जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेशवासियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुरूप, राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘राज-ममता’ (Raj-Mamta) कार्यक्रम का आगाज किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब प्रदेश के हर जिले में ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल्स’ (Mental Health Care Cells) स्थापित किए जाएंगे, ताकि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और उपचार स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सके।
जयपुर में बनेगा अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस—
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान को अग्रणी बनाने के लिए राजधानी जयपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ’ (Center of Excellence in Mental Health) की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक जांच उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों से लैस होगा। यहाँ न केवल जटिल मानसिक रोगों का उपचार होगा, बल्कि रिसर्च और प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
टेली-मानस से मिल रहा संबल—
राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल विस्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 71 हजार से अधिक प्रदेशवासी विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त कर चुके हैं। यह सेवा उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जो सामाजिक संकोच या दूरी के कारण अस्पताल नहीं पहुंच पाते।
जन-जन तक पहुंचेगी मानसिक स्वास्थ्य सेवा—
मुख्यमंत्री का मानना है कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। ‘राज-ममता’ पहल के जरिए सरकार का लक्ष्य अवसाद, तनाव और अन्य मानसिक विकारों से जूझ रहे लोगों को मुख्यधारा में लाना है। जिला स्तर पर सेल्स बनने से ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंच सकेंगी। सरकार की इस पहल से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया और संवेदनशील ढांचा तैयार हो रहा है।




