Rajasthan News: शराब प्रेमी शराब की अच्छी गुणवत्ता के लिये करें सिटीजन एप का उपयोग

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आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने व जहरीली शराब से बचाने हेतु तैयार किए गए सिटीजन एप के माध्यम से अब शराब की बोतल पर लगे होलोग्राम स्टीकर के क्यूआर कोड को स्कैन करते ही असली या नकली शराब होने की जानकारी मिलेगी। अलवर जिला आबकारी अधिकारी अर्चना जैमन ने बताया कि अनाधिकृत तरीके से खरीदी गई शराब के खतरे को दृष्टिगत रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि यह एप गूगल प्ले स्टोर के जरिए मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हैं। इस एप के जरिए शराब की बोतल पर लगे होलोग्राम स्टीकर के क्यूआर कोड को स्कैन करने या क्यूआर नंबर दर्ज करने पर शराब के ब्रांड का पता चल जाएगा। साथ ही शराब की एमआरपी पैकिंग साइज, बैच नंबर, उत्पादन की तारीख व निर्माता का नाम भी पता चल जाएगा।

C M NEWS: मुख्यमंत्री का किसानों, पशुपालकों और डेयरी संघों के पदाधिकारियों के साथ बजट पूर्व संवाद

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसान और पशुपालक राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार स्तंभ है। राज्य सरकार इनको उन्नत, समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिए निरंतर फैसले ले रही है। श्री शर्मा ने कहा कि कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र एक दूसरे के पूरक हैं। आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करते हुए ये तीनों क्षेत्र आपणो अग्रणी राजस्थान के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। श्री शर्मा रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में किसानों, पशुपालकों और डेयरी संघों में पदाधिकारियों के साथ बजट पूर्व संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमने सरकार के गठन के तुरंत बाद राज्य के विकास का रोड मैप बनाते हुए कृषि क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं पानी और बिजली पर विशेष ध्यान दिया। पानी की पर्याप्त उपलब्धता के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंगनहर, माही बांध एवं देवास परियोजना के कार्यों को आगे बढ़ाया गया। वहीं बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में भी लगातार कार्य करते हुए हमने वर्ष 2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध करवाने का लक्ष्य तय किया है।

Rajasthan News: केंद्र की तर्ज पर राजस्थान में खुलेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस —डीजीपी शर्मा

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राजस्थान को साइबर सुरक्षा और महिला सुरक्षा में देश का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप पुलिस मुख्यालय में राजस्थान पुलिस और साइबरपीस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन ऑपरेटर्स की दो दिवसीय फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स वर्कशॉप का समापन नई ऊर्जा और बड़े संकल्पों के साथ हुआ। कार्यशाला के समापन अवसर पर महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री के बड़े ऐलान को साझा किया। उन्होंने बताया कि केंद्र के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की तर्ज पर अब राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) की स्थापना की जाएगी। इसे साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सभी जिलों में सूचना साझा करने और अनुसंधान के लिए एक मजबूत केंद्रीकृत ढांचा तैयार होगा। अपने संबोधन में उन्होने हेल्पलाइन ऑपरेटर्स को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि साइबर क्राइम की शिकायतों को अटेंड करना अब एक आर्ट है। आपकी संवेदनशीलता और त्वरित रिस्पॉन्स ही यह तय करेगा कि हम कितनी जल्दी पीड़ित का पैसा वापस दिला पाते हैं। उन्होंने समय की महत्ता पर जोर देते हुए ऑपरेटरों को फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में उनकी क्रुशियल भूमिका का अहसास कराया। डीजीपी ने राजस्थान में इस प्रकार के प्रशिक्षणों के माध्यम से होने वाले कौशल उन्नयन और साइबर क्राइम रोकने की दिशा में ऑपरेटर की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उन्होंने ऑपरेटर्स को तकनीकी दृष्टि से अप टू डेट होकर पीड़ितों की सहायता के लिए कार्य करने को प्रोत्साहित किया।

Rajasthan News: राजस्थान में एक साथ 38 फर्जी कांस्टेबलों पर हुई FIR दर्ज

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प्रदेश में कांस्टेबल भर्ती में फर्जी दस्तावेज और डमी कैंडिडेट के सहारे नौकरी पाने पर एसओजी ने 38 कांस्टेबलों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। मामला जालोर जिले का है। आपको बतादें कि एसओजी मुख्यालय जयपुर के निर्देश पर एसपी जालोर द्वारा गठित कमेटी ने वर्ष 2018 और 2021 की भर्ती प्रक्रिया में संदिग्ध कांस्टेबलों के दस्तावेजों की जांच की। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर सभी के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। यह कार्यवाही अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एसओजी जयपुर के आदेश पर हुई है। उन्होने 31 जुलाई 2024 को पिछले पांच वर्षों में हुई भर्तियों में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत करने और डमी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाकर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के मामलों की जांच के निर्देश दिए थे। पुलिस निरीक्षक अपराध सहायक, एसपी कार्यालय जालोर उदयपाल की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2018 में फर्जीवाड़े के मामले में कांस्टेबल जैसाराम, दिनेश कुमार, अर्जुन कुमार, घेवरचंद, यशवंतसिंह, दिनेश कुमार, बदाराम, गोपीलाल, हरीश कुमार, नरपतसिंह, दिनेश कुमार, नपाराम, सुरेश कुमार, चतराराम, सुरेश कुमार, भाणाराम, रमेश कुमार, सुशीला कुमारी, शांतिलाल, देवीसिंह, जितेंद्र कुमार, राकेश कुमार, मुकेश कुमार, डूंगरा राम, रेवन्तीरमण और खुशीराम के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। इन सभी के दस्तावेजों में भर्ती के समय एवं वर्तमान समय में हस्ताक्षरों में भिन्नता पाई गई। वहीं वर्ष 2021 की कांस्टेबल भर्ती में फर्जीवाड़े के आरोप में प्रदीप कुमार, अनिल कुमार, संजय कुमार, धनवंती, प्रियंका, ललिता, निरमा, सपना शर्मा, संदीप कुमार, पंकज कुमार और सोहनलाल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। इनके दस्तावेजों में भी भर्ती के समय और वर्तमान समय के हस्ताक्षरों में भिन्नता सामने आई है।

Rajasthan News: ‘बिना सिफारिश और बिना खर्चे के युवाओं को मिल रही नौकरी’ —अमित शाह

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि पारदर्शी तरीके से लोकसेवकों की भर्ती करने से ही कोई प्रदेश आगे बढ़ सकता है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार का पेपरलीक का सिलसिला खत्म कर राजस्थान को इससे निजात दिलाई है। उन्होंने कहा कि हमारी राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता रखते हुए भ्रष्टाचार का उन्मूलन और योग्यता का सम्मान करते हुए राजस्थान के युवाओं को ‘बिना सिफारिश और बिना खर्चे’ के नौकरी दे रही है। श्री शाह शनिवार को आरपीए में कांस्टेबल नव नियुक्ति समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अच्छी कानून व्यवस्था से ही प्रदेश का विकास संभव है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने पेपरलीक पर रोक लगाने के साथ-साथ कानून व्यवस्था को मजबूत बनाया और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान को पूरे देश में निवेश का अग्रणी राज्य बनाने का काम भी किया है। इसी का परिणाम है कि आज देशभर के निवेशक राजस्थान की ओर आने की स्पर्धा कर रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साइबर अपराध की चुनौती से प्रभावी रूप से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की तर्ज पर प्रदेश में राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आर4सी) की स्थापना की घोषणा की। आर4सी को साइबर अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। आर4सी के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के बीच साइबर अपराधों से संबंधित समन्वय, सूचना-साझाकरण और अनुसंधान को एक सुदृढ़ और केंद्रीकृत ढांचा प्रदान किया जाएगा। साथ ही, पुलिस अधिकारियों का क्षमता-वर्धन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले जवानों को बधाई देते हुए कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री से नियुक्ति पत्र मिलना युवाओं के लिए सोने पर सुहागा है। यह क्षण उन्हें कर्तव्यों को पूरी निष्ठा एवं समर्पण से निभाने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी नव चयनित कांस्टेबलों को तीन नए कानूनों के प्रावधानों को अच्छी तरह समझकर इनकी भावना के अनुरूप साइबर अपराध से लेकर संगठित अपराध तक, हर चुनौती के लिए सजग, सक्षम और तत्पर रहकर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पुलिस प्रशिक्षण के पुराने तौर-तरीकों को बदलते हुए आधुनिक बनाया है, जिसमें एआई और उन्नत फोरेंसिक जैसी तकनीक को भी शामिल किया गया है।

Rajasthan News: केंद्रीय गृह और मुख्यमंत्री की एक घंटे की चर्चा से उपजी सियासी अटकलें

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पुलिस अकादमी में हुए कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री भजनलाल के कामकाज पर संतोष जताया है। इससे प्रदेश में मुख्यमंत्री को बदलने की सभी अटकलें सिरे से खारीज हो गई और मुख्यमंत्री के साथ एक घंटे बंद कमरे की चर्चा ने कई मुद्दो हवा दी है। आपको बतादें कि अमित शाह करीब साढ़े तीन घंटे मुख्यमंत्री आवास पर रहे। इस दौरान कई नेताओं के साथ चर्चा हुई। लेकिन मुख्यमंत्री के साथ करीब एक घंटे की अलग चर्चा से कई सियासी अटकले उपजी है। इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि राजस्थान में लंबे समय से लंबित राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रियों के रिक्त पदों को भरें जा सकते है या कह सकते हैं कि मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। वहीं देश में बीवी जी राम जी लागू होने से उपजे सियासी गतीरोध से आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में होने वाले नुकसान पर खास चर्चा का भी कयास लगाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भाजपा के नेताओं को अमित शाह ने सरकार के बेहतर ढंग से काम करने में अपना सहयोग देने के लिये कहा है। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, राज्यवर्धन राठौड़, मदन दिलावर, हीरालाल नागर, मंजू बाघमार, झाबर सिंह खर्रा, वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ जैसे कई नेता मौजूद थे।

Jaipur News: राजधानी जयपुर में चलेंगे 250 गुलाबी ई-रिक्शा, लॉटरी से मिलेगा परमिट

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राजधानी जयपुर में यातायात को सुगम बनाने और नियंत्रित करने के लिए पुलिस आयुक्तालय ने ई-रिक्शा संचालन व्यवस्था में बदलाव किया है। यह व्यवस्था 18 जनवरी से लागू होगी। पुलिस आयुक्त जयपुर सचिन मित्तल ने बताया कि जोन-7 को पांच उप-जोन में बांटा है। यहां गुलाबी रंग के कुल 250 ई-रिक्शा संचालित किए जाएंगे। चारदीवारी में वर्तमान यातायात व्यवस्था 17 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी। उन्होने बताया कि चारदीवारी के लिए निर्धारित जोन-7 को अब ए, बी, सी, डी और ई उप-जोन में विभाजित किया है। सभी उप-जोन में 50 ई-रिक्शा संचालित किए जाएंगे। यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर लॉटरी के माध्यम से लागू की जाएगी। श्री मित्तल ने बताया कि ई-रिक्शा स्वामी सहायक पुलिस आयुक्त (उत्तर) यातायात नियंत्रण कक्ष, यादगार भवन के कक्ष संख्या 18ए से नि:शुल्क आवेदन पत्र प्राप्त कर जानकारी ले सकते हैं। ई-रिक्शा स्वामी आवेदन के साथ ई-रिक्शा पंजीयन, फिटनेस प्रमाण पत्र और चालक का वैध लाइसेंस संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन 11 से 15 जनवरी 2026 तक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक जमा किए जा सकेंगे। जांच के बाद 16 जनवरी को लॉटरी के माध्यम से जोनवार आवंटन किया जाएगा और केवल चयनित ई-रिक्शा ही निर्धारित जोन में चल सकेंगे।

Rajasthan News: ऑक्शन खानों के परिचालन में लाने में देरी देशव्यापी समस्या —प्रमुख सचिव माइंस

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राज्य के प्रमुख सचिव माइंस एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने कहा है कि मेजर और माइनर ब्लॉकों की आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ब्लॉकों की नीलामी में ईज ऑफ डूइंग की दिशा में राजस्थान तेजी से कदम बढ़ा रहा है। श्री रविकान्त अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर के दूसरे दिन के सत्र में आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्री-एम्बेडेड ब्लॉक्स फॉर आक्शन विषय पर प्रजेटेंशन के माध्यम से राजस्थान के अनुभव और कार्ययोजना प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राजस्थान में आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर 8 मेजर मिनरल ब्लॉक के ऑक्शन की प्रक्रिया जारी हैं वहीं माइनर मिनरल के 62 ब्लॉक और मेजर के 5 ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। प्रमुख सचिव ने कहा कि ऑक्शन खानों के परिचालन में लाने में देरी देशव्यापी समस्या है। आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने में देरी के चलते नीलाम खानों में खनन कार्य आरंभ नहीं हो पाता, जिससे निवेश, उत्पादन, रोजगार और सरकारी राजस्व प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि 2020 में इन्ही कारणों से केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को कम से कम 5 प्री-एम्बेडेड ब्लॉक ऑक्शन करने का लक्ष्य दिया। गुजरात ने एक और राजस्थान ने 8 मेजर मिनरल प्री-एम्बेडेड ब्लॉक आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ऑक्शन की प्रक्रिया आरंभ की। श्री रविकान्त ने कहा कि प्री-एम्बेडे़ड ब्लॉकों को भी नीलामी के स्तर तक लाने में आने वाली चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि जनसुनवाई में ही नोटिस प्रकाशन से मिनिट्स जारी होने तक दो माह तक का समय लग जाता है। आईबीएम से माइनिंग प्लान स्वीकृति के समय को भी कम किया जा सकता है। इसी तरह से सेक और सीया से बेहतर आपसी समन्वय के अभाव के कारण अनावश्यक समय लग जाता है। वन एवं वन्यजीव विभाग से अनुमतियों में अधिक समय लग जाता है। इस सबके बाद मिनरल की रिजर्व प्राइस तय करने वाला समय भी एक कारण हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों में लगने वाला समय कम हो सके इस तरह की व्यवस्था सुनिश्चित होना समय की आवश्यकता है। इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारों दोनों को ही समन्वित प्रयास करने होंगे। प्रक्रिया को आसान और समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने बताया कि नीलाम खानों में खनन कार्य शुरु करने के लिए करीब 20 अनुमतियां प्राप्त करनी होती है। यह पहला अनुभव होने और परस्पर समन्वय के बेहतर प्रयासों के बावजूद समय लगा पर इस समय को कम किया जा सकता है। श्री रविकान्त ने कहा कि खानों को जल्द परिचालन में लाना समय की मांग है और इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने बंशीपहाड़पुर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों के सफल ऑक्शन की चर्चा भी की।

Jaipur Accident: जयपुर के मानसरोवर में कार हादसा, 18 घायल और एक की मौत

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जयपुर के मानसरोवर में खरबास सर्कल पर शुक्रवार रात नौ बजे बेकाबू लग्जरी कार ने सड़क किनारे बैठे लोगों को रौंद दिया। इस हादसे में 18 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और एक व्यक्ति की मौत हो गई। मौके पर जुटी भीड़ ने चार लोगों को पकड़ लिया और उनकी जमकर पीटाई की। वहीं तीन लोग भीड़ से छूटकर भाग गए। जबकि एक को पुलिस पकड़ कर ले गई। हादसे में भीलवाड़ा निवासी रमेश बैरवा की मौत हो गई। कार में चार लोग सवार थे। मौके पर जुटी भीड़ ने चारों को पकड़कर जमकर पीटा। वहीं तीन लोग भीड़ से छूटकर भाग गए। जबकि एक को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दमन-दीव नंबर की एक कार तेज रफ्तार से वंदे मातरम रोड से मुहाना की तरफ जा रही थी। इसी दौरान घुमाव पर सर्कल से टकरा गई और कुछ दूर जाकर सड़क किनारे कुर्सी पर बैठे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर मची अफरा-तफरी से लोग बदहवास हो गये। चीख-पुकार सुनकर आसपास से लोग घटना स्थल पर पहुंचे और घायलों को जयपुरिया हॉस्पिटल पहुंचाया, वहां चार लोगों की गंभीर हालत देख उन्हें एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षतिग्रस्त ऑडी कार को जब्त कर लिया। पुलिस ने बताया कि चूरू निवासी दिनेश जाट कार चला रहा था। पकड़ा गया युवक चालक का साथी है। मामले की पुलिस जांच कर रही है कि इस घटना का कारण क्या था।

Jaipur Nwes: पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी पर चलेगा मु​कदमा, राज्यपाल ने दी अनुमति

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जलजीवन योजना में घोटाले के आरोपी पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी पर मुकदमा चलाने की राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। राज्यपाल ने धन शोधन निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट ) 2002 के तहत अंतर्गत प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित होने पर यह स्वीकृति प्रदान की है। बतादें कि महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी और ईडी ने मुकदमे दर्ज किए थे। अभियोजन स्वीकृति के बाद अब महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन घोटाले में ईडी और एसीबी के मामलों में कोर्ट में अलग-अलग मुकदमे चलाया जायेगा। श्री राज्यपाल बागडे ने संविधान के अनुच्छेद 164 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) (बी.एन. एस.एस 2023 की धारा 2018) के तहत जोशी के विरुद्ध धारा 3 व सपठित धारा 4 धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत मुकदमा चलाए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान की है। यह भी बतादें कि पूर्व मंत्री के खिलाफ 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ईडी ने मुकदमा दर्ज किया और ईडी ने 24 अप्रेल 2025 को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में वो सात महीने जेल में रहे थे। वहीं हाईकोर्ट ने जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, फिर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने पर उन्हें दिसम्बर 2025 के प्रथम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। अभी महेश जोशी जमानत पर हैं। प्रदेश में हुये जल जीवन मिशन के 900 करोड़ के इस घोटाले में मंत्री जोशी सहित कई अफसर और ठेकेदारों के नाम शामिल है। विभाग के नामजद अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई लेकिन वो अंजाम तक नहीं पहुंची। विभाग की ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण मामला में चर्चा जोरों पर है।