हनुमानगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह एक तरफ जहां महिला सशक्तिकरण के नारों से गूंजा, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर महिलाओं के साथ हुए व्यवहार ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी सहित भाजपा के दिग्गज नेता शामिल हुए।
काले दुपट्टों पर ‘पहरा’, सुरक्षाकर्मियों ने उतरवाए—
समारोह में शामिल होने आईं हजारों महिलाओं को प्रवेश द्वार पर एक अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों ने विरोध के डर से काले रंग के कपड़ों और सामान को लेकर सख्त रुख अपनाया। इस दौरान काले दुपट्टे पहनकर आई महिलाओं और युवतियों को गेट पर ही उन्हें उतारकर रखने को मजबूर किया गया। महिलाएं सुरक्षाकर्मियों से विनती करती रहीं कि दुपट्टा उनकी मर्यादा और पहनावे का हिस्सा है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने किसी की एक न सुनी। नतीजतन, प्रवेश द्वार पर काले दुपट्टों और पर्स का ढेर लग गया।
भाषणों में सम्मान, धरातल पर कड़वा अनुभव—
विडंबना तब और स्पष्ट हुई जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंच से महिलाओं के सम्मान में भावुक संबोधन दिया। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता” (जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं)। एक ओर मंच से नारी शक्ति की वंदना हो रही थी, वहीं दूसरी ओर सभा स्थल के बाहर महिलाएं अपने दुपट्टे वापस पाने के लिए जद्दोजहद कर रही थीं।
किसान नेता को किया डिटेन—
सुरक्षा का घेरा इतना सख्त था कि मुख्यमंत्री की सभा में शामिल होने जा रहे अखिल भारतीय किसान सभा के जिला महासचिव मंगेज चौधरी को पुलिस ने पहले ही डिटेन कर लिया ताकि किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन की संभावना को रोका जा सके।
महिला दिवस जैसे गरिमामयी अवसर पर सुरक्षा के नाम पर दुपट्टे उतरवाने की इस घटना ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय गलियारों तक इस “दोहरे मापदंड” की तीखी चर्चा हो रही है।




