Jaipur News: त्योहारों पर कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द से नहीं होगा कोई समझौता -जयपुर कलक्टर

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आगामी त्योहारों के मद्देनजर जिले में कानून व्यवस्था सुदृढ़ रखने और सांप्रदायिक सौहार्द व आपसी सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्तर पर समन्वय और संवाद कायम रखते हुए किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला शांति समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर ने विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने होली, रमजान, चेटीचंड, नवरात्रि, रामनवमी व ईद जैसे आगामी पर्वों के दौरान शांति, सौहार्द और भाईचारे का वातावरण बनाए रखने की अपील की।
कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र के मौजीज व्यक्तियों और धर्मगुरुओं के साथ निरंतर संवाद स्थापित रखा जाए। सभी पुलिस थानों में नियमित रूप से सीएलजी व शांति समिति की बैठकें आयोजित कर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए। संदिग्ध व्यक्तियों, स्थानों और भ्रामक व साम्प्रदायिक तनाव भड़काने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखते हुए उनके विरुद्ध विधि अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया की सतत् मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिये कि भ्रामक, अफवाह फैलाने वाले अथवा उत्तेजक पोस्ट करने वालों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। धार्मिक और  सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी अपील की गई कि वे आमजन को अफवाहों से सावधान रहने व सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करने के लिए जागरूक करें।
जिला कलक्टर ने पुलिस अधिकारियों को नाकाबंदी एवं गश्त व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य बाजारों, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य भीड़भाड़ एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस जाप्ता तैनात करने तथा संभावित तनावपूर्ण क्षेत्रों को चिन्हित कर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही, पुलिस विभाग, नगर निगम, विद्युत विभाग, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, नागरिक सुरक्षा विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को त्योहारों के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अतिरिक्त सतर्कता एवं समन्वय के साथ करने के निर्देश दिए गए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

Jaipur News: एसएमएस अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में लगी आग: सात वर्षीय बच्चा झुलसा

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राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल से लापरवाही और हादसे की एक डराने वाली खबर सामने आई है। अस्पताल के धनवंतरि ब्लॉक स्थित ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के दौरान अचानक एक मशीन में शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे ऑपरेशन टेबल पर लेटा सात वर्षीय मासूम बच्चा झुलस गया। इस घटना के बाद ओटी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सर्जरी रोककर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा— जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार दोपहर करीब तीन बजे की है। धनवंतरि ब्लॉक की तीसरी मंजिल पर स्थित ओटी में एक सात वर्षीय बच्चे के ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जा रही थी। ऑपरेशन के दौरान अचानक वहां उपयोग में ली जा रही एक मेडिकल मशीन में शॉर्ट सर्किट के कारण चिंगारी उठी, जिसकी चपेट में आने से बच्चे का बायां पैर झुलस गया। अचानक हुए इस हादसे से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया— मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. राशिम कटारिया ने बताया कि घटना के तुरंत बाद बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्होंने राहत की बात यह बताई कि बच्चा गंभीर रूप से नहीं झुलसा है और उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। डॉ. कटारिया के अनुसार, शॉर्ट सर्किट मशीन में तकनीकी खराबी के कारण हुआ था, जिसकी गहन जांच की जा रही है। सुरक्षा पर उठे सवाल— प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र के ऑपरेशन थिएटर में इस तरह की तकनीकी खराबी ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और उपकरणों के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, डॉक्टरों की तत्परता से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। अस्पताल प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी उपकरणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

Rajasthan Assembly News: राजसथान विधानसभा की निजता भंग— लोकतंत्र के मंदिर में ‘रील-बाज़ी’

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राजस्थान विधानसभा आज ‘लोकतंत्र का मंदिर’ कम और सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं का ‘शूटिंग स्टूडियो’ ज़्यादा लगने लगी है। जिस जगह की सुरक्षा के नाम पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ एक गैर-संवैधानिक व्यक्ति (शंकर गोरा) अपने हुजूम के साथ ऐसे टहलता है जैसे अपने घर के ड्राइंग रूम में घूम रहा हो। यह न केवल सुरक्षा में सेंध है, बल्कि उन सभी कायदे-कानूनों के मुँह पर तमाचा है जिनका हवाला देकर आम जनता को गेट के बाहर रोक दिया जाता है। सुरक्षा का मखौल या वीआईपी सर्कस— विधानसभा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी क्या केवल आम आदमी का गला पकड़ने के लिए हैं? जब एक रसूखदार नेता फोन लहराते हुए स्पीकर के ऑफिस तक घुस गया, तब सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या सो रहा था? यह वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि यहाँ ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘पहुँच का राज’ चलता है। अगर कल को कोई इसी तरह बिना रोक-टोक संवेदनशील दस्तावेज तक पहुँच जाए, तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
संविधान की किताब पर रसूख का जूता— अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) को इन नेताओं ने अपनी जागीर समझ लिया है। जब एक विधायक को भी सदन के भीतर फोन ले जाने पर टोक दिया जाता है, तो इस ‘रील-मंत्री’ को इतनी छूट कैसे मिली? मुख्यमंत्री जी, क्या आपका ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ केवल कागज़ों पर है? या फिर नियम सिर्फ उनके लिए हैं जिनके पास सत्ता का झंडा नहीं है? यह समानता नहीं, सरेआम संवैधानिक डकैती है। स्पीकर की कुर्सी की गिरती साख— वासुदेव देवनानी जी, आपकी नाक के नीचे विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर ‘भौकाल’ टाइट करने के लिए हो रहा है। यह आपकी नैतिक हार है। यदि आप अपने कार्यालय की गरिमा नहीं बचा सकते, तो पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की उम्मीद करना बेमानी है। यह वीडियो एक चेतावनी है कि राजनीति ने संवैधानिक मर्यादाओं को निगल लिया है। जनता के साथ गद्दारी— आम आदमी जिस विधानसभा को अपनी आवाज़ का केंद्र मानता है, उसे आज कुछ छुटभैये नेताओं ने अपनी निजी संपत्ति बना लिया है। यह रील बनाना लोकतंत्र का सम्मान नहीं, बल्कि जनता के टैक्स से बने संस्थानों का अपमान है। यह ‘सत्ता का नशा’ है जो मर्यादा और कानून के बीच का फर्क भूल चुका है। यह वीडियो वायरल होना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि राजस्थान के प्रशासनिक और संवैधानिक तंत्र की बर्बादी का सबूत है। अगर आज इन ‘रील-बाजों’ पर एफआईआर नहीं होती, तो समझ लीजिए कि राजस्थान विधानसभा अब जनता की नहीं, बल्कि कुछ खास चेहरों की जागीर बन चुकी है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने दी 46 हजार करोड़ की 10 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी

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राजस्थान को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में भजनलाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट की छठी बैठक में प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाले महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने राजस्थान में 46,000 करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की 10 अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को कस्टमाइज्ड पैकेज देने की मंजूरी प्रदान की। इस निवेश से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12,000 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इन सेक्टर्स को मिलेगा बढ़ावा— बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोलर मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सीमेंट, माइंस, मिनरल्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल, टैक्सटाइल और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत विशेष रियायतें दी गई हैं। नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश— मुख्यमंत्री ने निवेश के धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि जिन कंपनियों को कस्टमाइज्ड पैकेज और रिप्स परिलाभ दिए गए हैं, उनके निवेश की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल एमओयू करना नहीं, बल्कि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से शुरू करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की राजस्व वृद्धि के साथ-साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कैबिनेट के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।

C S NEWS: राजस्थान में “लाइसेंस राज” खत्म करने के लिये मुख्य सचिव ने केन्द्र को लिखा पत्र 

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को केन्द्रीय केबिनेट सचिव  टी. वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर राजस्थान में कम्पलायंस रिडक्शन एंड डीरेग्यूलेशन के दूसरे चरण की तैयारियों की जानकारी दी है। पत्र में मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने जिन 28 प्राथमिकता /वैकल्पिक प्राथमिकता क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें निवेश प्रोत्साहन ब्यूरो (बीआईपी), उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, राजस्व, एलएसजी, यूडीएच, रीको तथा श्रम, उद्योग, पर्यटन, प्रशासनिक सुधार विभाग, ऊर्जा व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के बिन्दु शामिल हैं। केन्द्रीय केबिनेट सचिवालय ने कम्पलायंस रिडक्शन एंड डीरेग्यूलेशन के फेज—2 के लिए 23 प्राथमिकता क्षेत्र और 5 वैकल्पिक प्राथमिकता क्षेत्र निर्धारित किए हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि लाइसेंस की जरूरत को कम से कम करना, विभिन्न विभागों के द्वारा जारी लाइसेंस को जहां तक हो सके, एकीकृत कर सिंगल विंडो के माध्यम से उपलब्ध करवाना, निरीक्षण को कम से कम करना, स्व-सत्यापन को बढ़ावा देना, डिजिटाइजेशन, कर-निश्चितता व निवेशकों की पहुँच बढ़ाना और मुकदमेबाजी में कमी पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देना जैसे सुधार दूसरे फेज में शामिल हैं इससे विकास और प्रगति को नया आधार मिलेगा। इन सुधारों पर अध्ययन चल रहा है।
नये प्रस्तावित सुधारों में मुख्य जोर लैंड यूज से जुड़ी प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर दिया गया करना है जिससे औद्योगिक इकाई शुरू करने में आसानी होगी, अपनी भूमि पर मकान, दुकान बनाने के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, विभिन्न विभागों से विभिन्न स्तर की फायर सेफ्टी, बिल्डिंग निर्माण, बिजली, पेयजल, घरेलू गैस सप्लाई सम्बंधी लाइसेंस नहीं लेना होगा।
प्रस्तावित कदमों में राज्य में औद्योगिक विकास का माहौल बनाने के लिए व अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई, सेट बैक के नियमों में शिथिलन दिया जाएगा। ‘एवरीथिंग इज परमिटेड अनटिल प्रोहिबिटेड’ सिद्धान्त को मूल बिन्दु बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत यदि कृषि भूमि का प्रस्तावित उपयोग (गैर कृषि भूमि में) मास्टर प्लान में अनुमत है तो कन्वर्जन जरूरी नहीं रह जाएगा। शहरों के विभिन्न जोन का प्लान तैयार होगा जिसमें न्यूनतम नेगेटिव लिस्ट होगी यानी आवासीय क्षेत्र में वाणिज्यिक उपयोग और वाणिज्यिक क्षेत्र में आवासीय उपयोग की प्रक्रिया आसान होगी। इससे श्रम शक्ति को अपने कार्यस्थल के आसपास ही आवास उपलब्ध होगा, ट्रैफिक और प्रदूषण से निजात भी मिलेगी।

RGHS NEWS: आरजीएचएस में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई, सात चिकित्सक निलंबित

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लगातार सुदृढ़ बनाया जा रहा है। योजना में अनियमितताएं करने वाले अस्पतालों, फार्मेसी स्टोर एवं कार्मिकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने अनियमितता करने पर 7 चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना के सुचारू संचालन की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में आॅडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थापित 7 चिकित्सकों को निलंबित किया गया है। मेडिकल कॉलेज सीकर में कार्यरत अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, डॉ. सुनील कुमार ढाका, जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य डॉ. मुकेश वर्मा, सीएचसी किरवा के डॉ. राकेश कुमार, एसके अस्पताल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एसएस राठौड़ और डॉ. सुनील शर्मा को निलंबित किया गया है। वहीं योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम व बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एण्ड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है।
 
लाभार्थियों के कार्ड का दुरूपयोग कर उठाए फर्जी क्लेम—
 राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुँचाई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया। दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुँची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।
बिना जरूरत के की गई जांचें—
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर, बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।
चिकित्सकों के नाम एवं सील फर्जी—
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम एवं सील दर्शाए गए हैं, उनमें से कई पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था।

पीएम सूर्यघर योजना में इस वर्ष इंस्टॉलेशन दोगुना करना डिस्कॉम्स का लक्ष्य, सुगमता से ऋण प्रदान कर बैंक निभाएं सहभागिता -चेयरमैन डिस्कॉम्स

चेयरमैन डिस्कॉम्स सुश्री आरती डोगरा ने पीएम सूर्य घर योजना के अन्तर्गत रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों के इंस्टॉलेशन में प्रदेश को अग्रणी बनाने के मिशन में बैंकर्स से सहभागिता निभाने का आग्रह किया है। सुश्री डोगरा ने कहा कि इस योजना में राजस्थान देश का 5वां अग्रणी राज्य है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 42 हजार से अधिक रूफ टॉप सोलर स्थापित किए जा चुके हैं। फिलहाल प्रतिमाह औसतन लगभग 14 हजार रूफ टॉप सोलर लगाए जा रहे हैं। डिस्कॉम्स का लक्ष्य इस वर्ष इसे बढ़ाकर दोगुना करने का है। सुश्री डोगरा शुक्रवार को विद्युत भवन में विभिन्न बैंक प्रतिनिधियों के साथ पीएम सूर्यघर योजना में रूफ टॉप सोलर लगाने के इच्छुक आवेदकों को सुगमता से ऋण प्रदान करने के संबंध में चर्चा कर रही थीं। जोधपुर एवं अजमेर डिस्काम के प्रबंध निदेशक, सभी अधीक्षण अभियन्ता (ओ एण्ड एम) वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस बैठक से जुडे़।
चेयरमैन डिस्कॉम्स ने बैंकर्स से भारत सरकार की ओर से बैंकों को इस संबंध में समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन निर्देशों की निचले स्तर तक पालना सुनिश्चित की जाए। अनावश्यक दस्तावेज, गारंटर चैक, पट्टा, प्रक्रिया आदि के कारण आवेदनों को अटकाया नहीं जाए। उन्होंने सभी अधीक्षण अभियंताओं को जिला कलेक्टरों के स्तर पर होने वाली जिला स्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में भी आसान ऋण प्रक्रिया सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि पीएम सूर्यघर योजना के अन्तर्गत भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा योजना के पोर्टल में 30 बैंकों को ऋण प्रदान करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। प्रदेश में कुल आवेदकों में से सर्वाधिक 47 प्रतिशत आवेदक ऋण के लिए भारतीय स्टेट बैंक के समक्ष आवेदन करते हैं। इसके पश्चात् पंजाब नेशनल बैंक से 12 प्रतिशत, बैंक ऑफ बड़ोदा से 11 प्रतिशत तथा राजस्थान ग्रामीण बैंक से 8 प्रतिशत आवेदक लोन के लिए आवेदन करते हैं। यह भी बताया गया कि रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्र की प्रोजेक्ट लागत का 90 प्रतिशत तक ऋण सुविधा देय है। जिस पर वर्तमान में 6 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जा रहा है। बैंक प्रतिनिधियों ने इंस्टॉलेशन में अपनी ओर से पूर्ण सहयोग के लिए डिस्कॉम्स को पूर्ण आश्वस्त किया।

CS NEWS: 2027 तक राज्य की सभी सेवाएं होगी ऑनलाइन -मुख्य सचिव 

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा है कि सफल प्रशासनिक मॉडल की तर्ज पर प्रदेश में जन-केंद्रित सुशासन का ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा, जो फ्यूचर रेडी, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस वाला, अधिक जवाबदेह और आमजन को सशक्त बनाने वाला हो।
मुख्य सचिव गुरुवार को शासन सचिवालय में ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विज़न के प्रभावी क्रियान्वयन शासन  और प्रणाली को अधिक समन्वित एवं परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से गठित सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज के ग्रुप 6— ‘शासन एवं प्रोद्यौगिकी’ की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में आगामी तीन माह में कार्यालय प्रक्रिया नियमावली की व्यापक समीक्षा क रने के निर्देश दिए ताकि शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया जा सके। बैठक में वर्ष 2027 तक राज्य की सभी सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि नेक्स्ट जनरेशन एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के तहत केंद्र सरकार की तर्ज पर चिंतन शिविर आयोजित किए जाएं। इनमें न्यायालयीन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण, फाइल मूवमेंट में अनावश्यक विलंब की रोकथाम  के लिए हर स्तर पर न्यूनतम समय में निष्पादन/फॉरवर्ड व्यवस्था, इस प्रक्रिया के चरणों को कम से कम करते हुए सुशासन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तथा सेवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाए।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के सफल मॉडल का अनुसरण करते हुए राज्य स्तर पर सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज (SGoS) की अवधारणा लागू की है। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित जन-केंद्रित सुशासन की भावना से प्रेरित है, जिसमें शासन का केंद्र बिंदु आमजन की आवश्यकताएँ, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं दक्ष सेवा वितरण है।

Rajasthan News: गूगल सर्च के टॉप रिजल्ट में छुपा है ठगी का जाल—डीजीपी 

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यदि आप अपने वाहन के लिए NHAI FASTag का एनुअल पास बनवाने की सोच रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। साइबर ठगों ने अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की हुबहू नकल कर लोगों को ठगने का नया तरीका ढूंढ निकाला है। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम संजय अग्रवाल ने एडवाइजरी जारी करते हुए आमजन को इस नए फिशिंग स्कैम के प्रति आगाह किया है।
डीजीपी अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर बेहद शातिर हो गए हैं। ये ठग Google Ads और SEO का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को सर्च इंजन में सबसे ऊपर (Rank 1) दिखा रहे हैं। आम तौर पर लोग गूगल पर आने वाले पहले लिंक को असली मान लेते हैं, जबकि अपराधी पैसे देकर अपनी फर्जी साइट को Sponsored टैग के साथ ऊपर दिखाते हैं। इन वेबसाइटों का डिजाइन और लोगो असली NHAI पोर्टल जैसा ही होता है, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
एडवाइजरी के अनुसार ये फर्जी वेबसाइटें वार्षिक पास के लिए करीब 3000 रुपये के भुगतान की मांग करती हैं। पेमेंट के लिए वहां एक क्यूआर कोड दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे स्कैन करता है, पैसा सरकारी खाते में जाने के बजाय अपराधियों के म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भुगतान कभी भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं मांगे जाते।
 असली और नकली की पहचान: इन बातों का रखें खास ख्याल—
 —आधिकारिक प्लेटफॉर्म: पास खरीदने या रिन्यू करने के लिए केवल Rajmarg Yatra आधिकारिक ऐप या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही उपयोग करें।
—URL को गौर से देखें: annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध लिंक से बचें।
—प्राप्तकर्ता का नाम जांचें: यदि स्कैन करते समय व्यक्तिगत नाम “सरिता देवी” या किसी अन्य व्यक्ति का नाम आए, तो तुरंत रुक जाएं।
—सजग रहे: ऑनलाइन भुगतान करते समय विशेष सावधानी बरते और किसी भी संदिग्ध लिंग के माध्यम से अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर ना करें।
ठगी होने पर तुरंत यहाँ करें शिकायत—
यदि आप इस तरह के किसी स्कैम में फंस जाते हैं, तो समय गंवाए बिना तुरंत कार्रवाई करें। आप साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान पुलिस के विशेष हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 या 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। अपनी शिकायत आप भारत सरकार के पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करवा सकते हैं।

Rajasthan News: पुलिस मुख्यालय में विशेष बैठक— पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा पर हुई चर्चा

राज्य में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता प्रबंधों को सुनिश्चित करने और पर्यटकों की यात्रा को सरल व सुगम बनाने की दृष्टि से गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में गुरूवार को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में पुलिस व पर्यटन विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए पुलिस, प्रशासन व पर्यटन विभाग में समन्वय स्थापित करते हुए पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बेहतर व्यवस्थाओं के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। श्री शर्मा ने बैठक में राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए पर्यटन स्थलों पर स्थापित पर्यटक सहायता बल (टीएएफ) को और सुदृढ़ करने, पर्यटन थानों की संख्या बढ़ाने और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए अपेक्षित पुलिस बल लगाने और इन्हें उचित प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए।
उन्होंने हाल ही में पर्यटन विकास के लिए बजट में दी गई स्वीकृति पर कार्ययोजना तैयार करने व पर्यटन स्थलों पर विशेष त्यौहारों, मेलों के साथ—साथ सामयिक आयोजनों में भी पर्यटन विभाग की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य भर के विभिन्न धार्मिक पर्यटन स्थलों यथा खाटू श्यामजी, मेहंदीपुर बालाजी, सालासर बालाजी, रामदेवरा, गोगामेड़ी, पुष्करजी, श्रीनाथद्वारा, सांवरियाजी आदि में कुशल प्रबंधन के लिए देवस्थान, पुलिस व प्रशासन मिलकर कार्य करें और पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्थाएं करें।
बैठक में डीजी (ट्रेफिक) अनिल पालीवाल ने पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं के साथ—साथ विभिन्न दूतावासों से संपर्क कर पर्यटन आमंत्रण की बात कही। आईजी अजयपाल लांबा ने डीजी—आईजी कांफ्रेंस में माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए राज्य के पर्यटन स्थलों पर अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारियों को नियोजित करने, एक ही स्थान पर समस्त सरकारी कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, पर्यटन स्थलों पर अधिकाधिक सीसीटीवी कवरेज करने, पांच डेस्टिनेशन जहां सबसे ज्यादा ट्यूरिस्ट आते हैं वहां पर्यटन थाना बनाने, ट्यूरिज्म के नेशनल पोर्टल पर राज्यों के पोर्टल को लिंक करने आदि के सुझावों की जानकारी दी।
बैठक के आरंभ में पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन आयुक्त श्रीमती रूकमणि रियाड ने पर्यटन स्थलों की वर्तमान स्थिति और यहां पर विभाग द्वारा पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए विभाग द्वारा तैयार की गई प्रचार सामग्री, बूथ डिजाइन, प्रशिक्षण इत्यादि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गत बैठक की अनुपालना में दिए गए निर्देशों की अनुपालना में टीएएफ और पुलिस समन्वय के लिए कालिका पेट्रोलिंग यूनिट को अपनी रूटिन पेट्रोलिंग दौरान टूरिस्ट साइट को भी कवर करने के लिए कहा गया है।
पर्यटकों को मिले सभी बेहतर सुविधाएं—
डीजीपी श्री शर्मा ने पूर्व बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप आमेर की केस स्टडी में आई अपेक्षाओं को समस्त पर्यटक स्थलों पर लागू करने की बात कही। उन्होंने सभी पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटकों को स्वच्छ वातावरण और आवागमन हेतु व्यवस्थित सड़क सुविधा के साथ-साथ पर्यटकों के लिए अपेक्षित सूचनाओं की उपलब्धता के संबंध में उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों के साथ-साथ रेल्वे स्टेशन, हवाई अड्डा और अन्य स्थानों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटक सहायता बूथ स्थापित हो जहां पर पर्यटक किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल संपर्क कर सकें। उन्होंने इस बूथ पर रोडमेप व समस्त सूचनाओं युक्त क्यूआर कोड व हेल्पलाईन नंबर स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अलग-अलग देशों से आने वाले पर्यटकों को पर्यटन स्थलों की जानकारी देने वाले विभिन्न भाषा वाले साईन बोर्ड लगाने के साथ-साथ विदेशी भाषाओं का कोर्स करने वाले युवक-युवतियों को बतौर लेग्वेज एक्सपर्ट्स नियुक्त करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने पर्यटकों की आकस्मिक चिकित्सा के लिए व्यवस्था भी उपलब्ध कराने व महिला पुलिसकार्मिकों व गाईड उपलब्ध कराने की बात कही।