RAILWAYSराजस्थान राई का बाग पैलेस जंक्शन रेलवे स्टेशन का नाम बदला ◆ अब इस स्टेशन को “राईका बाग पैलेस जंक्शन” के नाम से जाना जाएगा

राजस्थान राई का बाग पैलेस जंक्शन रेलवे स्टेशन का नाम बदला 09-08-2024 ◆ अब इस स्टेशन को “राईका बाग पैलेस जंक्शन” के नाम से जाना जाएगा HAR GHAR, TIRANGa

DLB नगर परिषद की अनदेखी !!!

मकराना :DLB नगर परिषद की अनदेखी !!!   सरकारी काम में लापरवाही – सूरज को दिया दिखाने का प्रयास HAR GHAR, TIRANGa

Chief Minister Bhajan Lal Sharma’s love for the national bird peacock —मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का राष्ट्रीय पक्षी मोर के प्रति प्रेम

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का राष्ट्रीय पक्षी मोर के प्रति प्रेम

Chief Minister Bhajan Lal Sharma's love for the national bird peacock

सौंदर्य, प्रेम और स्नेह का प्रतीक है, राष्ट्रीय पक्षी मोर। सनातन धर्म में मोर को भगवान श्रीकृष्ण की परछाई के रूप में भी जाना जाता है।

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‘PM e-bus service’ —प्रदेश में जल्द शुरू होगी ‘पीएम ई-बस सेवा’

‘पीएम ई-बस सेवा’ को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने और आमजन को सुगम-प्रदूषण मुक्त सफर देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के विशेष प्रयासों से पहले की गई 500 बसों के अतिरिक्त अब 175 इलेक्ट्रिक बसों का आवंटन किया गया है। इसी कड़ी में स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने निदेशालय में विभागीय अधिकारियों और स्थानीय निकायों के आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों के साथ चर्चा की। श्री रविकांत ने बताया कि पहले केंद्र से 500 इलेक्ट्रिक बसें मिली थी, लेकिन अब 175 अतिरिक्त बसों का और आवंटन किया गया है। जिसके तहत अजमेर को 50, जोधपुर को 50, कोटा को 50 और बीकानेर को 25 इलेक्ट्रिक बसों का आवंटन किया गया है। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को जल्द किया जाए डेवलप प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए डिस्काॅम्स के साथ चर्चा की जाए और पावर लाइन्स के लिए समन्वय के साथ उन्हें जल्द से जल्द डेवलप किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी कमिश्नर भूमि का मौका मुयाअना खुद करें और फील्ड में जाकर साइट्स को देखें, ताकि भूमि आवंटन संबंधी प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके। उन्होने ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए शहरों में खासतौर पर भीड़ वाले इलाकों को चिह्नित किया जाए और बेस्ट रूट्स की पहचान की जाए, ताकि लोगों के सफर को सुगम बनाया जा सके। उन्होने कहा कि ऐसे में प्रोजेक्ट के साथ ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन स्पेशलिस्ट जैसे एक्स्पर्ट्स को भी जोड़कर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि निदेशालय स्तर पर शहरी ट्रांसपोर्ट सेल बनाई जाए, जो प्रोजेक्ट की सघन माॅनिटरिंग करे और पाॅलिसी लेवल मुद्दों पर अपनी राय रखे। उन्होंने नाॅन फेयर रेवेन्यू जैसे शाॅप्स आदि के लिए भी प्लान बनाने के लिए निर्देश दिए।

RAJASTHAN GOVT गहलोत सरकार द्वारा बनाए गए छोटे जिले खत्म होंगे।

AJMER : भजनलाल सरकार ने भुगतान करने और काम करवाने का अधिकार पुराने जिले के कलेक्टर्स को दिया। इसमें अजमेर को विभाजित करके बनाए गए ब्यावर और केकड़ी जिला भी शामिल। जिलों की समीक्षा के लिए सरकार पहले ही बना चुकी है मंत्रियों की कमेटी। चुनाव के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद नए जिलों की समीक्षा की जाएगी। चुनावी लाभ के लिए गहलोत ने किया था फैसला और बना दिए थे एक साथ 17 जिले। इनमें तीन तहसीलों वाला दूदू जिला भी शामिल।

marble city makrana सड़क पर बह रहा गाँव का गंदा पानी, आम लोगो का हुआ बुरा हाल ।

मकराना :  जुसरी पंचायत मुख्यालय की मुख्य सड़क पर गाँव का गंदा पानी सालों से बह रहा है इस वजह से गाँव के प्रवेश द्वार पर आवागमन हुआ बेहाल ।। उपखंड के सबसे नजदीक जुसरी गाँव के मुख्य सड़क पर नाली का गंदा पानी सालों से बह रहा है इस वजह से आवागमन व स्कूली बच्चो का जीना मुहाल है , सड़ांध, बदबू और मच्छरों का प्रकोप से रहना खाना पीना व सोना मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चो व पैदल चलने वालों लोगो को भारी फजीहत उठानी पड़ रही है । पवित्र सावन के माह में ही शिव भक्तों को इसी से गुजरना पड़ा । इस मार्ग से मिडकिया ,जुसरिया , बुड़सु , कुचामन मकराना रेल्वे स्टेशन आदि दर्जनों गांवों के लोगो का दिन रात आना जाना लगा रहता है । ग्रामीणों ने बताया कि गाँव का गंदा पानी रोड़ पर नही आना चाहिए गाँव मे ही सोखता गड्ढा बना कर समुचित उपाय किया जाना चाहिए । बार बार शिकायत करने पर भी पंचायत व ब्लॉक लेवल के अधिकारी व जनप्रतिनिधियों से कई सालों से गुहार जाने के बाद भी यही स्थिति है ।

Sewerage treatment plants in multi-storey buildings —बहुमंजिला भवनों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने पर ही किया जाएगा पेयजल कनेक्शन —जलदाय सचिव

जलदाय सचिव समित शर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा बहुमंजिला भवनों में पेयजल कनेक्शन जारी किये जाने की नीति दिनांक 24.04.2024 के बिन्दु संख्या 24 के अनुसार राजस्थान भवन विनियम 2020 के प्रावधानों के अनुसार अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग प्रणाली व सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लाट का निर्माण एवं कार्यात्मक किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसके अभाव में पेयजल कनेक्शन जारी नहीं किया जाएगा। शासन सचिव ने बताया कि परिशोधित अपशिष्ट जल का उपयोग राज्य सीवरेज एवं वेस्ट वॉटर नीति 2016 के अनुसार कृषि, उद्यान एवं सिंचाई कार्य, पार्क में बागवानी, सड़क की धुलाई एवं छिड़काव के कार्य, उद्योग एवं खनन कार्य, मनोरंजन तालाब और झील,सामाजिक वानिकी,निर्माण कार्य गतिविधियॉ,अग्निशमन व अन्य नगर निकाय कार्य, रेलवे,थर्मल पॉवर प्लांट,छावनी क्षेत्र आदि के कार्य अनुमत किये है। samit-sharma श्री शर्मा ने बताया कि 2500 वर्ग मीटर अथवा ज्यादा क्षेत्रफल के भवनों में पेयजल कनेक्शन स्वीकृति की प्रक्रिया में और रसोई के अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण एवं रिसाईकिलिंग एवं पुनः उपयोग प्रणाली का निर्माण एवं कार्यात्मक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि योजना क्षेत्र अथवा एकल भू-खण्ड पर 10 हजार वर्ग मीटर से अधिक सकल निर्मित क्षेत्र होने पर अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण हेतु सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट स्थापित किया जाना एवं कार्यात्मक होना अनिवार्य है। विभागीय अभियन्ता के प्रमाणीकरण उपरान्त ही पेयजल कनेक्शन जारी होगा। सचिव ने बताया कि पेयजल कनेक्शन हेतु स्वीकृति प्रक्रिया में वर्षा जल पुनर्भरण संरचना प्रणाली के निर्माण, अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण एवं पुनः उपयोग प्रणाली तथा सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट का निर्माण एवं कार्यात्मक होने का सम्बन्धित कनिष्ठ अभियन्ता द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में 100 प्रतिशत निरीक्षण कर प्रमाणीकरण किया जाएगा। सहायक अभियन्ता अपने क्षेत्राधिकार में 40 प्रतिशत, अधिशाषी अभियन्ता अपने क्षेत्राधिकार में 5 प्रतिशत एंव अधीक्षण अभियन्ता अपने क्षेत्राधिकार में 2 प्रतिशत पेयजल कनेवशन आवेदनों पर निरीक्षण कर प्रमाणीकरण सुनिश्चित करेंगे। प्रमाणीकरण पेयजल कनेक्शन आवेदन पत्रावली में संलग्न करना आवश्यक होगा।

It is mandatory to have sewerage treatment plant in large land areas of the state —प्रदेश बड़े भू-खण्ड़ों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य —मंत्री कन्हैया लाल

प्रदेश में 2500 वर्गमीटर और उससे बड़े भू-खण्डों में स्नानागार व रसोई के अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण और रिसाईकिलिंग की व्यवस्था किया जाना आवश्यक होगा। इसमें शोचालय से निकलने वाला जल शामिल नहीं होगा। 10 हजार वर्ग मीटर से अधिक सकल निर्मित क्षेत्र होने पर अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण हेतु सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाना आवश्यक होगा। शोचालय में उपयोग में ली जाने वाली वॉटर क्लोजेट में ड्यूल फ्लश बटन वाले सिस्ट्रन ही अनुमत होगा। प्रदेश में जल की सीमित उपलब्धता को मध्यनजर रखते हुए अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग प्रणाली व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल विभाग और नगर विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने संयुक्त परिपत्र जारी किया है। PHDपर्यावरण संरक्षण हेतु भवन विनियम 2020 की विनियम 10.11.2 में अपशिष्ट जल शुद्धिकरण एवं रिसाईकिलिंग के आवश्यक प्रावधान किये गए है। उन्होंने बताया कि अपशिष्ट जल के परिशोधन की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की है। उपयोगकर्ता द्वारा आवेदन करने पर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित शहर स्तरीय समिति एवं पर्यावरण समिति परिशोधित जल के पुनः उपयोग के सम्बन्ध में वास्तविक उपयोगकर्ता की सलाह पर राज्य सीवरेज एवं वेस्ट वॉटर नीति 2016 में निर्धारित दरों पर निर्णय करने का प्रावधान है। —मंत्री कन्हैया लालचौधरी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल