Rajasthan Jews: बंक मारने की सुर्खियों में रहने वाले नीलाभ सक्सेना ने संभाला उद्योग भवन में कार्यभार

0
4

राजस्थान कैडर के विवादास्पद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी नीलाभ सक्सेना ने सोमवार को उद्योग भवन पहुंचकर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग तथा निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP) के आयुक्त का पदभार ग्रहण कर लिया। पद संभालते ही उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप युवाओं को ‘नौकरी देने वाला’ बनाने और ‘मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की बड़ी-बड़ी बातें तो कीं, लेकिन उनके पीछे करौली जिले में उनके कार्यकाल का वो विवादित साया भी चला आया है, जिसने उनकी प्रशासनिक क्षमता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

करौली के 30 महीने: विकास की जगह विवादों का रहा बोलबाला—

नीलाभ सक्सेना का करौली कलेक्टर के रूप में कार्यकाल जनहित के बजाय व्यक्तिगत अहंकार और प्रशासनिक अक्षमता के लिए याद किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पाठक ने उन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि श्री सक्सेना ने करौली जिले के बेशकीमती 30 महीने पूरी तरह बर्बाद कर दिए। पाठक के अनुसार, सक्सेना की कार्यशैली किसी लोक सेवक की नहीं बल्कि एक मध्यकालीन ‘राजा’ की थी, जो जनता को घंटों अपने दरबार में खड़ा रखकर फरियाद सुनने के नाम पर उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करते थे।

जनप्रतिनिधियों का अपमान और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप—

सक्सेना पर आरोप है कि उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए जनप्रतिनिधियों को चपरासी से भी बदतर तवज्जो दी। इतना ही नहीं, उन पर राजकीय भूमि हड़पने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी कथित संलिप्तता और करोड़ों के घोटाले की चर्चाएं अब आम हो गई हैं। आरोप यह भी है कि उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और संभागीय आयुक्त के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की, बल्कि अपनी अकर्मण्यता को छुपाने के लिए ईमानदार अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रताड़ित किया। जो अधिकारी उनके ‘अवैध’ आदेशों को मानने से इनकार करते थे, उन्हें अकारण चार्जशीट थमा दी जाती थी और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था।

अशोक पाठक की चेतावनी: होगा ‘कारगुजारियों का पोस्टमार्टम’—

नीलाभ सक्सेना के करौली से हटाए जाने के पीछे सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पाठक का कड़ा विरोध एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पाठक ने अब यह घोषणा कर दी है कि वे सक्सेना के कार्यकाल के दौरान हुई हर एक अनियमितता का ‘पूरा पोस्टमार्टम’ करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि एक ‘बंक मारने’ वाले और प्रशासनिक रूप से अक्षम अधिकारी को इतने महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मिलना प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

हालाँकि श्री सक्सेना अब उद्योग विभाग के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन करौली में उनके द्वारा छोड़े गए ‘अशांति और भ्रष्टाचार’ के पदचिह्न उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या एक ऐसा अधिकारी, जिस पर खुद गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप हों, वह प्रदेश के औद्योगिक विकास और युवाओं के स्वरोजगार के साथ न्याय कर पाएगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here