राजस्थान में घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा के दावे धरातल की हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। एक तरफ मंत्री जी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘ऑल इज वेल’ का राग अलाप रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभाग के भीतर की अव्यवस्था ‘दीये तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है।
बुधवार को तेल कंपनियों के साथ बैठक में मंत्री ने बड़े-बड़े दावे किए कि प्रदेश में गैस का पर्याप्त स्टॉक है और बुकिंग के तीन-चार दिन में सिलेंडर मिल रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि यह बयान केवल ‘गाल बजाने’ जैसा प्रतीत होता है। विभाग की अपनी हालत यह है कि इसकी आधिकारिक वेबसाइट पिछले 10-15 वर्षों से अपडेट तक नहीं हुई है। डिजिटल इंडिया के दौर में जिस विभाग के पास अपनी सूचनाएं अपडेट करने की फुर्सत नहीं, वह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच निर्बाध आपूर्ति का दावा कैसे कर सकता है?
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो विभाग के अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं और मंत्री के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जब विभाग का प्रशासनिक ढांचा ही मंत्री के नियंत्रण से बाहर हो, तो आमजन को राहत मिलने की उम्मीद बेमानी है। वैश्विक परिस्थितियों का डर दिखाकर जनता पहले ही सहमी हुई है और उस पर विभाग की यह सुस्ती कोढ़ में खाज का काम कर रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों की दुहाई देने वाले सुमित गोदारा को शायद यह अंदाजा नहीं है कि केवल बैठकों और कागजी दावों से जनता के चूल्हे नहीं जलते। जमीनी स्तर पर उपभोक्ता आज भी असमंजस में हैं। मंत्री जी को अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह देने के बजाय पहले अपने घर (विभाग) को दुरुस्त करना चाहिए, जहां अफसरशाही उनकी सुनने को तैयार नहीं है।




