Rajasthan News: खान विभाग को मार्च में 1500 करोड़ के राजस्व संग्रहण का लक्ष्य: प्रमुख सचिव खान

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राजस्थान के खान विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में राजस्व संग्रहण की रफ्तार तेज कर दी है। विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने फील्ड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मार्च माह के लिए निर्धारित 1500 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गुरुवार को शासन सचिवालय में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) पर आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए श्री रविकान्त ने यह निर्देश दिए। गत वर्ष की तुलना में 936 करोड़ अधिक संग्रहण— बैठक के दौरान राजस्व आंकड़ों को साझा करते हुए प्रमुख सचिव ने बताया कि विभाग का प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर रहा है। 10 मार्च तक विभाग ने 9135 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रहित कर लिया है। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 936 करोड़ रुपये अधिक है, जो विभाग की सक्रियता और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है। मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना पर जोर— श्री रविकान्त ने अधिकारियों को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी 10 मार्च को आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राजस्व अर्जन करने वाले सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का स्पष्ट विजन है कि विकास कार्यों के लिए राजस्व लक्ष्यों को समय पर और पूर्ण रूप से हासिल किया जाए। खान विभाग इसी दिशा में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है। फरवरी में बना रिकॉर्ड, दिसंबर से जारी है बेहतर ग्रोथ- प्रमुख सचिव ने विभाग की हालिया उपलब्धियों की सराहना करते हुए बताया कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीनों में विभाग ने उत्कृष्ट विकास दर दर्ज की है। विशेष रूप से फरवरी माह में 1060 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व संग्रहित किया गया, जो विभाग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फील्ड अधिकारियों के लिए रोडमैप तैयार— मार्च के शेष दिनों में लक्ष्य प्राप्ति के लिए विभाग ने एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। यह रोडमैप सभी फील्ड अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया है, जिसमें राजस्व संग्रहण की रणनीतियों और निगरानी तंत्र का विवरण है। श्री रविकान्त ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी इस रोडमैप के अनुसार सघन निगरानी रखें और अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाते हुए वैध खनन से अधिकतम राजस्व सुनिश्चित करें। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला स्तर के फील्ड अधिकारी शामिल हुए, जिन्हें वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक मुस्तैदी से काम करने की शपथ दिलाई गई।

C M NEWS: नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार और तकनीक से खुलेगा नया अध्याय: मुख्यमंत्री 

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राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की वार्षिक कॉन्फ्रेंस नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान और नए नवाचारों का एक सशक्त मंच बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से देश-विदेश के नेत्र विशेषज्ञों के बीच आपसी सहयोग प्रगाढ़ होगा और चिकित्सा जगत में तकनीक के नए युग की शुरुआत होगी। श्री शर्मा गुरुवार को जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की 84वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। नया भारत और नई दृष्टि का संकल्प— मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘AIOC 2026’ मात्र एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक नई दृष्टि, नई सोच और नए भारत के निर्माण का संकल्प मंच है। उन्होंने कहा कि यहाँ होने वाली चर्चाएं और शोध के निष्कर्ष नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखेंगे। इस कॉन्फ्रेंस का मूल मंत्र ‘हेल्थी आईज-हैप्पी लाईव्स’ है, जो हमारी सामाजिक सोच की एक अद्भुत मिसाल पेश करता है। सरकारी अस्पतालों में लागू होंगी नई तकनीकें— मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र में आधुनिकरण पर जोर देते हुए घोषणा की कि इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सामने आने वाली नई तकनीकों, दवाओं और उन्नत शल्य चिकित्सा पद्धतियों को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में प्राथमिकता से अपनाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राजस्थान सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए हर संभव सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराएगी। इस 84वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस में देशभर के हजारों नेत्र रोग विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सा जगत की दिग्गज हस्तियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना की बीमारियों और लेजर सर्जरी जैसी अत्याधुनिक पद्धतियों पर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने अंत में आह्वान किया कि चिकित्सक समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझते हुए नवाचारों का लाभ आम जनता तक पहुँचाएं। उन्होंने आयोजकों को इस भव्य और उद्देश्यपूर्ण आयोजन के लिए बधाई भी दी।

19 मार्च से चैत्र नवरात्र प्रारंभ, पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा और विदाई हाथी से

शक्ति की आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्र वर्ष 2026 में 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस वर्ष का नवरात्र ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगभग 89-90 वर्षों बाद बन रहे एक दुर्लभ और अद्भुत संयोग के साथ आ रहा है।  ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, इस बार नवरात्र के पहले ही दिन एक विशेष ‘त्रिवेणी संयोग’ बन रहा है। 19 मार्च को चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या का समापन, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ और इसी दिन गौतम जयंती का होना इस पर्व की महत्ता को कई गुना बढ़ा रहा है। इस तरह का ग्रहों का मिलन पिछले नौ दशकों में नहीं देखा गया है, जो आध्यात्मिक साधकों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त— नवरात्र के पहले दिन, यानी 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाएगी। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:52 AM से 07:43 AM तक। अभिजीत मुहूर्त: यदि सुबह स्थापना संभव न हो, तो दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM के बीच कलश स्थापना की जा सकती है। विशेष ज्योतिषीय महत्व (विक्रम संवत 2083)— यह नवरात्र न केवल देवी उपासना का पर्व है, बल्कि 19 मार्च से ही हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का भी शुभारंभ हो रहा है। इस बार नवरात्र खरमास के दौरान पड़ रहे हैं (जो 15 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा), इसलिए पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय श्रेष्ठ है, लेकिन विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। यह महापर्व भक्तों के लिए आत्मशुद्धि और शक्ति संचय का अवसर लेकर आया है। काशी से लेकर कन्याकुमारी तक मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

Rajasthan News: राजस्थान में 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम 24 मार्च 2026 से पहले 

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प्रारंभिक शिक्षा एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि दोनों कक्षाओं का परीक्षा परिणाम 24 मार्च 2026 से पहले हर हाल में घोषित किया जाना चाहिए। विभागीय रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के कई केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और अंकों की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य अभी भी लंबित है। इस सुस्ती पर निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि किसी भी छात्र का परिणाम तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही के कारण अटकता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित डाइट प्राचार्य, सीबीआईओ और केंद्राधीक्षक की होगी। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि 5वीं और 8वीं की परीक्षाएं 6 मार्च को समाप्त हो चुकी हैं। शाला दर्पण पोर्टल पर अंकों की प्रविष्टि का काम 22 फरवरी से ही शुरू कर दिया गया था। अब विभाग ने सभी विषयों के प्राप्तांकों की ऑनलाइन फीडिंग के लिए 16 मार्च 2026 की अंतिम समय-सीमा तय की है। निदेशालय ने इस कार्य को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ की श्रेणी में रखा है। विभाग का लक्ष्य है कि समय पर परिणाम घोषित कर आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों को गति दी जा सके। सभी मूल्यांकन केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अतिरिक्त समय देकर शेष कार्य को निर्धारित समय में पूरा करें ताकि 24 मार्च तक सभी विद्यार्थियों के अंक पोर्टल पर अपडेट हो सकें और परिणाम जारी किया जा सके।

C M NEWS: जनसुझावों को समाहित करते हुए तैयार होंगे गांव-वार्डों के मास्टर प्लान —मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विकसित राजस्थान – 2047 के लक्ष्य के क्रम में राज्य के प्रत्येक ग्राम और वार्ड का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इन मास्टर प्लान्स में भविष्य की आवश्यकताएं और महिला, युवा, गरीब, किसान सहित सभी आयु वर्ग के सुझाव शामिल किए जाएंगे ताकि यह जन आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बन सके। श्री शर्मा मंगलवार को ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों के मास्टर प्लान की बजट घोषणा के क्रम में प्रस्तावित अभियान से संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पंचायत एवं वार्डों के मास्टर प्लान को लघु, मध्यम एवं दीर्घ अवधि की श्रेणियों में विभाजित करते हुए तैयार करें ताकि बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप उनकी जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मास्टर प्लान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास करना है जिससे ग्रामीणों का पलायन रूके और शहरों पर भार ना पड़े। उन्होंने साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण से मास्टर प्लान्स में शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की योजनाएं बनाने के विशेष दिशा-निर्देश दिए। विकास के साथ-साथ विरासत के मूल मंत्र पर आधारित होंगे मास्टर प्लान्स— श्री शर्मा ने कहा कि विकास के साथ-साथ विरासत के मूल मंत्र को केन्द्र में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों की परंपराएं, शिल्प कलाएं, धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप योजनाएं बनाई जाए। इन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीणों के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को संरक्षित और संवर्धित करना हो। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि प्रस्तावित अभियान में ग्राम सभाओं के माध्यम से मास्टर प्लान्स को अनुमोदित किया जाएगा। इसके पश्चात संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी योजना, नीति और कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जा सकेगी। इन मास्टर प्लान्स में रोजगार के प्रमुख स्रोत, कृषि उत्पादन बढ़ाने के उपाय, स्वरोजगार के अवसर आदि पर विशेष फोकस किया जाए। साथ ही, पात्र व्यक्तियों की पहचान कर उनका सरकारी योजनाओं में समावेशन सुनिश्चित भी किया जाएगा।

Rajasthan News: महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक- 2025 ध्वनिमत से पारित, आमेर में बनेगा विश्वविद्यालय

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जयपुर के आमेर में महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। इसके लिए लगभग 2 लाख वर्ग मीटर भूमि चिन्हित कर ली गई है। वहां चारदीवारी का निर्माण भी शुरू हो गया है। इसकी स्थापना में 101 करोड़ रूपए से अधिक की लागत आएगी। इस विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स साइंसेज, स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स कोचिंग, स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन, स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ एंडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन व प्रशिक्षण प्राप्त कर नवाचार कर सकेंगे। साथ ही, बॉयो मैकेनिक्स, फिजियोथैरेपी, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, डेटा एनालिसिस, स्पोर्ट्स मेडिसिन और न्यूट्रिशन साइंस में कॅरियर बनाने में भी यह विश्वविद्यालय मददगार बनेगा। विधान सभा में मंगलवार को महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय जयपुर विधयेक, 2025 ध्वनिमत से पारित हुआ। विधेयक पर चर्चा के बाद युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि इसकी स्थापना के लिए बजट वर्ष 2024-25 में घोषणा की गई थी। इसके जरिए शारीरिक शिक्षा और खेलकूद के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा। प्रशिक्षक और खेल विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे। इस विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र सम्पूर्ण राज्य रहेगा। इससे राज्य में खुलने वाले कोई भी खेल महाविद्यालय संबद्ध हो सकेंगे। शुरूआत में सभी सम्भागों से 1-1 खेल महाविद्यालय संबद्ध करने का प्रावधान किया गया है। यह विश्वविद्यालय राज्य सरकार के अधिसूचित शारीरिक शिक्षा महाविद्यालयों, खेल अकादमियों व सम्बन्धित संस्थानों के साथ ही राजकीय, निजी एवं अन्य खेल महाविद्यालयों को सम्बद्ध कर सकेगा। यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति और खेलो भारत नीति के उद्देश्यों का पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा। कुलगुरू की अध्यक्षता में बनेगा प्रबंध बोर्ड— विश्वविद्यालय में कुलगुरू की अध्यक्षता में प्रबंध बोर्ड गठित होगा। इसमें वित्त, उच्च शिक्षा, विद्यालय शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख शासन सचिव, राजस्थान राज्य क्रीडा परिषद के अध्यक्ष, राजस्थान विश्वविद्यालय शारीरिक शिक्षा निदेशक, प्रतिकुलगुरू और विश्वविद्यालय के कुल सचिव (सदस्य सचिव) पदेन सदस्य होंगे। इसमें कुलाधिपति द्वारा नामित शिक्षाविद्, दो विश्वविद्यालयों के आचार्य, पुरस्कृत दो खिलाड़ी सहित अन्य भी नामित सदस्य होंगे। सलाहकार परिषद का होगा गठन— विश्वविद्यालय के लिए एक सलाहकार परिषद का गठन होगा। इसमें कुलाधिपति से नियुक्त राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त व्यक्ति समिति के अध्यक्ष होगा। इनके साथ कुलगुरू, युवा मामले एवं खेल विभाग के प्रमुख शासन सचिव, राजस्थान राज्य क्रीडा परिषद के अध्यक्ष या नामित व्यक्ति, नेताजी सुभाष राष्ट्रीय क्रीडा संस्थान पटियाला के कार्यकारी निदेशक, अंतरराष्ट्रीय खेलों में रैफरी या अम्पायर कार्य के लिए मान्यता प्राप्त दो प्रमुख खिलाड़ी, ओलम्पिक या विश्व चैम्पियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच खिलाड़ी, अर्जुन, द्रोणाचार्य, गुरू वशिष्ठ या महाराणा प्रताप पुरस्कार प्राप्त दो खिलाड़ी, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में फिजियोथैरेपी संकायाध्यक्ष सदस्य होंगे। महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय के कुल सचिव को सदस्य सचिव नियुक्त किया जाएगा। नियुक्ति करेंगे 150 स्थाई खेल प्रशिक्षक— खिलाड़ियों को बेहतर खेल प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान राज्य क्रीडा परिषद में लगभग 150 स्थाई प्रशिक्षकों की भर्ती की जाएगी। साथ ही, 700 प्रशिक्षक अस्थाई रूप से भी लगाए जाएंगे। खेल मंत्री ने बताया कि जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज को रीको ने एडॉप्ट किया है। हमारा प्रयास रहेगा कि सीएसआर या अन्य विकल्पों के जरिए खिलाड़ियों और खेल को लगातार प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि इंडीविजुअल स्पोर्ट्स पर्सन की मदद करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

Rajasthan News: राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पारित, दो से अधिक संतानों वाले प्रत्याशी चुनावों में ले सकेंगे भाग

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को राजस्थान विधानसभा में राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया। संशोधन विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि दो से अधिक संतानों वाले प्रत्याशी अब नगर निकायों के चुनावों में भाग ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि को रोकने हेतु पूर्व में दो से अधिक संतान वाले व्यक्तिओं को नगर निकाय चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया था। आमजन में बढ़ी सजगता के कारण बदले परिदृश्य में यह नियम अब अप्रासंगिक है। लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप इसे संशोधित करने का निर्णय लिया गया है। इससे अनुभवी लोगों को नगर निकायों से लोकतांत्रिक रूप से चुन के आने का अधिकार मिल सकेगा।
श्री खर्रा ने कहा कि साथ में ही उपरोक्त संशोधन के अंतर्गत राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 में परिभाषित खतरनाक रोग की सूची से कुष्ठ रोग को बाहर कर दिया गया है ताकि कुष्ठ प्रभावित या उपचारित व्यक्तियों के साथ कोई भेदभाव ना हो। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए आदेश की पालना में यह निर्णय लिया गया है। ओबीसी जनसंख्या का स्पष्ट आंकड़ा ना होने के कारण निकाय चुनाव में देरी— श्री खर्रा ने कहा कि विभिन्न प्रदेशों के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोगों द्वारा अन्य पिछड़ी जातियों को राजनीतिक आरक्षण देने हेतु रिट याचिकाएं दायर की गई थी। रिट याचिकाओं पर निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अधिकृत आंकड़े राज्य सरकार को प्रस्तुत करने होंगे। यह आंकड़े राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किए जाने के उपरांत अन्य पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक आरक्षण दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग जनसंख्या के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण नगर निकाय चुनाव में विलंब हो रहा है। राज्य सरकार की मंशा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक आरक्षण देकर नगर निकायों में उनका उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। नगर निकायों में तय मापदंडों के अनुसार हो रहा परिसीमन— नगरीय विकास मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार तय मापदंडों के अनुसार नगर निकायों का उचित परिसीमन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि 309 में से 234 नगर निकायों में मापदंडों के अनुसार ही परिसीमन किया गया है। शेष निकायों में भी न्यूनतम विचलन आया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 10 के तहत राज्य सरकार को सीमांकन का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि तीन नगरीय निकायों में चार रिट याचिकाएं दायर की गई थी इस सम्बंध में हाल ही में माननीय उच्च न्यायलय की खंड पीठ ने अपने निर्णय में वार्डो के पुनर्गठन को उचित ठहराया है। चर्चा के दौरान श्री खर्रा ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतिम आंकड़े आने में चार से छह महीने लगेंगे। अतः उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही वर्तमान मतदाता सूची तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों के विरुद्ध विरोध कठोर कार्रवाई हेतु विभाग कृत संकल्पित है। उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि एमपी/एमएलए लेड से किसी विकास कार्य के लिए राशि तभी स्वीकृत हो सकती है जब उसके लिए राजस्व रिकॉर्ड में भूमि उपलब्ध हो।

Rajasthan News: होमगार्ड स्वयंसेवकों की नामांकन प्रक्रिया 16 मार्च 2026 से 

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गृह रक्षा विभाग द्वारा राजस्थान होमगार्ड स्वयंसेवकों की नामांकन प्रक्रिया दिनांक 16 मार्च 2026 से 4 अप्रैल 2026 तक केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान,फतेहपुरा बेगस, जयपुर में आयोजित की जाएगी। नामांकन प्रक्रिया में 269 रिक्त पदों के विरूद्व 67,943 अभ्यर्थी भाग लेंगे। प्रत्येक अभ्यर्थी को मोबाईल SMS एवं ई-मेल द्वारा सूचित किया जाएगा जिसमें दिये गए लिंक अथवा विभागीय वेबसाईट http://home.rajasthan.gov.in/homeguards पर जाकर अभ्यर्थी अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। 
नामांकन प्रक्रिया लगभग 3 सप्ताह तक चलना सम्भावित है। अभ्यर्थी को निर्धारित दिनांक को अपने केंद्र पर आवश्यक मूल दस्तावेजों के साथ समय पर उपस्थित होना होगा व प्रवेश पत्र के साथ संलग्न महत्वपूर्ण अन्य सभी दिशा-निर्देशों की पालना करना आवश्यक होगा। प्रक्रिया सम्बन्धित अन्य जानकारी  के लिए अभ्यर्थी कार्यालय के दूरभाष नम्बर 0141-2377797 पर सम्पर्क कर सकता है।

C M NEWS: मुख्यमंत्री का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, 50 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रदेश में संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन स्थापित करने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने और अनुशासनहीनता रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए और विभागीय जांच के 50 से अधिक लंबित प्रकरणों का निस्तारण कर ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री ने निजी व्यक्तियों को गैर-कानूनी तरीके से लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोपों में घिरे तत्कालीन उपखण्ड अधिकारी सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। यह कदम स्पष्ट करता है कि पद का दुरुपयोग करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। IPS और राज्य सेवा अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई— शासन की शुचिता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने एक भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के विरुद्ध दो प्रकरणों में संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से दंड की मात्रा बढ़ाने का अनुमोदन किया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सेवा के 27 अधिकारियों के विरुद्ध संचालित सीसीए नियम-16 के तहत 23 प्रकरणों में बड़ी कार्रवाई की गई है। इन अधिकारियों की दो से चार वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की शास्ति दी गई है। सेवानिवृत्त कर्मियों पर भी शिकंजा— भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अभियान केवल वर्तमान कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के 5 मामलों में पेंशन रोकने के आदेश दिए हैं। वही 9 अन्य प्रकरणों में जांच निष्कर्षों का अनुमोदन कर फाइलें राज्यपाल को भेजी गई हैं।

C M NEWS: गांव से लेकर शहर तक का समग्र एवं योजनाबद्ध विकास हो सुनिश्चित- मुख्यमंत्री 

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आधारभूत सुविधाओं का सुनियोजित विकास कर आमजन के जीवन को बेहतर बनाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं को लेकर सभी विभाग समन्वय से कार्य करें, ताकि आमजन को समयबद्ध रूप से पूरा लाभ पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विजन के अनुरूप योजनाबद्ध विकास के लिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर शहरी नगर निकाय व जिला स्तर तक के लिए मास्टर प्लान की कार्ययोजना बनाकर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। श्री शर्मा ने कहा कि ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राउंड जीरो पर जाकर पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सर्वे किया जाए, जिससे संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सड़क, सीवरेज, शुद्ध पेयजल और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना हमारी अवसंरचना विकास से जुड़ी योजनाओं और नीतियों का केंद्र बिंदु है।  इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवासन, स्वायत शासन विभाग, जयपुर विकास प्राधिकरण एवं राजस्व विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।