Rajasthan News: जाति प्रमाण पत्र के लिए अब राजस्व रिकॉर्ड अनिवार्य नहीं —मंत्री अविनाश गहलोत 

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राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सोमवार को विधानसभा में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र के लिए अब केवल राजस्व रिकॉर्ड पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है।

विकल्पों से आसान होगी प्रक्रिया—

मंत्री गहलोत ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा 9 सितंबर, 2015 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी आवेदक के पास राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। इन दस्तावेजों में मुख्य रूप से:शैक्षणिक रिकॉर्ड (स्कूल या कॉलेज के दस्तावेज),नगर पालिका के रिकॉर्ड, ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड शामिल हैं। बशर्ते इन दस्तावेजों से आवेदनकर्ता की पैतृक जाति की स्पष्ट पुष्टि होती हो। राजस्थान पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन वैकल्पिक साक्ष्यों का उचित परीक्षण कर सक्षम अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत हैं।

निस्तारण के सख्त निर्देश—

इसके अतिरिक्त, मंत्री ने विभाग को उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों के आवेदन छोटी कमियों या आक्षेपों के कारण रुके हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जिला कार्यालयों को अग्रेषित किया जाए ताकि पात्र विद्यार्थियों को समय पर लाभ मिल सके। सरकार का यह कदम उन हजारों ग्रामीण और शहरी आवेदकों के लिए राहत भरा है जिनके पास पुराने पुश्तैनी राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, लेकिन उनके पास स्कूल या स्थानीय निकायों के प्रामाणिक दस्तावेज मौजूद हैं।

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