राजस्थान के खान व भूविज्ञान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के राजस्व लक्ष्यों को शत-प्रतिशत अर्जित करने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। विभाग अब ‘ठोस रणनीति’ और ‘डिजिटल निगरानी’ के दोहरे फॉर्मूले पर फोकस कर रहा है। शुक्रवार को उदयपुर स्थित खनिज भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में राजस्व संग्रहण की गति को और तेज किया जाए।
राजस्व वसूली में 11 फीसदी की बढ़ोतरी—
बैठक के दौरान सामने आया कि विभाग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में माइंस विभाग 11 फीसदी की विकास दर के साथ पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अधिक राजस्व वसूल चुका है। इस गति को बरकरार रखने के लिए प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को बकाया वसूली और वर्तमान देयकों पर पैनी नजर रखने को कहा है।
तकनीक से रुकेगी लीकेज—
विभागीय कामकाज में पारदर्शिता लाने और राजस्व चोरी रोकने के लिए तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया गया है। श्री रविकान्त ने कहा कि तुलाई कांटों (वेब्रिज) का कम्प्यूटराइज मोड्यूल और व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम (VTS) न केवल विभाग के लिए बल्कि लीजधारकों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि कम्प्यूटराइज मोड्यूल के परीक्षण और इंस्टालेशन के काम में तेजी लाई जाए। व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू कर अवैध परिवहन पर लगाम कसी जाएगी।
अवैध खनन पर कड़ाई और बकाया वसूली के निर्देश—
बैठक में अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन के मामलों में जब्त वाहनों और सामग्री पर जुर्माना राशि की वसूली तुरंत सुनिश्चित की जाए। आरसीसी-ईआरसीसी ठेकों पर रॉयल्टी वसूली की नियमित निगरानी हो और पुराने बकाया (Old Arrears) की वसूली के लिए विशेष प्रयास किए जाएं और वर्तमान बकाया की शत-प्रतिशत वसूली की जाए। एसएमई (SME) स्तर पर राजस्व संग्रहण का नियमित विश्लेषण और मार्गदर्शन किया जाए।
विभागीय तालमेल और मॉनिटरिंग—
निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा ने बैठक में विश्वास दिलाया कि राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था को बेहद मजबूत किया गया है। वित्त अधिकारियों को उन कार्यालयों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ राजस्व संग्रहण तुलनात्मक रूप से कम है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य न केवल सरकारी खजाने को भरना है, बल्कि खनन क्षेत्र में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देना भी है। बैठक में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने फील्ड स्तर की चुनौतियों और समाधानों पर अपने सुझाव साझा किए।




