जयपुर शहर की बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को देखते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर के ट्रैफिक को आधुनिक, सुगम और सुरक्षित बनाना है।
मजबूत प्रशासनिक ढांचा—
ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पुलिस विभाग के ढांचे में बड़ा विस्तार किया गया है। अब जयपुर में एडीसीपी (ट्रैफिक) के 4 और एसीपी (ट्रैफिक) के 8 नए पद सृजित किए गए हैं। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से मॉनिटरिंग और फील्ड वर्क में सुधार होगा। साथ ही, पुलिस अधिकारियों के लिए ‘प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन प्रणाली’ लागू की जाएगी, जिससे उनकी जवाबदेही तय होगी।
आधुनिक तकनीक का उपयोग—
शहर में ‘इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके तहत मुख्य चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल और कैमरे लगेंगे, जो ट्रैफिक घनत्व के अनुसार खुद समय तय करेंगे। यादगार (अजमेरी गेट) से सांगानेर तक एक ‘मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर’ विकसित किया जाएगा, जो पूरे शहर के लिए एक मानक बनेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड इंजीनियरिंग—
नई योजना में रोड इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को प्राथमिकता दी गई है। ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को चिन्हित कर उनमें सुधार किया जाएगा। इसके अलावा, अवैध अतिक्रमण हटाने और पार्किंग प्रबंधन को सख्त बनाकर सड़कों की चौड़ाई का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
सार्वजनिक परिवहन और सुगम संचालन—
शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सिटी बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन के रूटों का पुनः संयोजन किया जाएगा, ताकि सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम हो सके।
इस व्यापक कार्ययोजना से न केवल जयपुर के निवासियों को रोजाना के जाम से राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी शहर की छवि सुधरेगी। आने वाले समय में जयपुर का यातायात अधिक स्मार्ट और संगठित नजर आएगा।




