Jaipur News: एसएमएस की इमरजेंसी में अब होगी सामान्य और गंभीर रोगियों के लिए अलग—अलग व्यवस्था

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सवाई मानसिंह अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगियों और सामान्य रोगियों के लिए उपचार की अलग-अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेगी ताकि एक ही कक्ष में रोगी भार अधिक नहीं हो और गंभीर रोगियों को त्वरित ओर बेहतर उपचार मिल सके। वहीं अस्पताल में रोगीभार को देखते हुए मानव संसाधन बढ़ाने और बेड की उपलब्धता व इमरजेंसी सेवाओं के विस्तार सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जायेगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने सवाई मानसिंह अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान इस संबंध में दिशा निर्देश दिए। उन्होंने गणगौरी अस्पताल और सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया। चिकित्सा शिक्षा सचिव ने करीब 2 घंटे निरीक्षण कर तीनों अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया और सेवाओं को पेशेंट फ्रेण्डली बनाने के निर्देश दिए।
चिकित्सा शिक्षा सचिव ने सवाई मानसिंह अस्पताल में इमरजेंसी, आईसीयू व सामान्य वार्ड सहित अन्य स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में रोगियों के परिजनों के लिए अन्नपूर्णा रसोई की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाएं कि ओपीडी में आने वाले रोगियों को पंजीकरण, परामर्श और जांच के लिए बार—बार कतारों में नहीं खड़ा होना पड़े। तकनीक का उपयोग करते हुए रोगियों को कतारों से मुक्ति दिलाई जाए।
श्रीमती राठौड़ ने सवाई मानसिंह अस्पताल में रोगी भार को देखते हुए चिकित्सक, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए भी प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने नि:शुल्क जांच व दवा योजनाओं, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के संचालन के ​बारे में भी जानकारी ली और आवश्यक दिशा—निर्देश दिए।
वहीं प्रमुख शासन सचिव ने रोगियों एवं उनके परिजनों से भी संवाद कर स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में फीडबैक लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोगियों के परिजनों के अस्पताल में बैठने, छाया एवं पानी की समुचित व्यवस्था हो। रात के समय परिजनों के ठहरने के लिए स्थान निर्धारित कर उसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। उन्होंने कहा कि रोगियों के उपचार में किसी तरह की कमी नहीं रहे। साथ ही, रोगियों तथा परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए।

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