Rajasthan News: सवाई माधोपुर में लगेगा अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट कृषि मंत्री ने की घोषणा की

सवाई माधोपुर का अमरूद आने वाले दिनों में क्षेत्र के किसानों के मीवन में मिठास और खुशहाली लाएगा। राज्य सरकार जिले में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगवाएगी, जिससे देश-विदेश में इस फल और इससे बने उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसान की आय बढ़ेगी। देश में पहली बार आयोजित अमरूद महोत्सव इसी दिशा में प्रयासों का पहला कदम है। इसके सुखद परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने रविवार को सवाई माधोपुर के दशहरा मैदान में अमरूद महोत्सव का उद्घाटन किया। महोत्सव में बिरला ने कहा कि देश में पहली बार अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसानों, कृषि उत्पाद व्यापारियों और कृषि यंत्र व तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को साझा मंच उपलब्ध कराया गया है ताकि वे अपने अनुभवों को साझा कर इस क्षेत्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकें। वहीं मीणा ने सवाई माधोपुर में अमरूद का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगाने की घोषणा की है और कहा कि जब किसी कृषि उत्पाद का संवर्धन होता है, तभी किसान की वास्तविक आय बढ़ती है। इस प्रकार यह आयोजन क्षेत्र के अमरूद के किसानों की जिन्दगी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही सवाई माधोपुर में 150 करोड़ रुपये की लागत से अमरूद प्रोसेसिंग प्लान्ट स्थापित करेगी। राजस्थान में कुल 14 हजार हैक्टेयर अमरूद के बगीचों में से 11 हजार हैक्टेयर अकेले इस जिले में हैं। सवाई माधोपुर का अमरूद यहीं पर खपने की जिम्मेदारी श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पूरी सरकार की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों का काफी नुकसान हुआ। इससे बचाव के लिए सूरवाल बांध के पानी को बनास नदी में छोड़ने के लिए 110 करोड़ रुपये की लागत से एक चैनल बनाया जाएगा। किसान एक दूसरे से संवाद करें, योजनाओं का लाभ लें।

JLF 2026: तीसरे दिन साहित्य पर भारी पड़ा कुप्रबंधन

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन शनिवार को होटल क्लार्क्स आमेर और जवाहर लाल नेहरू (JLN) मार्ग पर जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन के ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों और आयोजकों की ‘विश्व स्तरीय’ व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्रशासन की लाचारी: एम्बुलेंस फंसी, जनता त्रस्त — शहर के मुख्य मार्ग JLN मार्ग पर फेस्टिवल, आर्मी डे परेड और वीवीआईपी मूवमेंट के चलते घंटों लंबा जाम लगा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ने भी सोशल मीडिया पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि जयपुर की जनता ‘ट्रैफिक के नरक’ में फंसी है। सबसे शर्मनाक स्थिति तब रही जब गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस अस्पताल के पास ही घंटों जाम में रेंगती नजर आईं। प्रशासन का ‘ट्रैफिक प्लान’ केवल वीवीआईपी गाड़ियों को रास्ता देने तक सीमित रहा। आयोजकों का ‘मुनाफा तंत्र’ और आम पाठकों की अनदेखी — आयोजकों पर आरोप है कि उन्होंने क्षमता से अधिक रजिस्ट्रेशन और पास जारी कर दिए, जिसके कारण होटल परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। सुरक्षाकर्मियों ने ‘भीड़ नियंत्रण’ के नाम पर कई बार गेट बंद किए, जिससे दूर-दराज से आए साहित्य प्रेमी और वैध पास धारक भी बाहर चिलचिलाती धूप में घंटों परेशान होते रहे। आयोजन अब किताबों का उत्सव कम और ‘कॉर्पोरेट इवेंट’ ज्यादा नजर आ रहा है। सुविधा के नाम पर ‘सन्नाटा’ — भीड़ का आलम यह था कि मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गए, जिससे डिजिटल पेमेंट से लेकर अपनों से संपर्क करना तक मुहाल हो गया। फूड स्टॉल्स पर खाने-पीने की चीजों के दाम ‘आसमान’ छू रहे थे, जिसे लेकर दर्शकों ने आयोजकों के खिलाफ भारी नाराजगी जताई। लेखकों और वक्ताओं के सत्रों में बैठने की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कई बुजुर्ग पाठक जमीन पर बैठकर या खड़े होकर सत्र सुनने को मजबूर हुए। ‘सेल्फी कल्चर’ को बढ़ावा, साहित्य हाशिए पर — गंभीर साहित्य चर्चा के बीच आयोजकों ने जिस तरह से ‘ग्लैमर’ और ‘सेल्फी पॉइंट्स’ को तरजीह दी है, उसने पुराने साहित्यानुरागियों को निराश किया है। मुख्य मंचों पर तकनीकी खराबी और साउंड सिस्टम की विफलता ने वक्ताओं के उत्साह पर पानी फेर दिया। कुल मिलाकर, JLF 2026 का तीसरा दिन आयोजकों की ‘भीड़ बटोरने’ की भूख और प्रशासन की ‘मूकदर्शक’ भूमिका की भेंट चढ़ गया।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने राज उन्नति की कि समीक्षा, कहा कोताही बरतने पर हो सख्त कार्रवाई

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ने शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राज उन्नति की प्रथम समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की 7 परियोजनाओं और 2 योजनाओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजनाओं और योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए निर्देशित किया। वहीं आमजन की परिवेदनाओं पर अधिकारियों से फीडबैक लेते हुए उन्हें राहत पहुंचाई। श्री शर्मा ने जिला कलक्टर्स को निर्देश दिए कि आमजन की परिवेदनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए उनका समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबित परिवादों के निस्तारण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजकीय विभागों और कार्यालयों में आमजन के कार्य पूर्ण पारदर्शिता के साथ किए जाएं। श्री शर्मा ने जिला कलक्टर्स को विकास कार्यों में आवश्यक भू-आवंटन पर त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि आवंटन के बाद शीघ्र निविदा जारी कर कार्य प्रारंभ किया जाए। जिन स्थानों पर न्यूनतम मापदंडों के अनुरूप भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां चरणबद्ध रूप से क्रियान्विति की जाए। उन्होंने जिला कलक्टर्स एवं सचिवों को प्रोएक्टिव एप्रोच के साथ प्रकरणों के निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। पीएम सूर्यघर योजना में राजस्थान को बनाए सिरमौर— मुख्यमंत्री ने पीएम सूर्यघर 150 यूनिट मुफ्त बिजली योजना में अपेक्षित गति लाने के उद्देश्य से कैशलेस वैकल्पिक मॉडल पर शीघ्र कार्य करने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग एवं जिला कलक्टर्स आईईसी गतिविधियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करें। श्री शर्मा ने अधिकारियों को योजना में राजस्थान को सिरमौर बनाने के लिए निर्देशित किया। खराब ट्रांसफार्मर्स को तय सीमा में बदलें — श्री शर्मा ने अधिकारियों को जले हुए और खराब ट्रांसफार्मर्स को निर्धारित समय में बदलने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष योग्यजन पेंशनर्स का वार्षिक सत्यापन शत प्रतिशत शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रशासन को आवश्यक होने पर दिव्यांगजनों के घर जाने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने पालनहार योजना में पालनकर्ता एवं बच्चों के शत प्रतिशत वार्षिक सत्यापन सुनिश्चित करते हुए योजना में लंबित भुगतान को जारी करने के निर्देश भी दिए। हीरापुरा बस टर्मिनल हो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित — मुख्यमंत्री ने जयपुर के हीरापुरा बस टर्मिनल में बस रूटों के निर्धारण और यात्रियों के लिए शेड, पेयजल, पार्किंग सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जयपुर जिला कलक्टर, जयपुर विकास आयुक्त एवं जयपुर नगर निगम आयुक्त को बस टर्मिनल से सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के क्रम में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि बस टर्मिनल से रोडवेज एवं लोक परिवहन बसों का संचालन प्रारंभ हो चुका है तथा टैफिक कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है। परिवादों के निस्तारण का नियमित हो सत्यापन — मुख्यमंत्री ने राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन के चयनित परिवादियों से उनके परिवाद निस्तारण पर फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं का केन्द्र बिंदु है। अधिकारी पूरी जिम्मेदारी के साथ राजकीय दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि शासन सचिव, संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर्स राजस्थान सम्पर्क हेल्पलाइन पर प्राप्त परिवादों का नियमित सत्यापन करें। श्री शर्मा ने मुख्य सचिव को अधिकारियों के लिए सत्यापन के प्रकरणों की सीमा तय करने के लिए निर्देशित किया।

JLF 2026: ‘The Kumbh Mela of Literature’ or a ‘Corporate Spectacle’

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The JLF witnessed intellectual bankruptcy and a “circus-like” atmosphere. The organizers may be proud of the large turnout, but the truth is that 80 percent of the attendees were there only to create ‘Instagram Reels’ and take selfies with celebrities. Even during serious discussions between sessions, there was constant noise and laughter from the food stalls in the background. Is this a celebration of literature or the opening of a shopping mall? The Dictatorship of Wealthy and Influential Families in the Name of Literature: The organizers talk about ‘inclusivity,’ but in reality, the festival has become a clique of wealthy and influential families. Ordinary Hindi or regional language writers are marginalized, while writers who speak English with a ‘foreign accent’ are given preferential treatment. Velvet sofas for those with the ₹14,000 per day ‘Friend of the Festival’ passes and a stony ground for the average literature lover—this is the organizers’ idea of ​​’democracy’. Recycling of Ideas, Nothing New: William Dalrymple and Namita Gokhale return every year with the same old faces and the same old issues. The level of discussion in 2026 is the same as it was in 2010. Instead of giving a platform to new and revolutionary ideas, the organizers invite the same ‘established’ names that fit their marketing agenda. This festival is no longer exploring new intellectual territory, but merely regurgitating old ideas. Literature Becoming a Slave to Sponsors: Seeing the large hoardings of corporate brands in every corner of the festival, it seems that the voices of the writers have been drowned out by these brands. When literature becomes completely dependent on corporate funding, it loses the courage to question ‘power’ and the ‘system’. The JLF has now become an “intellectual spectacle.” The people of Jaipur have received nothing but traffic jams and pollution: The organizers managed to attract crowds without considering the city’s infrastructure, but it is the ordinary citizens of Jaipur who are paying the price. Hours of traffic jams, litter strewn across the streets, and noise pollution. For the people of Jaipur, the JLF is no longer a source of “cultural pride,” but an “annual headache.” The organizers call it “the world’s largest free literary festival,” but the heavy price is being paid by the culture and dignity of Jaipur’s literary scene.

Railway News:दिल्ली के लिए रेलवे पार्सल बुकिंग पर रोक

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गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रेलवे द्वारा दिल्ली क्षेत्र के लिए पार्सल बुकिंग पर चार दिनों की अस्थाई रोक लगाई गई है। उत्तर पश्चिम रेलवे जोधपुर के सीनियर मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने बताया कि रेलवे द्वारा जारी आदेशों के अनुसार 23 से 26 जनवरी तक चार दिन दिल्ली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्टेशनों नई दिल्ली, दिल्ली जंक्शन, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार टर्मिनल, दिल्ली सराय रोहिल्ला और आदर्श नगर दिल्ली के लिए सभी प्रकार के पार्सलों के लेन-देन पर अस्थाई प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने बताया कि इस अवधि में पार्सल गोदाम और रेलवे पार्सल पैकेजिंग गतिविधियां बंद रहेंगी। इसके अंतर्गत सभी स्टेशनों पर लीज पर दिए गए एसएलआर, एजीसी और वीपीएस के माध्यम से होने वाले अंदर व बाहर के समस्त पार्सल ट्रैफिक पर भी रोक रहेगी। इसके अतिरिक्त यात्री कोचों में यात्रियों को केवल व्यक्तिगत सामान ले जाने की अनुमति होगी। वहीं पंजीकृत समाचार पत्रों और पत्रिकाओं की बुकिंग संबंधित सभी वाणिज्यिक औपचारिकताओं की पूर्ति के पश्चात ही की जा सकेगी। यह आदेश सभी रेल मंडलों एवं क्षेत्रीय जोनों से दिल्ली क्षेत्र में रुकने वाली ट्रेनों की लोडिंग और अनलोडिंग गतिविधियों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।

Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में तुच्छ विषय शब्द का होता है उपयोग —विधानसभा अध्यक्ष

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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी दो सर्कुलरों पर हुये बवाल के संदर्भ में सफाई देते हुये कहा कि 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में सदन की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार का कोई नया प्रावधान नहीं किया गया है। विधायकों के लिए जारी किए गए समस्त बुलेटिन पूर्व विधानसभाओं के सत्रों की भांति ही हैं। प्रश्न पूछने की प्रक्रिया, शून्यकाल, प्रश्नकाल और अन्य संसदीय व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राजस्थान विधानसभा की स्वस्थ संसदीय परंपराओं के अनुसार ही इस सत्र में भी पूर्ववत व्यवस्थाएं ही रखी गई है। श्री देवनानी ने बताया कि वर्ष 1995 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा के निर्देशानुसार पर्ची पद्धति प्रारम्भ की गई थी, जो वर्ष 2020 तक सतत रूप से संचालित रही। यह व्यवस्था 20 मार्च 2020 तक लागू थी। 15 वीं विधानसभा के छठे सत्र के दौरान कार्य सलाहकार समिति की बैठक 10 फरवरी 2021 में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी द्वारा पर्ची व्यवस्था को बंद करने का निर्णय लिया गया था। हमने इस व्यवस्था को पुनः प्रारम्भ किया है। वहीं ’तुच्छ विषयों के उपयोग पर भी श्री देवनाानी ने अपनी सफाई में बताया कि राजस्थान विधानसभा की नियमावली में 1956 से, लोकसभा और देश के अन्य राज्यों की विधानसभा में भी-’प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम 37 (2) (17) में पहले से ही यह स्पष्ट प्रावधान है कि तुच्छ विषयों पर प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे। यह नियम राजस्थान विधान सभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियमों के प्रथम संस्करण 1956 से ही अस्तित्व में है। इसमें कोई नया परिवर्तन नहीं किया गया है।

JLF 2026: ‘साहित्य का महाकुंभ’ या ‘कॉर्पोरेट तमाशा’

JLF में बौद्धिक दिवालियापन और ‘सर्कस’ जैसा माहौल देखा गया। आयोजकों के लिए यह गर्व की बात हो सकती है कि यहाँ बड़ी संख्या में लोग आए, लेकिन सच यह है कि इनमें से 80 प्रतिशत लोग केवल ‘इंस्टाग्राम रील्स’ बनाने और सेलिब्रिटीज के साथ सेल्फी लेने आए थे। सत्रों के बीच गंभीर चर्चा के दौरान भी पीछे ‘फूड स्टॉल्स’ पर शोर-शराबा और हंसी-मजाक चलता रहा। क्या यह साहित्य का उत्सव है या किसी शॉपिंग मॉल का उद्घाटन? साहित्य के नाम पर धनी और प्रभावशाली परिवारों की तानाशाही: आयोजक ‘समावेशिता’ की बात करते हैं, लेकिन असलियत में यह फेस्टिवल एक धनी और प्रभावशाली परिवारों का समूह बनकर रह गया है। साधारण हिंदी या क्षेत्रीय भाषा के लेखकों को हाशिए पर रखा गया है, जबकि ‘विदेशी लहजे’ वाली अंग्रेजी बोलने वाले लेखकों को पलकों पर बिठाया गया। ₹14,000 प्रति दिन वाले ‘फ्रेंड ऑफ द फेस्टिवल’ पास वालों के लिए मखमली सोफे और आम साहित्य प्रेमी के लिए कंकड़-पत्थर वाली जमीन—यही है आयोजकों का ‘लोकतंत्र’। विचारों की जुगाली, नया कुछ भी नहीं: विलियम डेलरिंपल और नमिता गोखले वही पुराने चेहरे और वही पुराने मुद्दे लेकर हर साल आ जाते हैं। 2026 में भी चर्चा का स्तर 2010 जैसा ही है। आयोजक नए और क्रांतिकारी विचारों को मंच देने के बजाय उन्हीं ‘स्थापित’ नामों को बुलाते हैं जो उनके मार्केटिंग एजेंडे में फिट बैठते हैं। यह उत्सव अब विचारों की नई जमीन नहीं तलाश रहा, बल्कि पुरानी बातों की जुगाली कर रहा है। प्रायोजकों का गुलाम बनता साहित्य: फेस्टिवल के हर कोने पर कॉर्पोरेट ब्रांड्स के बड़े-बड़े होर्डिंग्स देखकर लगता है कि लेखकों की आवाज इन ब्रांड्स के नीचे दब गई है। जब साहित्य पूरी तरह से कॉर्पोरेट फंडिंग पर निर्भर हो जाता है, तो वह ‘सत्ता’ और ‘सिस्टम’ से सवाल पूछने की हिम्मत खो देता है। JLF अब एक ‘बौद्धिक विज्ञापन’ बन चुका है। जयपुर की जनता को सिर्फ जाम और प्रदूषण मिला: आयोजकों ने शहर के बुनियादी ढांचे की चिंता किए बिना भीड़ तो जुटा ली, लेकिन इसका खामियाजा जयपुर के आम नागरिक को भुगतना पड़ रहा है। घंटों का ट्रैफिक जाम, सड़कों पर फैला कचरा और शोर। जयपुर के लोगों के लिए JLF अब ‘सांस्कृतिक गौरव’ नहीं, बल्कि ‘सालाना सिरदर्द’ बन गया है। आयोजक इसे ‘दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त साहित्यिक उत्सव’ कहते हैं, लेकिन इसकी भारी कीमत जयपुर की संस्कृति और साहित्य की गरिमा चुका रही है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री ने पतंग उड़ाकर किया पतंग उत्सव का शुभारंभ

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को मकर संक्रांति के पर्व पर जल महल की पाल पर पतंग उत्सव (काइट फेस्टिवल) का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति पर्व की परंपरा में सहभागिता निभाई। मुख्यमंत्री ने इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर आधारित पतंगों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने लोक-कलाकारों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति के पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति एवं परंपरा का प्रतीक है। पतंग महोत्सव जैसे आयोजन प्रदेश की लोक संस्कृति, रचनात्मकता एवं सामाजिक चेतना को मजबूती देने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर इस वर्ष राज्य के समस्त सात संभाग स्तर और जैसलमेर व माउंटआबू में पतंग उत्सव का आयोजन किया गया है। इसी क्रम में जलमहल की पाल पर आयोजित पतंग उत्सव में रंग-बिरंगी पतंगों, पारंपरिक उल्लास एवं देशी-विदेशी पर्यटकों का संगम दिखाई दिया।

Political News: भाजपा सरकार के दबाव में फैसला नहीं बदलूंगा —पूर्व मंत्री मालवीया

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पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के भाजपा छोड़ कांग्रेस में घर वापसी की घोषणा पर उनके कारोबारी ठिकानों पर एसीबी की टीमें पहुंची। इस घटना पर मालवीया ने कहा कि भाजपा सरकार ने दबाव की राजनीति की है। एसीबी की घटना पर बुधवार को उन्होंने अपने गांव नाहरपुरा (आनंदपुरी) में एक सभा भी की। सभा में कई सवालों का जवाब भी दिया। उन्होने कहा कि भाजपा टीएसपी क्षेत्र में चल ही नहीं सकती। किसान खाद के संकट से जूझते रहे। मनरेगा का दो-दो साल से भुगतान नहीं हो रहा है। एसीबी टीम ने पेट्रोल पंप व क्रशर गिट्टी प्लांट पर पूछा कि कब से लाइसेंस है, कितनी बिक्री है, पैसा कैसे जमा हो रहा है। मैं आपको बता दूं, सब कुछ ऑनलाइन है। कांग्रेस में लौटने के सवाल पर उन्होने कहा कि 11 जनवरी को कांग्रेस को मेरा सदस्यता प्रस्ताव चला गया है। कोई कितना भी दबाव डाल लें, मैं अडिग हूं। मैं अपना फैसला नहीं बदलूंगा। उन्होने कहा मेरी पत्नी भी कांग्रेस में साथ आएंगी। एक घर में दो पार्टी कैसे रह सकती है।

Crime News: जोधपुर में बाप बना दरिंदा, छह साल की अपनी ही बेटी से किया बलात्कार

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पुलिस कमिश्नरेट जोधपुर में पिता द्वारा अपनी नाबालिग बेटी से बलात्कार करने का मामला संज्ञान में आया है। बताया जा रहा है पिता बेटी को डरा-धमकाकर 12 साल तक बलात्कार करता रहा। मामले खुलासा एफआईआर दर्ज होने पर हुआ। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित पुत्री ने अपने पिता पर डरा-धमकाकर कर 12 साल तक यौन शोषण करने और 15 साल छोटी बहन से छेड़छाड़ करने के एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं पुलिस ने बलात्कार और पॉक्सो की धाराएं जोड़ी हैं। बयान दर्ज कर पीड़िताओं का मेडिकल कराया है। जांच के लिये टीमें गठित की गई है और एफएसएल ने वारदात स्थल से साक्ष्य जुटाए है। पुलिस ने बताया कि आरोपी फरार है व मजदूरी करता है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह जब छह साल की थी, तभी से उसके पिता ने मारपीट कर बलात्कार किया था। फिर डरा-धमकाकर उसका यौन शोषण करते रहा। मां सहित परिजन को बताने पर जान से मारने की धमकियां भी देता था। पीड़िता ने बताया कि हालहि में एक महीने पहले भी उसने बलात्कार किया था और कुछ दिन पहले पिता ने 15 साल की छोटी बहन से छेड़छाड़ किया था। छोटी के विरोध करने पर उसे छोड़ दिया। हम दोनो बहनों ने मां को पूरी बात बताई थी।