RAMAYAN: रामायण क्या है?

एक रात की बात हैं, माता कौशल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई, पूछा कौन हैं ? मालूम पड़ा श्रुतकीर्ति जी (सबसे छोटी बहु, शत्रुघ्न जी की पत्नी)हैं। माता कौशल्या जी ने उन्हें नीचे बुलाया। श्रुतकीर्ति जी आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं। माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बेटी ? क्या नींद नहीं आ रही? शत्रुघ्न कहाँ है? श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए। उफ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया। तुरंत आवाज लगाई, सेवक दौड़े आए। आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली। आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले? अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले!! माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी नेआँखें खोलीं, माँ! उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता। माँ ने कहा, शत्रुघ्न! यहाँ क्यों?” शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए, भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं? माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं। देखो क्या है ये रामकथा… यह भोग की नहीं….त्याग की कथा हैं..!! यहाँ त्याग की ही प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा… चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं। “रामायण” जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी सीता माईया ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया..!! परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी “उर्मिला” के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा?? क्या बोलूँगा उनसे? यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- “आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु श्रीराम की सेवा में वन को जाओ…मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।” लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था!! परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया..!! वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है..पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!! लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया.!! वन में “प्रभु श्री राम माता सीता” की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं, परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया!! मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण जी को “शक्ति” लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पर्वत लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में जब हनुमान जी अयोध्या के ऊपर से गुजर रहे थे तो भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं!! तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि, सीता जी को रावण हर ले गया, लक्ष्मण जी युद्ध में मूर्छित हो गए हैं। यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि “लक्ष्मण” के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे!! माता “सुमित्रा” कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं..अभी शत्रुघ्न है!! मैं उसे भेज दूंगी..मेरे दोनों पुत्र “राम सेवा” के लिये ही तो जन्मे हैं!! माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि, यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं? हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं…सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा!! उर्मिला बोलीं- ” मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता!! रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता.!! आपने कहा कि, प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं..! जो “योगेश्वर प्रभु श्री राम” की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता..!! यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं.. मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं.. उन्होंने न सोने का प्रण लिया था..इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं..और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया…वे उठ जायेंगे..!! और “शक्ति” मेरे पति को लगी ही नहीं, शक्ति तो प्रभु श्री राम जी को लगी है!! मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में ही सिर्फ राम हैं, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा!! इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ..सूर्य उदित नहीं होगा।” राम राज्य की नींव जनक जी की बेटियां ही थीं… कभी “सीता” तो कभी “उर्मिला”..!! भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया ..परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण और बलिदान से ही आया!! जिस मनुष्य में प्रेम, त्याग, समर्पण की भावना हो उस मनुष्य में राम हि बसता है… कभी समय मिले तो अपने वेद, पुराण, गीता, रामायण को पढ़ने और समझने का प्रयास कीजिएगा .,जीवन को एक अलग नज़रिए से देखने और जीने का सऊर मिलेगा!! “लक्ष्मण सा भाई हो, कौशल्या माई हो, स्वामी तुम जैसा, मेरा रघुराइ हो.. नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो.. हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, लव कुश के जैसी, संतान हमारी हो.. श्रद्धा हो श्रवण जैसी, सबरी सी भक्ति हो, हनुमत के जैसी निष्ठा और शक्ति हो… ” ये रामायण न है, पुण्य कथा श्री राम की।

Constitution: राजस्‍थान विधान सभा की संविधान दीर्घा को आमजन देखे -विधान सभा अध्यक्ष

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राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि भारत की आत्‍मा भारतीय संविधान है। भारत के संविधान के प्रति श्रद्धा और जागरूकता बढाने के लिए राजस्‍थान विधान सभा में संविधान दीर्घा का निर्माण किया गया है। उन्‍होंने कहा है कि इस दीर्घा का उद्देश्‍य आमजन और युवाओं को भारत और भारत की सांस्‍कृतिक नैतिकता से परिचित कराना है। श्री देवनानी ने आमजन से राजस्‍थान विधान सभा में बनाई गई संविधान दीर्घा का अवलोकन करने का अनुरोध किया है। अध्यक्ष ने कहा है कि संविधान में नन्‍दलाल बोस द्वारा चित्रित भारतीय सभ्‍यता, संस्‍कृति, इतिहास और विरासत का संविधान दीर्घा में प्रदर्शन किया गया है। मूल संविधान के 22 भागों के आरम्‍भ में प्रदर्शित कलाकृतियों यथा रामायण में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्‍मण जी के वनवास से घर वापसी का दृश्‍य, श्री कृष्‍ण के उपदेश, गौतम बुद्ध व भगवान महावीर का जीवन, सम्राट अशोक व विक्रमादित्‍य के सभागार के दृश्‍य, छत्रपति शिवाजी, गुरू गोविन्‍द सिंह, रानी लक्ष्‍मीबाई, स्‍वतन्‍त्रता संग्राम में महात्‍मा गांधी के दाण्डी मार्च और नेता जी सुभाष चन्‍द्र बोस का चित्रण किया गया है।

RUHS: प्रदेश में आरयूएचएस को एम्स की तर्ज पर किया जाएगा विकसित

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मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की पहल पर आरयूएचएस को एम्स की तर्ज पर रिम्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में की गई बजट घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दल ने चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशानुसार दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया कर इस विषय में विस्तार से चर्चा की। चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार के नेतृत्व में गए अधिकारियों के दल में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. धनंजय अग्रवाल और चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. रश्मि गुप्ता शामिल रही। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। जिसमें राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) की परिकल्पना, इसकी संचालन व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा देने की संभावनाएं और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विचार—विमर्श किया। इसके अलावा, यह भी विचार किया गया कि किस प्रकार यह नया संस्थान प्रदेश के अन्य 30 मेडिकल कॉलेजों और संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को और बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। चर्चा के दौरान एम्स की प्रशासनिक प्रणाली, फैकल्टी की नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रियाओं, वेतनमान और प्रोत्साहन नीतियों के साथ-साथ स्वायत्तता और सरकारी मंजूरी की आवश्यकताओं पर भी विचार किया गया। बैठक में इस बात पर भी मंथन किया गया कि नए संस्थान को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की बजाय तृतीयक और चतुर्थक स्वास्थ्य सेवाओं और अनुसंधान पर केंद्रित कैसे रखा जाए, जिससे प्रदेश में उन्नत चिकित्सा सेवाएं सुलभ हो सकें। नए संस्थान के लिए आवश्यक अधोसंरचना, मानव संसाधन प्रबंधन और कानूनी पहलुओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। एम्स अधिनियम के प्रावधानों को राजस्थान की आवश्यकताओं के अनुरूप कैसे लागू किया जा सकता है, इस पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।राजस्थान सरकार का उद्देश्य है कि यह नया चिकित्सा संस्थान प्रदेश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करे और प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।

Transport Department: परिवहन विभाग ने घटाई ड्राइविंग लाइसेंस फीस

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जयपुर परिवहन विभाग ने स्थाई लाइसेंस के लिए ली जा रही फीस को घटाई है। विभाग ने जन मोर्चा समिति की शिकायत पर यह कदम उठाया है। समिति के अनुसार जयपुर में दोनो आरटीओ में फीस की विसंगती थी। इस पर समिति ने परिवहन आयुक्त के सामने मामला उठाया था। विषय की गम्भीरता को देखते हुये विभाग ने फीस में 250 रुपए की गई कमीहै। आपको बतादें कि परिवहन विभाग ने जयपुर के दोनों आरटीओ में बराबर की फीस तय की थी। लेकिन जयपुर प्रथम में ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक पर ट्रायल के नाम पर 250 रुपए अतिरिक्त लिये जा रहे है।

District council: प्रदेश में नई जिला परिषदों का होगा गठन

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नए जिलों में प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की है। श्री शर्मा ने नई जिला परिषदों के गठन और प्रभावित जिला परिषदों के पुनर्गठन से संबंधित कार्यवाही के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। प्रस्ताव के अनुसार राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम के तहत संबंधित जिलों (8 नए जिले एवं 12 प्रभावित जिले) के जिला कलक्टर पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों के आधार पर जिला परिषद के गठन एवं पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इससे प्रभावित पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों के नवसृजन एवं पुनर्गठन के प्रस्ताव भी तैयार किए जाएंगे। जिला कलक्टरों द्वारा इन प्रस्तावों को सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रसारित कर 1 माह में आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी, जिनके निस्तारण के बाद प्रस्तावों को राज्य सरकार को प्रेषित कर दिया जाएगा। इन प्रस्तावों के परीक्षण एवं अनुमोदन पश्चात नवगठित/पुनर्गठित जिला परिषदों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी की जाएगी।

mineral: खनिज ब्लॉक की होगी ई-नीलामी

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जैसलमेर, कोटा और सवाई माधोपुर जिलों में विभिन्न खनिज ब्लॉक की ई-नीलामी हेतु अधिसूचना जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन लाईमस्टोन खनिज ब्लॉक्स और लेड-जिंक ब्लॉक की ई-नीलामी की अनुमति का अनुमोदन किया है। मुख्यमंत्री के अनुमोदन के उपरान्त अब जैसलमेर जिले में खनिज लाईमस्टोन के ब्लॉक पारेवार (SN&III) 960 हैक्टेयर क्षेत्र, पारेवार (SN&III) 928 हैक्टेयर क्षेत्र, पारेवार (SN&IV) 960 हैक्टेयर क्षेत्र एवं पारेवार-ए (400 हैक्टेयर क्षेत्र), कोटा जिले में लाईमस्टोन के पूर्वेक्षित ब्लॉक निनामा-दुनिया एक्सटेंशन (408.2974 हैक्टेयर क्षेत्र), जैसलमेर जिले में लाईमस्टोन के खाबिया (200.4766 हैक्टेयर क्षेत्र) एवं खाबिया ईस्ट ब्लॉक (205.9798 हैक्टेयर क्षेत्र) और सवाईमाधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा में लेड-जिंक ब्लॉक (984.5951 हैक्टेयर क्षेत्र) के कम्पोजिट लाइसेंस में ई-नीलामी की अधिसूचना जारी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन में समूचे देश में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। इसे देखते हुए ओडिशा के कोणार्क में हाल ही आयोजित नेशनल माइंस मिनिस्टर्स कॉन्फ्रेंस में वर्ष 2023-24 में देश में सर्वाधिक मेजर मिनरल ब्लॉक के ऑक्शन करने पर राजस्थान को प्रथम पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। पिछले एक साल में खनन क्षेत्र में खनिज खोज से लेकर माइनर एवं मेजर मिनरल ब्लॉकों के ऑक्शन, एमनेस्टी योजना, ड्रोन सर्वे और एकबारीय समाधान योजना, नई और प्रगतिशील खनिज नीति, एम-सेण्ड नीति से प्रदेश में खनन उद्यमियों एवं खननकर्ताओं में निवेश का सकारात्मक माहौल पैदा हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से गत वित्त वर्ष में खनन क्षेत्र में 7 हजार 460 करोड़ 48 लाख रूपये का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया गया। वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 31 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की गई, जिनमें से वर्तमान राज्य सरकार के पहले तीन माह में ही 15 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी केन्द्र सरकार के पोर्टल के माध्यम से की गई। वर्तमान में प्रदेश में खनन क्षेत्र में लगभग 35 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा राजस्थान खनिज नीति-2024 एवं एम-सेण्ड नीति-2024 लाकर महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए गए हैं। इसके माध्यम से राज्य जीडीपी में खनन क्षेत्र की हिस्सेदारी को 3.4 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2029-30 तक 5 प्रतिशत और 2046-47 तक 8 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। साथ ही, इन नवाचारों से खनन क्षेत्र में रोजगार सृजन को भी गति मिलेगी।

food security: प्रदेश में खाद्य सुरक्षा से वंचित पात्र परिवार जुड़वा सकेगें अपने नाम

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खाद्य सुरक्षा से वंचित पात्र परिवारों एवं व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभान्वित करने हेतु नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा की प्राथमिकता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया में सरलीकरण हेतु खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी निर्देशानुसार इच्छुक व्यक्ति अथवा परिवार को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा। आवेदन स्वयं/ई मित्र के जरिए किया जा सकेगा। आवेदक को अपनी श्रेणी यथा अन्त्योदय, बीपीएल, स्टेट बीपीएल के कार्ड की क्रमांक संख्या, सीमान्त कृषक, श्रमिक कार्ड और सफाई कर्मचारी होने के दस्तावेजी साक्ष्य स्वयं हस्ताक्षरित कर आवेदन के साथ संलग्न करने होंगे। साथ ही आवेदक को यह शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा कि वह खाद्य सुरक्षा की निष्कासन सूची की किसी भी श्रेणी के आधार पर अपात्र नहीं है। विभाग द्वारा ज़ारी निर्देशानुसार खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जोड़ने हेतु प्राप्त आवेदन निस्तारण हेतु संबंधित अपीलीय अधिकारी के समक्ष ऑनलाइन किया जाएगा। अपीलीय अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजनान्तर्गत नाम जोड़ने/नहीं जोड़ने की कार्यवाही आवेदन प्राप्त होने के एक माह के भीतर संपन्न की जायेगी। अपीलीय अधिकारी द्वारा प्राप्त आवेदन को शहरी क्षेत्र में नगरीय निकायों (नगरपालिका/नगर परिषद/नगर निगम) के अधिशाषी अधिकारी और ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक विकास अधिकारी को जांच हेतु प्रेषित किया जाएगा। उक्त अधिकारियों द्वारा आवेदन की जांच हेतु गठित कमेटी (पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी/स्थानीय निकाय का कार्मिक, बूथ लेवल अधिकारी) से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर नाम जोड़ने के संबंध में स्पष्ट अभिमत के साथ प्रकरण अपीलीय अधिकारी को पुनः प्रेषित किया जाएगा। तदोपरान्त संबंधित अपीलीय अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में नाम जोड़ने अथवा नहीं जोड़ने का निर्णय लेकर आवेदन निस्तारित किया जायेगा। वहीं उक्त प्रक्रिया में पूर्व से लंबित आवेदन भी निस्तारित किए जाएंगे। पुराने आवेदनकर्ता को पुनः आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

Panchayati Raj: पंचायतीराज में उपचुनाव के लिए कार्यक्रम घोषित

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राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य की पंचायतीराज संस्थाओं में विभिन्न कारणों से रिक्त हुए जिला प्रमुख के 3, प्रधान के 1, उप प्रधान के 1, जिला परिषद सदस्य के 4, पंचायत समिति सदस्य के 18, सरपंच के 20, उपसरपंच के 15 एवं पंच के 143 पदों पर उपचुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। निर्वाचन की अधिसूचना जारी करने की तिथि 29 जनवरी होगी और नाम निर्देशन पत्र 3 फरवरी को प्रातः 11 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक प्रस्तुत किये जा सकेंगे। नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 5 फरवरी को प्रात: 11 बजे से होगी। नाम वापसी की तिथि 6 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक होगी एवं चुनाव प्रतीकों का आवंटन एवं चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन इसी दिन नाम वापसी का समय समाप्त होने के तुरंत पश्चात् होगा। मतदान 14 फरवरी को प्रात: 8 बजे से सायं 5 बजे तक होगा। मतगणना 15 फरवरी को प्रातः 9 बजे से होगी। वहीं जिला प्रमुख एवं प्रधान के लिए मतदान 16 फरवरी को होगा तथा उपप्रधान के लिए मतदान की तिथि 17 फरवरी को रखी गई है। सरपंच एवं पंच के लिए 29 जनवरी को लोक सूचना जारी की जायेगी तथा नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की तिथि 5 फरवरी को होगी। नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 6 फरवरी को की जायेगी तथा नाम वापसी की अंतिम तिथि 6 फरवरी को दोपहर 3 बजे तक रखी गई है। चुनाव प्रतीकों का आवंटन एवं चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची का प्रकाशन नाम वापसी का समय समाप्त होने के तुरंत पश्चात होगा। मतदान 14 फरवरी को प्रात: 8 बजे से सायं 5 बजे तक होगा। ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मतगणना इसी दिन मतदान समाप्ति के तुरंत पश्चात् आरंभ हो जायेगी। उपसरपंच के लिए 15 फरवरी को प्रात: 9 बजे से पहले बैठक हेतु नोटिस जारी किया जायेगा, बैठक प्रात: 10 बजे से आरंभ होगी। 11 बजे तक नाम निर्देशन पत्र/प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण होगा एवं ​नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 11:30 बजे तक होगी। चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची एवं चुनाव चिन्हों का आवंटन प्रात: 11:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा। आवश्यक होने पर मतदान दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच किया जायेगा एवं मतगणना व परिणाम की घोषणा मतदान समाप्ति के तुरंत पश्चात कर दी जायेगी। राजस्थान राज्य के लगभग सभी मतदाताओं को मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) जारी हो चुके हैं। मतदान के दौरान मतदाताओं को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी उक्त फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। फिर भी यदि कोई मतदाता किसी भी कारण से फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करने में असमर्थ रहता है तो मतदान के लिए उसे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमोदित किए गए 12 वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। इन दस्तावेजों में आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राईविंग लाईसेंस, आयकर पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, सांसदों, विधानसभा सदस्यों को जारी किए गए सरकारी पहचान पत्र, केन्द्र सरकार/राज्य सरकार, राज्य पब्लिक लिमिटेड कम्पनी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए जाने वाले फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी फोटोयुक्त स्वास्थ्य बीमा योजना स्मार्ट कार्ड, फोटो युक्त पेंशन दस्तावेज जैसे कि भूतपूर्व सैनिक पेंशन बुक/पेशन अदायगी आदेश/भूतपूर्व सैनिक विधवा/आश्रित प्रमाण पत्र/वृद्धावस्था पेंशन आदेश/विधवा पेंशन ओदश, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी फोटोयुक्त छात्र पहचान पत्र, सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी फोटो युक्त शारीरिक विकलांगता प्रमाण-पत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/सहकारी बैंक/डाकघर द्वारा जारी फोटो युक्त पासबुक शामिल हैं। उप चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता के प्रावधान तुरन्त प्रभाव से लागू हो गए है, जो चुनाव प्रक्रिया समाप्ति तक लागू रहेंगे।

Village News: प्रदेश में 5897 गांव अभावग्रस्त

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संवेदनशील निर्णय लेते हुए खरीफ सीजन में बाढ़ और ओलावृष्टि से प्रभावित 21 जिलों के किसानों को एसडीआरएफ से कृषि आदान अनुदान वितरण करने की मंजूरी दी है। इसके लिए 20 जिलों के 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल खराबे वाले 5897 गांव अभावग्रस्त घोषित किए गए हैं। मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील निर्णय से प्रभावित किसानों को बड़ा संबल मिलेगा। इस निर्णय के उपरान्त अब आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग द्वारा इस बारे में अधिसूचना जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मानसून वर्ष 2024 (संवत् 2081) में बाढ़ और ओलावृष्टि से खरीफ फसलों के खराबे के आकलन के लिए गिरदावरी के निर्देश दिए थे और जिला कलक्टरों से प्राप्त की नियमित गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इन निर्णय के अनुसार प्रदेश के बून्दी जिले के 486, नागौर जिले के 67, धौलपुर जिले के 58, झालावाड़ जिले के 61, सवाई माधोपुर के 2, बारां के 1, अजमेर के 592, भरतपुर के 418, कोटा के 345, टोंक के 865, बीकानेर के 45, बांसवाड़ा के 817, बालोतरा के 10, फलौदी के 207, पाली के 155, हनुमानगढ़ के 49, डीग के 258, जोधपुर के 262, ब्यावर के 626, भीलवाड़ा के 564 एवं हनुमानगढ़ जिले के 9 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया गया है। इन गांवों में खराबे से प्रभावित किसानों को एसडीआरएफ नॉर्म्स के अनुसार कृषि आदान अनुदान वितरण किया जाएगा। साथ ही, श्रीगंगानगर के 2 गांवों में 33 प्रतिशत से अधिक फसल खराबे वाले व्यक्तिगत कृषकों को कृषि आदान अनुदान भुगतान वितरण की अनुमति प्रदान की गई है।

Agricultural News: प्रदेश में 7 करोड़ रुपये से होगा कृषि उपज मंडियों का विकास

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय को दोगुना कर उनके जीवन को समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री ने राज्य की विभिन्न कृषि उपज मंडी समितियों में आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए 7 करोड़ 23 लाख रूपये से अधिक की लागत के नवीन निर्माण कार्यों एवं विद्युतीकरण संबंधी कार्यों को मंजूरी दी है। वहीं उपज मंडी समिति पीलीबंगा (हनुमानगढ़) के उप मंडी यार्ड जाखड़ावाली में नवीन निर्माण कार्यों हेतु 3 करोड़ 53 लाख रुपए, कृषि उपज मंडी जोधपुर (फ.स.) में नवीन सब्जी मंडी प्रांगण, भदवासिया में पुरानी सीवर लाइन परिवर्तन एवं कार्यालय भवन के विस्तार हेतु 2 करोड़ 16 लाख रुपए एवं विद्युत संबंधी कार्यों के लिए 11 लाख 85 हजार रूपए की मंजूरी दी है। इसी तरह कृषि उपज मंडी, बीकानेर में मंडी प्रांगण में सर्विस कनेक्शन एवं स्ट्रीट लाइट कार्य के लिए 38 लाख 77 हजार रुपए एवं मिनी फूड पार्क हेतु आवंटित भूमि के चारो और वायर फेसिंग के लिए 52 लाख 80 हजार रूपए तथा कृषि उपज मंडी कोटा (अनाज) में नवीन कार्यों के लिए 50.09 लाख रूपए की स्वीकृति जारी की गई है। मुख्यमंत्री ने कृषि विपणन विभाग द्वारा निर्मित सड़कों की मरम्मत और रखरखाव कार्यों संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। जिसके बाद कृषि विपणन विभाग द्वारा निर्मित सम्पर्क सड़कों का मरम्मत एवं रखरखाव कार्य अब कृषि विपणन बोर्ड द्वारा करवाया जाएगा और इसके लिए मंडी समितियों की सकल बचत की 5 प्रतिशत राशि का उपयोग किया जा सकेगा।