राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में, चाहे वह राजनीति हो या कोई अन्य सामाजिक कार्य, धर्म का होना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के अभाव में कोई भी कार्य सुचारु रूप से संपन्न नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री मंगलवार को बालोतरा जिले के कनाना श्रीमठ में आयोजित श्री ललिता महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं मां सरस्वती मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
साधु-संतों के सानिध्य में सांस्कृतिक पुनर्जागरण—
मुख्यमंत्री ने राजस्थान की पावन धरा को शौर्य, आस्था और भक्ति की त्रिवेणी बताते हुए कहा कि प्रदेश में साधु-संतों के आशीर्वाद से सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन परंपरा हमें धर्म के मार्ग पर चलते हुए सामाजिक एकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विश्वास जताया कि धर्मपरायण होने पर ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं और इसी मार्ग पर चलकर एक उत्कृष्ट समाज व सशक्त राष्ट्र की स्थापना संभव है।
विरासत से जुड़ाव और सामाजिक मजबूती—
महोत्सव के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार के वृहद धार्मिक आयोजन न केवल सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी को गौरवशाली विरासत और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने कनाना मठ की पवित्र भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यहाँ की मिट्टी में एक अलौकिक ऊर्जा का संचार होता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।
बालोतरा गौरवशाली संस्कृति का सजग प्रहरी—
मुख्यमंत्री ने बालोतरा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ के तीर्थ स्थल हमारी समृद्ध संस्कृति के सजग प्रहरी हैं। कनाना श्रीमठ जैसे स्थान जन-आस्था के केंद्र होने के साथ-साथ लोक कल्याण के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर मंच पर कई वरिष्ठ साधु-संत, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महोत्सव के दौरान समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया। मुख्यमंत्री के संबोधन ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जगाया, बल्कि सुशासन में धर्म और नीति के समावेश की आवश्यकता पर भी बल दिया।




