प्रदेश से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित पवित्र चारधाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ एडवाईजरी जारी की है। निदेशक (जन-स्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि अत्यधिक ऊंचाई, कड़ाके की ठंड, कम ऑक्सीजन और कम हवा के दबाव के कारण यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
7 दिन का प्लान और पर्याप्त विश्राम जरूरी—
डॉ. शर्मा के अनुसार, यात्री अपनी यात्रा की योजना कम से कम 7 दिनों के लिए बनाएं ताकि शरीर को वहां के वातावरण के अनुरूप ढलने (Acclimatization) का समय मिल सके। यात्रा के दौरान जल्दबाजी न करें; पैदल ट्रेक पर हर एक घंटे बाद और वाहन से चढ़ाई के दौरान हर दो घंटे बाद 5 से 10 मिनट का ब्रेक अवश्य लें। फेफड़ों की मजबूती के लिए रोजाना 5-10 मिनट श्वास व्यायाम (Deep Breathing) और 20-30 मिनट टहलने का अभ्यास शुरू कर दें।
पुराने रोगी रखें विशेष सावधानी—
एडवाईजरी में स्पष्ट किया गया है कि वृद्धजन और हृदय रोग, अस्थमा, उच्च रक्तचाप या मधुमेह से पीड़ित यात्री यात्रा पर निकलने से पहले अपनी फिटनेस जांच जरूर करवाएं। ऐसे रोगी अपनी नियमित दवाएं, ग्लूकोमीटर, बीपी मशीन और अपने चिकित्सक का संपर्क नंबर सदैव साथ रखें।
साथ रखें ये जरूरी सामान—
हिमालयी क्षेत्रों के बदलते मौसम को देखते हुए यात्री अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट और छाता जरूर रखें। आपात स्थिति के लिए पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर जैसे उपकरण भी किट में शामिल करें। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि यात्रा के दौरान यदि किसी को सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आना या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। इन नियमों का पालन कर श्रद्धालु अपनी आध्यात्मिक यात्रा को सुखद और सुरक्षित बना सकते हैं।




