके हैं, लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़कर शहर की हवा में जहर घोल रहे हैं। आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया है कि ऐसे वाहनों को न केवल जब्त किया जाएगा, बल्कि उनके पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी।

शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर होगी सख्त नाकेबंदी—

45 दिनों तक चलने वाले इस सघन अभियान के लिए परिवहन विभाग ने विशेष फ्लाइंग स्क्वाड और टीमों का गठन किया है। ये टीमें शहर के मुख्य चौराहों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रवेश द्वारों पर तैनात रहेंगी। अभियान के दौरान केवल फिटनेस और धुआं जांच ही नहीं, बल्कि वाहन की आयु की भी गहनता से जांच की जाएगी। विभाग का मानना है कि पुराने डीजल और पेट्रोल व्यावसायिक वाहन पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ते कदम—

जयपुर में बढ़ते शहरीकरण और वाहनों के दबाव के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर चिंताजनक स्तर पर पहुंच जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पुराना व्यावसायिक वाहन 10 नए वाहनों के बराबर प्रदूषण फैलाता है। परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि फेफड़ों संबंधी बीमारियों से जूझ रहे शहरवासियों को भी स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा।

वाहन स्वामियों को चेतावनी—

विभाग ने वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे स्वयं ही अपने 15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटा लें। यदि अभियान के दौरान ऐसे वाहन पकड़े जाते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ ‘स्क्रैपिंग पॉलिसी’ के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह अभियान जयपुर को ‘स्मार्ट’ के साथ-साथ ‘साफ’ शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि 45 दिनों के इस ‘क्लीन एयर मिशन’ से जयपुर की फिजाओं में कितना बदलाव आता है।

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